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अस्पताल में गर्भवती महिला की मौत पर हंगामा

Tue, 29 Jul 2014 11:51 PM IST
अमर उजाला/ब्यूरो, करनाल
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कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में मंगलवार को गांव बजीदपुर की आठ महीने की गर्भवती महिला पिंकी (22) की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि एक घंटे तक गर्भवती महिला जच्चा-बच्चा विभाग में तड़पती रही, लेकिन डॉक्टर मौके पर नहीं पहुंचे।
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नर्स कभी प्राइवेट अस्पताल में इलाज करवाने की हिदायतें देती रहीं तो कभी तड़पती महिला को संभाला ही नहीं। इस स्थिति को देखकर परिजन परेशान हुए, लेकिन व्यवस्था के खिलाफ आवाज नहीं निकाल सके। जब उनके सामने महिला की मौत हुई तो परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया और डॉक्टरों के खिलाफ नारेबाजी की गई।

दूसरी तरफ मेडिकल कालेज के डॉक्टर का कहना है कि महिला की मौत हार्ट अटैक से हुई है। परिजनों ने मेडिकल कॉलेज में महिला का पोस्टमार्टम नहीं करवाया और शव को ले गए। मंगलवार सुबह साढ़े नौ बजे गांव बजीदपुर की गर्भवती महिला को गांव डबरकी पार जमुखला के उसके मायके वाले लेकर आए। क्योंकि महिला का पति विनोद कहीं बाहर गया हुआ था।
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महिला के पिता प्रकाश व परिजन अशोक, सोनू, वंती, सीमा, प्रीति, रजनी ने बताया कि पिंकी को तकलीफ ज्यादा थी। सुबह साढ़े नौ बजे वह मेडिकल कॉलेज लेकर आए। लेकिन यहां पर डॉक्टर नहीं मिले। नर्स स्टाफ निजी अस्पताल में लेकर जाने की दुहाई देने लगी। परिजनों ने गुहार लगाई कि उनके पास पैसा नहीं है। इस कारण से उन्हें मेडिकल कालेज आना पड़ा है।

ईद की छुट्टी मना रहे थे डॉक्टर
नर्स स्टाफ ने कहा कि ईद की छुट्टी होने के कारण डॉक्टर नहीं आ सकते। महिला इस दौरान तड़पती और कराहती रही। साढ़े दस बजे महिला ने दम तोड़ दिया। इस दौरान आठ महीने के बच्चे की भी मौत हो गई। परिजनों ने रोते बिलखते हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों का आरोप है कि नर्स स्टाफ बार-बार कहती रही कि महिला को चंडीगढ़ ले जाओ। यहां रखने का कोई फायदा नहीं है। यदि डॉक्टर इलाज करते तो महिला की मौत नहीं हो सकती थी।

डॉक्टरों ने नहीं उठाया फोन
मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर छुट्टी के दिन फोन तक नहीं उठाते। मंगलवार को हंगामे के दौरान परिजन डॉक्टरों को फोन करते रहे, लेकिन किसी भी डॉक्टर ने फोन नहीं उठाया। मामले में बातचीत के लिए जब कालेज के डायरेक्टर को फोन किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।
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