माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। पिछले दिनों जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में राशन डिपो संचालकों पर लगाए गए 119 करोड़ की हेराफेरी के मामले में जांच अधिकारी एसएडीएम ने तीन पक्षों के बयान दर्ज कर लिए हैं। जिला खाद्य एवं आपूर्ति कार्यालय से जो पुराना रिकॉर्ड मांगा गया था, वह विभाग अभी तक उपलब्ध नहीं कराया पाया है। जांच अधिकारी ने रिकॉर्ड डीएफएससी मुख्यालय से मांगा है।
पिछले दिनों जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में शिकायतकर्ता मनिंद्र कुमार ने केबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा के सामने 119 करोड़ रुपए के राशन घोटाले का मामला उठाया था। शिकायतकर्ता का साथ विधायक जगमोहन आनंद ने भी दिया तो मंत्री ने भी मामले को गंभीरता से लेकर जांच के आदेश दिए। डीसी ने मौके पर ही एसडीएम अनुभव मेहता को जांच सौंप दी थी। एसडीएम ने बताया कि शिकायतकर्ता, आरोपी राशन डिपो संचालक और डीएफएससी तीनों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं।
आरोपों को सिद्ध करने के लिए जो रिकॉर्ड चाहिए, वह अभी तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। शिकायतकर्ता भी पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। डीएफएससी ने जो साक्ष्य दिए हैं, वह पर्याप्त नहीं है, पुराना रिक़ॉर्ड चाहिए, जिसे अब मुख्यालय से मांगा गया है। जैसे ही रिकॉर्ड मिलता है, वैसे ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि डिपो होल्डर अभी भी यही कह रहा है कि शिकायतकर्ता से उसकी नाराजगी है, वह जानबूझकर उसे फसाने के लिए आरोप लगा रहा है। अब कार्डो पर राशन वितरण की स्थिति में जांच में अहम विषय है। इसका रिकॉर्ड भी मांगा जा रहा है।