माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। आईडीटीआर (इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च ) के मनमाने नियम और अधिकारियों की कार्यप्रणाली जनता के लिए परेशानी बन गई है। शुक्रवार को भी ऐसा ही मामला देखने को मिला, जब सुबह डीएल के लिए कुछ आवेदकों की फाइल लेने से कर्मचारियों ने मना कर दिया। इस पर घंटों से इंतजार में खड़े आवेदकों ने इसका विरोध भी जताया।
वही लोगों को कर्मचारियों ने तर्क दिया कि संस्थान का नियम है कि टेस्ट के निर्धारित दिन में केवल 120 लोगों की फाइल ही जमा होगी, जबकि आवेदकों ने एसडीएम कार्यालय से टेस्ट के लिए अपाइंटमेंट ली थी। आवेदकों का आरोप है कि उनके लिए गेट बंद कर दिया गया औप सिफारिश वालों को अंदर जाने दिया गया। आवेदक सुरक्षाकर्मियों से अपनी मजबूरी का हवाला देकर मिन्नतें करते भी नजर आए लेकिन उनकी एक नहीं सुनी।
वहीं स्थिति यह है कि संस्थान के अधिकारी खुद तो अंदर एसी कमरों में बैठे हैं। जबकि टेस्ट देने आए अभ्यर्थियों के अलावा किसी को भी अंदर जाने की अनुमति नहीं दी। इसके लिए प्रवेश द्वार पर नोटिस भी लगाया है। ऐसे में कुछ युवक-युवतियों के अभिभावक धूप में बाहर जमीन पर बैठ इंतजार करते दिखे। वहीं संस्थान के अंदर रिस्पेशन एरिया का प्रतीक्षा क्षेत्र खाली था। ऐसे में लोगों ने संस्थान पर मनमानी करते हुए उन्हें प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है।
आईडीटीआर में सप्ताह में तीन दिन ही टेस्ट होते हैं। सोमवार और शुक्रवार को करनाल खंड और बुधवार को घरौंडा व करनाल खंड के डीएल के लिए टेस्ट लिए जाते हैं। संस्थान के प्रिंसिपल के अनुसार, प्रत्येक दिन 120 आवेदकों का ही टेस्ट लिया जाता है। युवा अमन, एडवोकेट संदीप राणा और राजकुमार का कहना है कि इससे पहले सेक्टर-12 के मैदान में टेस्ट लिए जाते थे, उस समय रोजाना 200 से ज्यादा युवा शामिल होते थे। आधुनिक सुविधाओं वाले संस्थान में टेस्ट कम क्यों हो रहे हैं। यदि फाइल लेने की संख्या नहीं बढ़ा सकते तो सप्ताह में तीन से ज्यादा दिन टेस्ट लिए जाएं।
करोड़ों खर्च, फिर भी जोखिम में जान
प्रदेश सरकार की ओर से होंडा के साथ अनुबंध करके नए बस स्टैंड के साथ करीब 9.25 एकड़ जमीन पर आईडीटीआर बनवाया गया है। करीब चार साल में 30 करोड़ से ज्यादा की लागत पर इस निर्माण हुआ। इसके बावजूद संस्थान के अधिकारियों की ओर से आमजन के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है। ऐसे में अभ्यर्थियों के साथ आने वाले परिजन गेट के बाहर जमीन पर बैठ प्रतीक्षा करते हैं। इसी गेट के साथ से ही तेज रफ्तार से बस अड्डे में बसें प्रवेश करती हैं। ऐसे में हर वक्त हादसे का भी खतरा बना रहता है। लोगों का कहना है कि अंदर कमरे और हॉल खाली होने पर भी अधिकारी जनता को परेशान कर रहे हैं।
टेस्ट के लिए 120 फाइल ली जाती हैं। इतने टेस्ट ही पूरे दिन में हो पाते हैं। इसलिए अतिरिक्त आवेदकों को अगले निर्धारित दिन पर आने के लिए कहते हैं। यदि किसी के लर्निंग लाइसेंस की अंतिम तिथि नजदीक होती है तो उनकी फाइल ले लेते हैं। टेस्ट के दौरान कोई व्यवधान उत्पन्न न हो, इसलिए अभ्यर्थियों के परिजनों के प्रवेश की मनाही है। - राकेश वत्स, प्रिंसिपल, आईडीटीआर
लोगों की सुविधा के लिए रिस्पेशन के पास ही प्रतीक्षा केंद्र है। वहां अभ्यर्थियों के परिजनों को क्यों नहीं बैठाया जाता, इस बारे में संस्थान के अधिकारियों से पूछा जाएगा। फाइल किन लोगों की नहीं ली, यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं आया। - विजय देसवाल, डीटीओ एवं चेयरमैन आईडीटीआर
आवेदकों को वापस भेजने का मामला मेरे संज्ञान में आया है, जिसकी गंभीरता से जांच करवा कर उचित कार्रवाई की जाएगी। दूर-दराज से आवेदक आते हैं, उनको परेशानी न हो, उसके लिए भी व्यवस्था बनाई जाएगी। - अनुभव मेहता, एसडीएम करनाल।