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Karnal News: किसान, पहलवान, संविधान के फेर में घेर गए राहुल

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किसान, पहलवान, संविधान के फेर में घेर गए राहुल
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- हरियाणा को केंद्र बनाकर राष्ट्रीय मुद्दों से की भाजपा की घेराबंदी
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- बेरोजगारी, युवाओं के विदेश पलायन को बड़ा हथियार बनाने की फिराक में कांग्रेस
मोहित धुपड़
असंध (करनाल)। हरियाणा के रण में कांग्रेस के बड़े स्टार प्रचारकों की एंट्री हो चुकी है। वीरवार को राहुल गांधी ने प्रदेश में करनाल और हिसार दो जगह चुनावी रैलियों को संबोधित किया। राहुल के तेवर तल्ख दिखे और वे भाजपा को किसान, पहलवान, संविधान समेत अन्य मुद्दों के फेर में घेर गए।
उन्होंने हरियाणा काे केंद्र बनाकर विभिन्न मुद्दों के बूते भाजपा की मजबूती से घेराबंदी का प्रयास किया। इस दाैरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तो निशाने पर लिया ही, साथ ही उन्होंने हरियाणा के युवाओं में विदेश की ओर रुख करने की बढ़ती प्रवृति को भी एक बड़े सियासी हथियार के रूप में इस्तेमाल किया।
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पांच दिन पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी करनाल के असंध में रैली करके गए हैं। उन्होंने न केवल कांग्रेस, बल्कि इनेलो और बसपा के गठबंधन को आड़े हाथों लिया था। योगी ने लोगों को समझाने का प्रयास किया था कि तीनों ही दल परिवारवाद को बढ़ावा देते हुए भ्रष्टाचार के पर्यायी बन चुके हैं। सीएम योगी ने कांग्रेस को बाबरी ढांचे सरीखे जर्जर पार्टी बताते हुए कहा था कि बसपा का पेट हाथी की तरह बड़ा है और कभी भरने वाला नहीं है। इसी तरह इनेलो भी भ्रष्टाचार में लिप्त रही है और कांग्रेस का हाथ हालात बिगाड़ने वाला रहा है। इसलिए मतदाता अपना वोट खराब न करें और प्रदेश में भाजपा को तीसरी बार माैका जरूर दें।
इसी के जवाब में वीरवार को राहुल गांधी भी असंध विधानसभा क्षेत्र में ही पहुंचे और भाजपा पर हमलावर दिखे। उन्होंने भी मतदाताओं को समझाने का प्रयास किया कि हरियाणा में किसान और खिलाड़ी, दोनों की ही घोर उपेक्षा हुई है। किसान आज तक मांगें पूरी न होने की वजह से सड़कों पर बैठा है और खिलाड़ियों की हालत भी यहां किसी से छिपी नहीं है। एथलीट खत्म हो रहे हैं। इसी तरह उन्होंने जवानों के इस प्रदेश में अग्निवीर के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया।
दरअसल, राहुल जानते हैं कि हरियाणा में किसान, खिलाड़ी और जवान यह बड़ा वोट बैंक हैं। जिस पर सभी सियासी दलों की नजरें गढ़ी हैं। राहुल ने हरियाणा में बढ़ते नशे की नब्ज को भी छेड़ा। युवाओं के विदेश जाने की बढ़ती प्रवृति पर भी सियासत करने से राहुल चूके नहीं। एक सप्ताह पहले भी राहुल करनाल के घोघड़ीपुर गांव में आए थे। वहां वे अमित नाम के युवक से मिले थे। अमित डाेन्की के जरिये अमेरिका गया था और वहां राहुल ने उससे मुलाकात की थी। राहुल का कहना था कि उन्होंने अमित से वादा किया था कि वे उसके गांव जाकर उसके परिजनों से मिलेंगे। इसके अलावा भी राहुल ने अमेरिका में डोन्की के रास्ते गए कई युवाओं से बात की थी और उनकी पीड़ा को जानने का प्रयास किया था।
हरियाणा में राहुल इसी बात को सियासी ढंग से भुनाने का प्रयास कर रहे हैं। वे कहते हैं कि लाखों रुपये खर्च कर युवा हरियाणा में कारोबार नहीं करना चाहते, बल्कि रोजगार के लिए बाहर जाना चाहते हैं, क्योंकि युवाओं को लगता है कि हरियाणा में उनका रोजगार चलने वाला नहीं है। चूंकि सूबे में डोन्की के जरिये विदेश जाने के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, इसलिए राहुल ने इस मुद्दे को सरकार के खिलाफ बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल किया।
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संविधान खत्म करना, जातिगत जनगणना, कुछ बड़े कारोबारियों को ही लाभ पहुंचाना और बीसी, एससी व एसटी समाज के लोगों की अनदेखी करना, इन मुद्दों के जरिये राहुल लगातार भाजपा को घेरते नजर आए हैं और अब हरियाणा के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने इन्हें सियासी फिजा में उछाल दिया है। राहुल ने पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा व प्रदेशाध्यक्ष उदयभान की जोड़ी के काम की भी तारीफ करते हुए इस बात की ओर इशारा कर दिया है कि यदि कांग्रेस प्रदेश में जीत हासिल करती हैं, जो इसमें इस जोड़ी का विशेष योगदान माना जाएगा। हालांकि वे मंच पर सांसद कुमारी सैलजा से भी चर्चा करते दिखे। बहरहाल, अब देखना यह है कि चुनाव के आखिरी दाैर में राहुल के छेड़े मुद्दे कांग्रेस को कितनी बढ़त दिलाते हैं।
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