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आसमान से बरसी आफत, मंडी में भीगा किसानों का सोना

Fri, 11 Oct 2013 09:54 PM IST
करनाल
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बेमौसम की बारिश ने जिलेभर में बुरी तरह तबाही मचाई है। बारिश के कारण खेत में खड़ी धान की फसल गिर गई तो अनाज मंडियों में पड़ा कई लाख क्विंटल धान भीग गया। इस कारण किसानों और राइस मिल संचालकों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। किसानों और राइस मिलर्स ने शुक्रवार को हुई बारिश को एक तरह से प्राकृतिक आपदा बताया है।
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दोनों पक्षों ने बताया कि वे लोग बुरी तरह बर्बाद हो गए हैं। किसानों की मानें तो वे लोग इसके बाद उधार लिए पैसे का कर्ज भी नहीं उतार पाएंगे। राइस मिलर्स की बात सुनें तो बारिश से उन्हें करोड़ों फटका लगा है। मौसम विभाग की भविष्यवाणी पर विश्वास किया जाए तो अगले कई दिन तक रुक -रुककर बारिश होगी, जो किसानों और राइस मिलर्स को और झटका दे सकती है।

शुक्रवार सुबह सात बजकर 35 मिनट पर आसमान में दिन खिलने के बावजूद एक साथ चारों ओर अंधेरा छा गया। आसमान में घने काले बादल और तेज अंधड़ ने लोगों के रंग उड़ा दिए। जमकर बारिश हुई और यह करीब साढे़ दस बजे तक जारी रही। विशेषज्ञों के अनुसार शुक्रवार को 14.4 एमएम बारिश हुई।
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निरंतर तीन घंटे हुई इस बारिश ने किसानों के धान के खेत और जिलेभर की अनाज मंडियों में तबाही मचा दी। घनी बारिश होने के कारण किसानों के खेत में खड़ा धान जमीन पर लेट गया। उधर, अनाज मंडियों में खुले में पड़ा धान बारिश के दौरान भीग गया। तेज अंधड़ के कारण धान के चट्टों और ढेरों पर से तिरपाल उड़ गए। करनाल अनाज मंडी में तीन से चार लाख धान के कट्टे बुरी तरह भीग गए। किसान और राइस मिलर्स दोनों को नुकसान हुआ है। अभी भी कई हजार किसानों के खेत में बासमती, पीआर और पूसा 1121 समेत कई वैरायटी धान काटा जाना बाकी है।

कैसे पूरा होगा करोड़ों का घाटा
शुक्रवार को सुबह हुई बारिश ने किसानों को बुरी तरह रुला दिया है। उन लोगों को कुदरत ने बड़ी मार दी है। किसान बर्बाद हो गया है और खर्चा पूरा होना भी मुश्किल है। सरकार मनमाना भाव देती है। उधर, कुदरत की मार पड़ जाती है तो किसान के पास रोने के अलावा कुछ नहीं बचता। जिलेभर के किसानों को करोड़ों का नुकसान हुआ है।

इतना ही नहीं, मंडी में जिन किसानों का धान नहीं बिका, उनके लिए भी करोड़ों को घाटा झेलना मजबूरी हो गया है। सरकार से आग्रह है कि किसानों को मुआवजा दिया जाए।  
सेवा सिंह आर्य, राज्य अध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन, करनाल

राइल मिलर्स को भी फटका
करनाल क्षेत्र में साठ से अधिक राइस मिल हैं। राइस मिलर्स ही धान खरीदकर माल उठाकर अपने गोदाम में ले जाते हैं। मंडियों में धान बुरी तरह भीग गया है। तूफान में मंडी और राइस मिलों में लगे धान के चट्टों पर पड़ी तिरपालें उड़ गईं। इस कारण बारिश में मंडी में खुले में जमीन पर पड़ा धान और धान के लगे चट्टे बुरी तरह भीग गए।

मंडी में करीब तीन से चार लाख कट्टे धान के भरे पडे़ हैं। प्रत्येक राइस मिल में दस से बीस हजार क्विंटल धान है। उन लोगों के पास भी बडे़ शेड और गोदाम की व्यवस्था नहीं है। उन लोगों का माल भी बारिश में भीग गया। कुदरत ने किसान और राइस मिलर्स पर बड़ी चोट की है। धान भीगने के कारण धान से प्रति क्विंटल के पीछे 67 किलो चावल के अपेक्षा अब 58 से 60 किलो चावल ही बनेगा।

ऐसा होने से प्रत्येक राइस मिलर्स को आठ से दस लाख रुपये का नुकसान झेलना पडे़गा। धान की गुणवत्ता कमजोर पड़ जाएगी। धान डिस्कलर हो जाएगा। मशीन में छंटाई से भी काम नहीं चलेगा। उन लोगों का सरकार से आग्रह है कि राइस मिलर्स संचालकों को इस घाटे की भरपाई की दिशा में राहत दी जाए।
विजय टक्कर, अध्यक्ष, राइस मिलर्स एसोसिएशन, करनाल

दोनों वर्गों पर बड़ी मार
शुक्रवार की बारिश ने सही में तबाही कर दी है। किसान और राइस मिलर्स पर बड़ी मार पड़ी है। यह तबाही हरियाणा के कई जिलों में हुई है। दूसरे जिलों के किसानों और राइस मिलर्स ने भी उन्हें बताया है कि वह लोग बुरी तरह लुट गए।

बारिश में भीगने के कारण पूरा धान बदरंग हो गया है। चावल भी कमजोर क्वालिटी का बनेगा। ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह राइस मिलर्स और किसान को राहत दे।  
जयपाल जैन, मुख्य संरक्षक, हरियाणा राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन

बेमौसमी बारिश ने किसानों के अरमानों पर फेरा पानी
जुंडला में शुक्रवार को सुबह आंधी के साथ हुई बरसात ने किसानों के अरमानाें पर पानी फेर दिया। बरसात की वजह से धान की फसल के साथ-साथ गन्ने की फसल भी जमीन पर लेट गई। गत दिनाें से चल रही धान की कटाई का कार्य भी प्रभावित हो गया। इस स्थिति को लेकर किसान चिंतित मुद्रा में है।

किसानाें का कहना है कि पीआर धान की पकी फसल के साथ-साथ 1121 किस्म की धान व बासमती धान प्रभावित हो गई है। फसल के जमीन पर बिछ जाने के कारण किसानों को उसकी कटाई कराने में दिक्कत खड़ी हो गई है। जिसके चलते धान के दालों पर भी विपरीत असर पड़ेगा। जिससे पैदावार में कमी आने की संभावना बढ़ गई है।

गांव घोघड़ीपर के गन्ना उत्पादक किसान परमजीत मान ने बताया कि गत माह ने आई आंधी और बरसात से गन्ने की फसल गिर गई थी और अतिरिक्त मजदूरी देकर गन्ने की बंधाई करवाई गई थी। अब फिर से वही स्थिति आ खड़ी हुई है। किसानाें को दोबारा से 1500 रुपये प्रति क्विंटल गन्ने को बंधवाने के लिए अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा। फसल के लागत खर्च में बढ़ोतरी हो रही है। धान की फसल पर कहर बन कर बरसी बरसात ने किसानाें को परेशान कर दिया है। किसानाें का कहना है कि वह पहले ही कई समस्याआें से जूझ रहे है।  

इंद्री में मंडी और खेत दोनों बेहाल
इंद्री। कस्बे में शुक्रवार सुबह हुई बारिश के कारण मंडियों में पड़ा धान पूरी तरह भीग गया है। इतना ही नहीं बारिश और तेज हवा के कारण खेतों में धान का बिछौना बन गया। इस बेमौसमी बारिश ने किसानाें और राइस मिलर्स को कर्ज तले दबा दिया है। कुदरत की मार ने अब इनके पास माथा पकड़ने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं छोड़ा है।

वहीं इस बारिश से हुए जलभराव के कारण सड़कों की मरम्मत तथा अन्य कार्यों में बाधा हुई है। इंद्री क्षेत्र के गांव गढ़ी बीरबल, हंसुमाजरा, चौगांवा, मुखाला, मुखाली, चंद्राव, कलरी, कलरा, खुखनी सहित पूरे क्षेत्र में शुक्रवार सुबह एकाएक काले बादल उमड़ आए और तेज हवाओं के साथ बारिश होने लगी।

बारिश को देखते ही किसानों की धड़कनें बढ़ने लगी। बारिश थमी तो खेतों की ओर जाकर देखा तो धान की फसल को धरती पर पडे़ देखकर किसान के अरमानों पर पानी फिर गया। किसान विक्रम सिंह, नरेंद्र, रजनीश, कर्मबीर, राजेश, जोगिंद्र, रोहताश ने बताया कि इस बारिश से धान की पछेती तथा बासमती धान पूरी तरह नष्ट हो चुकी है।

उसकी उत्पादकता कम हो जाएगी, क्योंकि बरसात के पानी से नीचे गिरी फसल एक तो अंकुरित हो जाएगी और दूसरा लपेट में आई जीरी के दानों से चावल खत्म होे जाएगा। किसानों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। किसानों की गन्ना व दूसरी फसलें भी गिर गई। वहीं, मंडियों में पड़ा लाखों मीट्रिक टन धान गीला हो गया।

राइस मिल और डीलर एसोसिएशन के प्रधान संजीव गोयल ने बताया कि जो धान खरीदा गया था, वह पूरी तरह से भीग गया है। धान कट्टों में भरा हुआ था उसमें से पानी अभी तक टपक रहा है। यह धान सुखाने के बाद भी काला पड़ जाएगा, जिसकी खरीद होनी मुश्किल होगी। इस बरसात के कारण किसानों सहित राइस मिलर्स को भारी नुकसान हुआ है।  

फिर बन रहे बारिश के आसार
मौसम विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार पिछले दो दिनों से वाष्पदाब कम होने के कारण बारिश के आसार बन रहे है। वीरवार को भी मौसम विभाग ने 24 घंटे के भीतर बारिश होने की प्रबल संभावना जताई थी। शुक्रवार सुबह ही बारिश ने तबाही करना प्रारंभ कर दिया। तीन दिन बाद तक 14 अक्तूबर तक रुक-रुककर कहीं-कहीं बारिश होने की संभावना है।

अगले 24 घंटे में भी बारिश की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। मौसम विशेषज्ञों की भविष्यवाणी सच साबित हुई तो निश्चित तौर पर बारिश किसानों और राइस मिलर्स के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकती है। बारिश के कारण करीब साढे़ छह डिग्री तापमान टूटने के साथ 26.0 रह गया।

न्यूनतम तापमान भी 24.8 डिग्री से टूटकर 20.0 डिग्री रह गया। पिछले दो दिन में कुल 18.0 एमएम बारिश होना रिकॉर्ड किया गया। वाष्पदाब सुबह के समय 20.7 और शाम के समय 17.7 एमएम दर्ज किया गया, जो कल वीरवार से भी कम है। हवा की रफ्तार 9.7 किलोमीटर दर्ज की गई।

तरावड़ी में भी बारिश ने बरपाया कहर
तरावड़ी में शुक्रवार सुबह हुई बरसात ने जहां लोगाें को गर्मी से राहत दिलाई, वहीं, किसानों के चेहरों पर पसीना ला दिया। सुबह करीब नौ बजे क्षेत्र में आधा घंटे तक जमकर बरसात हुई और इस दौरान मंडी में बिक्री के लिए पड़ा हजारों क्विंटल धान बरसात में भीगता रहा।

इस दौरान बेचारे बेबस किसान धान की बर्बादी को अपनी आंखों से देखने को मजबूर थे। मंडी में पड़ी फसल भीगने के कारण अगले दो या तीन दिन तक बिक भी नहीं पाएगी, जिसके चलते किसानों को अब दिन रात पहरा भी देना पड़ेगा। किसान ईशपाल सिंह का कहना है कि बरसात खेत में खड़ी फसल के लिए भी काफी नुकसानदायक रही।
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