करनाल जिले में पिछले दो दिनों से हो रही बारिश लोगों के लिए कहीं राहत तो कहीं आफत साबित हुई है। बारिश की वजह से जहां किसानों को चेहरे खिल उठे हैं तथा लोगों को गर्मी से भी राहत मिली है, वहीं शहर के निचले क्षेत्र में जमा पानी की निकासी न होने से लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं। शहर में कई जगह पर पेड़ों की टहनियां बिजली लाइनों पर गिर गई। इससे आधे शहर में घंटो तक बिजली भी गुल रही। ग्रामीण क्षेत्र के भी दर्जनों फीडर घंटो से तक बंद रहे। इसके अलावा जिले के कई स्कूलों में पानी की निकासी न होने से विद्यार्थियों की छुट्टी करनी पड़ी। ऐसे में दो दिनों से हो रही बारिश लोगों के लिए राहत से ज्यादा आफत की साबित हुई है।
वीरवार को सुबह करीब पांच बजे से शुरू हुआ बारिश का सिलसिला शुक्रवार को दोपहर 12 बजे तक चला। हालांकि बारिश रुक रुककर होने से लोगों को ज्यादा परेशानी नहीं हुई, लेकिन शुक्रवार को आधी रात के बाद शुरू हुआ बारिश का सिलसिला दोपहर 12 बजे तक चला। इस दौरान जिले में करीब 27.8 एमएम बारिश की दर्ज की गई। बारिश व हवा के चलते शहर अधिकतम तापमान भी 27.0 डिग्री पर पहुंच गया है। इससे लोगों को काफी हद तक गर्मी से राहत मिली है।
वहीं दूसरी ओर धान की रोपाई के बाद आसमान पर नजरे गड़ाए बैठे किसानों को बड़ी राहत मिली है, लेकिन सुबह के समय बारिश होने की वजह से बच्चों को समय पर स्कूल पहुंचने में परेशानी हुई। ज्यादातर सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या आधे से भी कम रही। दोपहर बाद मौसम साफ रहने पर लोगों को बड़ी राहत मिली। मौसम विभाग की माने तो अगले 24 घंटो में आसमान में बादल छाए रहने व कहीं कहीं पर बारिश होने का अनुमान है।
शहर की इन कॉलोनियों में भरा पानी
पानी की निकासी उचित व्यवस्था न होने वजह से शहर के निचले हिस्सों में पानी जमा हो गया। इससे उन कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को आने जाने में परेशानी हुई। शहर के बांसो गेट, जुंडला गेट, पुरानी सब्जीमंडी, रामनगर, प्रेमनगर, शांति नगर, बसंत विहार, कर्ण विहार, विकास नगर, शुगर मिल के आसपास की कॉलोनियों व सेक्टरों की सड़कों व चौक चौराहों पर पानी जमा होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसके अलावा सदर बाजार, मेन बाजार, कमेटी चौक, गुड़मंडी व कलंदरी गेट के आस पास के क्षेत्र में भी जलभराव होने से लोगों को परेशानी हुई
बांसो गेट प्राइमरी स्कूल में जलभराव होने से छात्रों की छुट्टी
बारिश के चलते बांसो गेट राजकीय माध्यमिक स्कूल में पानी जमा हो गया। इससे अध्यापकों को मजबूरन विद्यार्थियों को स्कूल से छुट्टी करनी पड़ी। इससे पहले भी कई बार बारिश के चलते स्कूल की छुट्टी हो चुकी है। कई बार शिकायत करने के बाद भी शिक्षा विभाग व नगर निगम की ओर से स्कूल से पानी की निकासी कोई व्यवस्था नहीं हुई है। इससे विद्यार्थियों व अध्यापकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पिछले वर्ष की तुलना में इस बार जुलाई में कम हुई बारिश
मौसम विभाग ने इस बार पिछले वर्ष की तुलना में अच्छी बारिश होने की संभावनाएं जताई थी, लेकिन इस बार पिछले वर्ष की तुलना में बेहद कम बारिश हुई है। पिछले साल जुलाई माह में 244.8 एमएम बारिश दर्ज की गई थी, लेकिन इस बार अब तक 138 एमएम बारिश दर्ज की गई है। जबकि पूरे साल में 296 एमएम बारिश दर्ज हुई है। लेकिन जिले में मानसून में औसतन 800 एमएम से अधिक बारिश होनी चाहिए। मौजूदा हालात को देखते हुए इस बार औसतन से भी कम बारिश होने की आशंका है।
प्रशासन के दावों की खुली पोल
शहर में बरसाती सीजन के दौरान पानी की निकासी के समुचित प्रबंध करने दावे करने वाले प्रशासन के दावों की भी पोल खुल गई है। शहर में जगह-जगह जलभराव होने से जहां लोगों को आने जाने में परेशानी हो रही है, वहीं करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़कें भी पानी जमा होने व वाहनों की आवाजाही के वजह से टूट रही हैं, लेकिन प्रशासन का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है।
यमुना का जलस्तर बढने से सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न
उधर, पहाड़ों में हुई भारी बारिश के चलते यमुना में बाढ़ आ गई है। इससे यमुना में लगी किसानों के हजारों एक गन्ना व धान की फसल तबाह हो गई है। छह माह की मेहनत मिट्टी में मिलने की वजह से किसानों के चेहरे भी उतर आए हैं। हालांकि अब मौसम साफ होने व जलस्तर में गिरावट आने पर किसानों ने कुछ राहत की सांस ली है।