करनाल।
वर्ष-2013 के रेल बजट में हरियाणा में रेल कोच फैक्टरी लगाने के लिए की गई
घोषणा कागजी साबित हुई। केंद्रीय रेल मंत्रालय ने अब तक प्रदेश में ऐसी
किसी भी फैक्टरी को मंजूरी नहीं दी है। रेल मंत्रालय और प्रदेश सरकार के
बीच इस विषय में कोई एमओयू तक साइन नहीं किया गया है। फैक्टरी के लिए
प्रदेश सरकार ने अब तक जमीन भी रेल मंत्रालय को नहीं दी है। मंत्रालय से
आरटीआई के जरिये मांगी गई सूचना में यह खुलासा हुआ है। इसमें स्पष्ट किया
गया है कि अब तक हरियाणा में रेल कोच फैक्टरी को इजाजत नहीं दी गई है। भले
ही प्रदेश सरकार रेल कोच फैक्टरी हरियाणा में लाने का श्रेय ले रही हो,
लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत है। करनाल के आरटीआई एक्टीविस्ट एडवोकेट
राजेश शर्मा ने यह जानकारी हासिल की। रेल मंत्रालय की ओर से बताया गया है
कि कोच फैक्टरी के निर्माण के लिए 370 एकड़ जमीन की जरूरत है। प्रदेश सरकार
ने जमीन मंत्रालय को नहीं दी है। स्पष्ट है कि रेल कोच फैक्टरी की घोषणा
को एक साल से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन इस दिशा में कोई कदम नहीं
उठाया गया है।
एमओयू भी नहीं हुआ
रेल मंत्रालय की ओर से कोच की
आवश्यकता के आकलन के लिए एक कार्यकारी निदेशक समिति की नियुक्ति की गई है।
आगे की कार्रवाई यही समिति देखेगी और समिति की सिफारिशाें के आधार पर ही
मंत्रालय आगे बढ़ेगा। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि अब तक रेल कोच फैक्टरी के
लिए राज्य सरकार के साथ कोई समझौता (एमओयू) तक नहीं हुआ है। इसके निर्माण
पर कितना खर्च होगा, यह फैक्टरी कब बननी शुरू होगी और कब तक बनकर तैयार हो
जाएगी, कुछ भी तय नहीं है।
सिर्फ सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने रखी थी मांग
आरटीआई
में रेल मंत्रालय से पूछा गया था कि इस प्रोजेक्ट के लिए प्रदेश के
किस-किस सांसद ने मांग उठाई और पत्र लिखे। मंत्रालय के मुताबिक सिर्फ रोहतक
के सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने गोहना में कोच फैक्टरी लगवाने के लिए दो बार
पत्र लिखे थे। उनके पांच फरवरी 2013 को लिखे गए पहले पत्र पर तत्कालीन रेल
मंत्री पवन बंसल ने उसी बजट में रेल कोच फैक्टरी की घोषणा कर दी थी। 22 जून
2013 को दूसरे पत्र में उन्होंने रेल मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे से निवेदन
किया था कि घोषणा के अनुसार फैक्टरी की आधारशिला अगस्त 2013 में रखी जाए।
उनके अलावा किसी भी सांसद ने केंद्रीय रेल मंत्रालय को अपने क्षेत्र में
रेल कोच फैक्टरी के लिए कोई पत्र नहीं लिखा।