करनाल। नगर निगम पूरे शहर में सभी 1.66 लाख संपत्तिधारकों के घरों पर दस्तक देगा और प्रॉपर्टी बिल बांटेगा। साथ ही करीब 60 हजार खाली प्लाॅटों का नए सिरे से सर्वे करके उनका डाटा एकत्र करेगा। जिससे उनकी सही प्रॉपर्टी आईडी तैयार की जा सके। इससे लोगों को काफी राहत मिलेगी। लोगों की संपत्ति का बिल उनके घर पहुंच जाएगा। यदि किसी को कोई दिक्कत हो तो वह भी मौके पर ही बता पाएगा। इस कार्य को एजेंसी के माध्यम से कराया जाएगा। जिसके लिए टेंडर ऑनलाइन कर दिया गया है।
नगर के करीब डेढ़ लाख से अधिक संपत्तिधारक पिछले तीन सालों से संपत्ति आईडी के फेर में फंसे हैं। तीन साल पहले एक संस्था यॉशी ने नगरों की प्रॉपर्टी आईडी का ड्रोन सर्वे किया लेकिन इस सर्वे में करीब 80 प्रतिशत आईडी में गड़बड़ियां सामने आ गईं। शहर के लोग पूरे एक साल तक नगर निगम कार्यालय के चक्कर काटने को विवश रहे। जब स्थिति नहीं संभली तो संस्था ने घर-घर जाकर सर्वे करने का निर्णय लिया। जब ये सर्वे पूरा हुआ तो भी करीब चालीस प्रतिशत से अधिक प्रॉपर्टी आईडी में त्रुटियां रहीं। परिणाम ये रहा कि उस साल नई प्रॉपर्टी आईडी लागू नहीं हो सकीं।
इसके बाद एजेंसी के कर्मचारी नगर निगम कार्यालय में बैठे और त्रुटियों को दुरुस्त करना शुरू किया गया, लेकिन इसके बावजूद नाम बदलना, पता बदलना, बकाया अपडेट, साइट अपडेट, फोन नंबर अपडेट, अवैध से वैध का स्टेट बदलने जैसी कई त्रुटियां सामने आती रहीं। कंपनी की ओर से असिस्मेंट नोटिस भी बांटे गए तब भी लोगों ने सुधार के लिए निगम की दौड़ लगाई। अभी स्थिति जस की तस है। नगर निगम की प्रॉपर्टी आईडी 1.42 लाख से बढ़कर 1.66 लाख तक पहुंच गई लेकिन लोगों की दौड़ बंद नहीं हुई।
शहरी स्थानीय निकाय मंत्री ने दिए थे आदेश
पिछले दिनों शहरी स्थानीय निकाय मंत्री डॉ. कमल गुप्ता नगर निगम पहुंचे थे, यहां जिला स्तरीय बैठक लेकर अधिकारियों को 15 अप्रैल तक प्रॉपर्टी आईडी की त्रुटियों को दूर करने का आदेश दिया था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। अभी भी लोग प्रॉपर्टी आईडी की त्रुटियां दूर कराने के लिए निगम के कक्ष संख्या 120 पर लाइन लगाने को विवश हैं।
नगर निगम के संयुक्त कर अधिकारी (जेटीओ) अंकुर पाराशर ने बताया कि सभी प्रॉपर्टी आईडी का नए सिरे से तो सर्वे नहीं होगा लेकिन पिछले दिनों सर्वे में ऐसे करीब 60 हजार संपत्तिधारक रह गए थे, जिनके प्लॉट खाली पड़े थे। जो लोग मौके पर मौजूद नहीं मिले थे। ऐसे लोगों का फिर से सर्वे कराया जाएगा। जिनका मौके पर जाकर मोबाइल फोन नंबर, नाम, डाटा आदि संकलित किया जाएगा। साथ ही शहर के सभी 1.66 लाख संपत्तिधारकों के घरों पर एजेंसी के कर्मचारी जाएंगे और उनका प्रॉपर्टी बिल पहुंचाएंगे। ताकि किसी को बिल न मिलने की शिकायत न रहे। इसके लिए टेंडर ऑनलाइन कर दिया गया है। तकनीकी बिड होने के बाद एजेंसी को कार्य आवंटित हो जाएगा। इसके बाद कार्य शुरू कर दिया जाएगा।