- भवन की खिड़कियां और दरवाजे टूटे, - ऊबड़-खाबड़ खेल मैदान पर उगी लंबी घास
सुखदेव चौहान
करनाल। पुंडरक गांव का खेल मैदान बदहाल है। ऐसे में पदकवीर कैसे तैयार होंगे। वर्ष 2023 में मनरेगा के तहत 6 लाख 88 हजार 174 रुपये से तैयार इस खेल परिसर में बने भवन के खिड़की, दरवाजे व रोशनदान टूटे हैं। मैदान ऊबड़-खाबड़ है, जिस पर लंबी घास उगी है।
यहां न तो खिलाड़ियों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था है, न शौचालय चालू हालात में है। देखरेख के अभाव में यह मैदान दिन-प्रतिदिन बदहाल होता जा रहा है। यहां पर भवन के चारों ओर का पेंट खराब हो चुका है। शौचालय गंदगी से लबालब है, बिजली के उपकरण टूटे हैं।
हालांकि खेल मैदान की देखरेख के लिए कौशल रोजगार के तहत एक सुरक्षा कर्मी की ड्यूटी लगाई गई है मगर खिलाड़ियों को अभ्यास करवाने के लिए विभाग की ओर से कोच की नियुक्ति नहीं की गई है। खिलाड़ियों का कहना है कि लाखों रुपये खर्च करके भी विभाग की ओर से इस भवन को लावारिस छोड़ा गया है। जब इस खेल परिसर का निर्माण करवाया गया था तो दावा किया था कि यहां पर रोजाना अभ्यास से खिलाड़ियों का खेल स्तर बेहतर होगा।
खिलाड़ी राजेश, रोहन, मंजीत व राकेश ने बताया कि खेल परिसर देखरेख के अभाव में दिन-प्रतिदिन खराब होता जा रहा है। हालांकि इसका कायाकल्प भी करवाया गया था, लेकिन फिर भी बिना संभाल के इसकी स्थिति खराब हो गई है।
कोच की हो नियुक्ति
गांव के खिलाड़ियों का कहना है कि खेल परिसर के भवन में पंचायत की ओर से जिम का सामान तो रखवाया गया है, लेकिन अभ्यास करवाने के लिए कोई प्रशिक्षक नहीं है। खिलाड़ी मनमर्जी वजन उठाकर अपने शरीर को खराब कर रहे हैं। यहां पर नियमित कोच की व्यवस्था की जानी चाहिए।
पुंडरक के खेल मैदान के नवीनीकरण के लिए एस्टीमेट तैयार हो चुका है। जल्द इसका कायाकल्प करवाया जाएगा। खेल परिसरों में कोच के लिए विभाग को पत्र लिखा गया है। इस बार ग्राम पंचायतों की ओर से भी खेल नर्सरियों के आवेदन आए हैं, उनमें पुंडरक का नाम है, जल्द यहां कोच की व्यवस्था की जाएगी। खिलाड़ियों की सुविधा के लिए पीने के पानी व शौचालय की व्यवस्था भी जल्द दुरुस्त हो जाएगी।
सुधा भसीन, जिला खेल अधिकारी, करनाल