करनाल। नमो भारत काॅरिडोर परियोजना यानी रैपिड रेल के संचालन की तैयारियों में तेजी आ गई है। दिल्ली के सराये काले खां से लेकर करनाल जिले तक की इस परियोजना के लिए नेशनल हाईवे-44 के किनारे तय रेल मार्ग से बिजली के केबल हटवाने की विभागीय प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके अलावा मास्टर प्लान में चार नए फ्यूचर स्टेशन भी तय किए गए हैं। अभी केवल 17 स्टेशन ही बनाए जाने हैं, जबकि मास्टर प्लान में इनसे अलग सोनीपत से लेकर करनाल तक चार और फ्यूचर स्टेशनों का उल्लेख किया गया है।
एनसीआरसीटी ने दिल्ली से करनाल तक के मार्ग में पड़ने वाली 220 केवी, 132 केवी ट्रांसमिशन लाइन और 66 व 33 केवी की भूमिगत व अन्य तारों को शिफ्ट कराने के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी है। 12 से 19 मार्च के बीच में इसे लेकर तीन टेंडर खोले जाएंगे। टेंडर आवंटित होने के बाद धरातल पर काम शुरू होगा। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री एवं करनाल के सांसद मनोहर लाल का कहना है कि परियोजना को अब केवल केंद्रीय कैबिनेट की स्वीकृति का इंतजार है। इससे पहले प्रशासनिक स्तर पर सभी जरूरी औपचारिकताएं व रोड मैप संबंधित कार्य पूरा किया जा रहा है। मार्च माह में होने वाली प्रस्तावित बैठक में इसे मंजूरी मिलने की उम्मीद है। इसके बाद धरातल पर काम शुरू होता है तो 2029 तक दिल्ली से करनाल तक रैपिड रेल का संचालन शुरू होगा। ब्यूरो
यह हैं तय और फ्यूचर स्टेशन
- करनाल : न्यू आईएसबीटी, सेक्टर-7, घराैंडा, कोहंड, (करनाल बाईपास-फ्यूचर स्टेशन)
- पानीपत : पानीपत शहर, आईएसबीटी सिवाह, समालखा, (सेक्टर-18-फ्यूचर स्टेशन)
- सोनीपत : गन्नाैर, मुरथल, बहालगढ़, कुंडली, (फ्यूचर स्टेशन : बारही और केएमपी)
केंद्रीय व राज्य मुख्यालयों से जमीन की मांगी स्वीकृति
रैपिड रेल के करनाल तक विस्तार के लिए नेशनल हाईवे-44 के साथ ही बनने वाले कॉरिडोर को लेकर केंद्र व राज्य सरकार के विभागों की जमीन ली जाएगी। अधिग्रहण होने वाली जमीन कुछ राज्य सरकार के विभागों और केंद्रीय संस्थानों के अंतर्गत आती है, जिनके अधिग्रहण के लिए केंद्रीय मंत्रालयों से संपर्क जारी है। उपायुक्त उत्तम सिंह के अनुसार, इसके लिए स्थानीय अधिकारियों की ओर से भी मुख्यालय व केंद्रीय विभागों को पत्र लिखकर स्वीकृति ली जा रही है। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद ही जमीन ट्रांसफर व अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होगी।
प्रोजेक्ट एक नजर में-
- वर्ष 2020 में करनाल तक रैपिड रेल लाने की घोषणा हुई थी।
- 2021 में ड्रोन मैपिंग कर रूट तय करते हुए एलिवेटेड ट्रैक के लिए पिलर, स्टेशन और डिपो बनाने के लिए जगह तय की गई।
- केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के प्रयास से 2025 में करनाल तक लाने के लिए दोबारा फिजिबिलिटी सर्वे किया गया।