करनाल। बेमौसम बारिश ने किसानों की मेहनत और बढ़ा दी है। खेतों से बड़ी उम्मीद के साथ मंडियों में लाई गई गेहूं की फसल अब नमी के चलते परेशानी का कारण बन गई है। मंडियों में जगह-जगह गेहूं के ढेर लगे हैं लेकिन बढ़ी हुई नमी के कारण सरकारी मानकों पर खरी नहीं उतरने से खरीद नहीं हो पा रही। दो दिन में तेज धूप के बाद भी गेहूं में 17 प्रतिशत तक नमी निकल रही है।
फसल सूखने का इंतजार करने वाले किसान मजबूरी में अनाज मंडियों में खाट लेकर पहुंचने लगे हैं। दिन में मजदूरों से फसल सुखाने का काम कराते हैं और रात को मौसम के डर से जागते रहते हैं।
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सरकार की ओर से गेहूं खरीद के लिए अधिकतम 12 प्रतिशत नमी का मानक तय है। मंडियों में पहुंच रही गेहूं की फसल में नमी का स्तर 16 से 17 प्रतिशत तक दर्ज किया जा रहा है। खरीद एजेंसियां नियमों के तहत गेहूं लेने से बच रही हैं, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
जिले की 24 अनाज मंडियों और खरीद केंद्रों पर अब तक कुल 1,08,732 मीट्रिक टन गेहूं की आवक हो चुकी है लेकिन इसके मुकाबले केवल 27,242 मीट्रिक टन की ही खरीद हो पाई है। इससे अव्यवस्था फैल रही है। जगह की कमी के कारण किसानों को अपनी फसल रखने के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। हालांकि प्रशासन का दावा है कि उठान (लिफ्टिंग) की प्रक्रिया लगातार जारी है लेकिन खरीद धीमी होने के कारण मंडियों में गेहूं का दबाव कम नहीं हो पा रहा। आढ़तियों और किसानों का कहना है कि अगर जल्द ही मौसम साफ नहीं हुआ और नमी कम नहीं हुई तो हालात और भी बिगड़ सकते हैं।