संवाद न्यूज एजेंसी
असंध। राजयोग ध्यान से मन ही नहीं, शरीर भी स्वस्थ रहता है। इसमें जीवन की हर समस्या का हल समाया हुआ है। राजयोग के अभ्यास से हमारी सुषुप्त शक्तियां जागृत हो जाती हैं। हमें राजयोग का अभ्यास निरंतर जारी रखना चाहिए।
करनाल रोड स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में श्रद्धालुओं को राजयोग मेडिटेशन के बारे में जानकारी देते हुए निदेशक उत्तराखंड एवं वरिष्ठ समन्वयक स्पोर्ट्स विंग भ्राता मेहर चंद ने कहा कि हर व्यक्ति भगवान को किसी न किसी रूप में याद करता है लेकिन सत्य जानकारी न होने के कारण उसकी बुद्धि भगवान की याद में एकाग्र नहीं होती।
उन्होंने कहा कि मेडिटेशन करने से आपके जीवन से नकारात्मकता बाहर हो जाएगी और सकारात्मकता उत्पन्न होगी। इससे जीवन में खुशियों से भरपूर आती है। बीके ऊषा दीदी ने कहा कि हर जिम्मेदारियों को तनाव मुक्त तरीके से करने के लिए राजयोग मेडिटेशन को दिनचर्या में अपनाएं। आत्मा का परमात्मा से मिलन ही राजयोग है। बीके नीलम दीदी ने कहा कि राजयोग का अभ्यास हमारे विचारों का शुद्धिकरण करता है, जिससे स्वत: ही हमारे कर्म श्रेष्ठ हो जाते हैं। बीके सरिता ने कहा कि राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास तनावमुक्त करेगा। उन्होंने कहा कि तनाव के मुख्य कारण हमारा अहंकार है।