राशन वितरण प्रणाली को ऑनलाइन करने के बाद समस्या बढ़ गई है। इसका कारण है एक तो नए सिस्टम को लेकर डिपोधारकों की उदासी और दूसरा बायोमीट्रिक मशीन की खराबी। आलम यह है कि महीने के पहले ही डिपो के गोदामों में राशन पहुंच गया है, लेकिन दो सप्ताह बाद भी पात्र लोगों को राशन नहीं मिल पा रहा है। किसी के फिंगर प्रिंट मैच नहीं हो रहे हैं तो किसी के नाम गलत फीड हो रखे हैं। कुल मिलाकर यहां पर नोटबंदी जैसा आलम है। लोग सुबह डिपो पर आते हैं तो मशीन बंद है, कहकर उन्हें चलता कर दिया जाता है। लोगों की समस्या टटोलती एक रिपोर्ट :
मंगलवार को अमर उजाला की टीम ने शहर के डिपो का दौरा किया और राशन वितरण प्रणाली को देखा। सभी डिपो के गोदाम गेहूं, चावल, चीनी और दाल से भरे हुए हैं, लेकिन पात्र लोगों को राशन नहीं मिल पा रहा है। रामनगर, प्रेम नगर व शिव कॉलोनी स्थित डिपो सेंटरों पर प्वाइंट आफ सेल (पीओएस) डिवाइस मशीन बंद मिली। यह मशीन बायोमीट्रिक सिस्टम बेस है और इसी के तहत सारा वितरण ऑनलाइन होना था। इस माह मात्र कुछ ही डिपो पर वितरण हो पाया, इसके तुरंत बाद से सभी डिपो पर ऑनलाइन प्रणाली दम तोड़ गई।
अमर उजाला टीम ने रामनगर के चावला ब्रदर्स और अन्य राशन डिपोधारकों के पास जाकर व्यवस्था का जायजा लिया तो मशीनें न चल पाने के कारण उपभोक्ता डिपो धारकों से झगड़ते नजर आए। कई उपभोक्ता तो ऐसे पाए गए, जिनके ऑनलाइन व्यवस्था के कारण डिपो धारकों के पास नाम भी कटे मिले। ऐसे ही कई लोगों ने अपनी व्यथा सुनाई। पिछले कई दिनों से जिले के 604 राशन डिपो पर अनाज और चीनी का स्टॉक तो पहुंच गया है, लेकिन ऑनलाइन मशीनों के न चल पाने के कारण उपभोक्ताओं को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। जिले के सभी राशन वितरकों को भी मशीनों में सिग्नल न आने से दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लोगों का कहना है कि प्रणाली को ऑनलाइन करने की प्रक्रिया तो अच्छी है, लेकिन इसको चलाने के लिए पहले से पूरे प्रबंध नहीं किए गए थे, जिस कारण मशीनों में नेटवर्क नहीं आ रहा। वहीं, रामनगर स्थित एक अन्य डिपो पर भी कुछ इसी प्रकार के हालात मिले।
नहीं शुरू हुए जिले में रिपेयर सेंटर
राशन वितरण प्रणाली को ऑनलाइन करने के लिए दो माह पूर्व एनडीआरआई के सभागार में खाद्य एवं पूर्ति विभाग के अधिकारियों और मंत्री कर्णदेव कांबोज ने प्रदेशभर के राशन डिपोधारकों को बुलाकर मशीन का प्रशिक्षण और जानकारी भी दी थी। उन्होंने घोषणा भी की थी कि जिस कंपनी की मशीन डिपो धारकों को दी जाएंगी। उस कंपनी का जिले में एक ऐसा सेंटर भी होगा, जो मशीन में खराबी आने या सर्वर में प्रॉब्लम होने पर कंपनी का एक कर्मचारी तुरंत उसे ठीक करने के लिए पहुंच जाएगा, लेकिन पिछले कई दिनों से सर्वर खराब होने के कारण मशीनें बंद पड़ी हैं।
जिले में हैं 2 लाख 10 हजार 504 उपभोक्ता
जिले में 2 लाख 10 हजार 504 उपभोक्ता है। इनमें 54,170 बीपीएल, 12753 एवाई और 1 लाख 43 हजार 585 ओपीएच उपभोक्ता शामिल है। इन्हें जिले के 604 डिपो धारक राशन वितरण करते हैं।
रेनू बाल डिपो पर राशन कार्ड था। इस बार जब ऑनलाइन प्रणाली से राशन लेने के लिए आया तो डिपो धारक ने कहा कि उसका नाम उसके डिपो पर नहीं है। ऑनलाइन प्रणाली में कई उपभोक्ताओं के नाम कटे हुए हैं। इससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
- अजीत सिंह, निवासी, न्यू राम नगर
मैं राशन लेने के लिए आया था। जब डिपो धारक बलविंद्र कौर के पास मशीन पर अपना अंगूठा लगाया तो मिसमैच बताया। डिपो धारक ने कहा कि जब तक अंगूठा मैच नहीं होगा तब तक राशन नहीं मिलेगा।
- ज्ञान चंद, निवासी, रामनगर
डिपोधारक करेंगे ऑनलाइन प्रणाली का बहिष्कार : गुप्ता
हरियाणा डिपो होल्डर एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष धर्मपाल गुप्ता ने कहा कि शुरुआत में मशीनें ठीक चलीं, लेकिन 15 नवंबर के बाद नेटवर्क नहीं आ रही। उपभोक्ता डिपो धारकों के साथ लड़ाई करते हैं। मशीनों के ठीक संचालन के लिए खाद्य पूर्ति विभाग के निदेशक रवि प्रकाश गुप्ता को पत्र लिख चुके हैं। यदि जल्द मशीनें नहीं चलीं तो पूरे प्रदेश के डिपोधारक ऑनलाइन प्रणाली का विरोध करेंगे। वहीं, 11 महीनों से प्रदेश भर के डिपोधारकों को कमीशन नहीं मिल पा रहा है।
जिले में अधिकतर राशन वितरण की मशीनें ठीक प्रकार से कार्य कर रही हैं। एनआईसी के सर्वर में दिक्कत आने के कारण दो-तीन दिन से नेटवर्क में थोड़ी दिक्कत आ रही है। सर्वर को ठीक किया जा रहा है। अधिकतर काम हो गया है। जल्दी ही काम पूरा हो जाएगा।
- अनिल कुमार, डीएफएससी, करनाल