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हाउस फुल हुआ रैन बसेरा, सड़कों पर होता है सवेरा

Thu, 12 Jan 2017 12:12 AM IST
विनीत पांडेय/ जगदीप मराठा/अमर उजाला, करनाल
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people sleeping on road - फोटो : Amar Ujala
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1.6 डिग्री टेंपरेचर में लोग ठिठुर रहे हैं। रात होते ही पहाड़ों से आती बर्फीली हवा और शीतलहर से बचने के लिए सीएम सिटी के लोग अपने घरों में दुबक जाते हैं, लेकिन हमारे बीच कई ऐसे बेघर और बेसहारा लोग भी जिनको सहारा देने वाला कोई नहीं हैं। ऐसे लोगों को सहारा देने के लिए बना शहर का एकमात्र रैनबसेरा भी अब फुल हो चुका है। जिस कारण सैकड़ों लोग इस जमा देने वाली ठंड में अपनी जान दांव पर लगाने पर मजबूर हैं।

दो दिन पहले ही सीएम सिटी में कुरुक्षेत्र से आए अजमेर सिंह को रुकने के लिए रात में कोई जगह नहीं मिली, जिस कारण वे रोड धर्मशाला के बरामदे में ही ठंड से ठिठुरते रहे और उनकी मौत हो गई। बेघरों की इस लाचारी और नगर निगम द्वारा बनाए गए रैनबसेरा की स्थित जानने के लिए अमर उजाला की टीम ने रात 10 बजे शहर का जायजा लिया। इस दौरान शहर के निर्मल कुटिया के पास स्थित फ्लाईओवर, बस स्टॉप, रेलवे स्टेशन, लघु सचिवालय, सेक्टर-6 पुल के नीचे, शिवकालोनी पुल के नीचे के पास सैकड़ों बेघर लोग सड़कों पर खुले में सोते नजर आए। इनमें से कई लोग ऐसे थे, जिनके पास ओढ़ने के लिए कंबल तक नहीं था। वे ठंडी हवाओं के थपेड़े में ठिठुर रहे थे।
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निर्मल कुटिया चौक, रात 10 बजे
अमर उजाला की टीम रात 10 बजे निर्मल कुटिया चौक पहुंची। वहां पर जीटी रोड फ्लाईओवर के नीचे और निर्मल कुटिया के सामने दर्जनों लोग सो रहे थे और कई बैठे ठिठुर रहे थे। बिहार के छपरा जिले से यहां मजदूरी करने आए अटारी प्रसाद ने बताया कि ठंड के कारण वे दो दिन से सो नहीं पा रहे हैं। रैन बसेरा काफी दूर है और वहां पर जगह भी नहीं मिलती है। पानीपत के अमरजीत भी तीन माह से फ्लाईओवर के नीचे ही रातें गुजार रहे हैं। उनका कहना है कि ठंड अधिक होने के कारण पूरी रात करवट बदलते ही बीत जाती है। रैन बसेरा में ले जाने के लिए कुछ दिन पहले दो लोग आए थे, लेकिन वे उन्हीं लोगों को ले जा रहे थे, जिनके पास पहचान पत्र था। मेरे पास कोई पहचान पत्र नहीं है, इसलिए नहीं जा पाया।

लघु सचिवालय, रात 10.15 बजे
दिनभर प्रशासनिक अधिकारियों का आशियाना बना रहने वाला लघु सचिवालय रात होते ही बेघर लोगों को सहारा देने लगती हैं। लघु सचिवालय के आसपास लगे टीन शेड में दर्जनों बेघर अपनी रातें गुजारते हैं। हालांकि यहां मौजूद चौकीदार बेघरों को भवन के अंदर नहीं जाने देते। अहमदाबाद से मजदूरी करने आएं गौतम ने बताया कि वे करीब एक माह से यहां लगे टीन शेड के नीचे ही अपनी रातें गुजार रहे हैं। कई बार यहां तैनात चौकीदार हमें भगाते भी हैं, लेकिन मजबूरी में फिर यहीं आना पड़ता है। गौतम ने बताया ठंड के कारण यहां रहने वाले दो बेघरों की तबीयत खराब हो चुकी है। वहीं यूपी के जिला अकबरपुर के रहने वाले रामकिशन ने बताया कि रातभर ठंड के कारण शरीर में दर्द होता रहता है। ओढ़ने के लिए कंबल भी ठीक नहीं है।

रेलवे स्टेशन, रात 10:30 बजे
दिनभर चहल-पहल से भरा रहने वाले रेलवे स्टेशन रात होते ही खामोशी छा जाती है। रेलवे के अधिकारी और कर्मचारी भी अपने केबिन में दुबके पड़े थे। वहीं स्टेशन के बाहर दिवारों की ओंट में भी दर्जनों बेघर लोग ठंड से ठिठुर रहे थे। स्टेशन पर मौजूद राजेश ने बताया कि बेघरों को रात गुजराने के लिए यहां कोई जगह नहीं है। इसलिए मजबूरन यहां सोना पड़ रहा है। वहीं बिहार के ही मनोहर ने कहा कि हम लोगों को रात भर डर लगा रहता है कि ठंड से कोई बीमार न हो जाए, इसलिए रातभर एक दूसरे का हालचाल लेते रहते हैं। सरकार को यहां पर एक रैन बसेरा जरूर बनाना चाहिए।

रैन बसेरा,11:30 बजे
माल रोड स्थित शहर का एकमात्र रैन बसेरे पर जब टीम पहुंची तो वहां की स्थित अपनी कहानी खुद बयां कर रही थी। मात्र दो छोटे कमरों में बना यह रैन बसेरा अपनी क्षमता से अधिक बेसहारों को सहारा दे रहा था। दोनों कमरों में दस से बारह लोग लेटे थे। रिपोर्टर ने अपनी पहचान छुपाते हुए वहां मौजूद कर्मचारी से रुकने के लिए जगह मांगी तो उसने कमरे की हालत को दिखाते हुए कहा कि अगर यहां पर रुक सकते हैं तो रुक सकते हैं। कर्मचारी के अनुसार कर्मचारियों ने बताया कि जब से ठंड बढ़ी है तब से यहां आने वाले लोगों की संख्या में भारी इजाफा हो गया है। अब 20 से 30 लोग रोज आ रहे हैं।
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जगह फाइनल है, पुराने की क्षमता भी बढ़ाई जाएगी
हमें भी इस समस्या के बारे में पता है, इसलिए नया रैन बसेरा शुरू करने के लिए जगह की तलाश कर रहे हैं। बस स्टैंड के पास एक जगह को फाइनल किया गया है, जल्द ही यहां रैन बसेरा खोला जाएगा, साथ ही पुराने रैन बसेरे अधिक लोग रुक सके, इसलिए इसकी क्षमता को बढ़ाया जाएगा।
- धीरज कुमार, ईओ, नगर निगम, करनाल
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