शहर के बाजारों में दुकानों के बाहर किया गया अतिक्रमण लोगों के लिए फजीहत बन गया है। चार लाख की आबादी वाले शहर में अतिक्रमण के कारण बाजारों का आकार धीरे-धीरे सिकुड़ रहा है।
लोगोें के लिए अतिक्रमण कई बार बड़ी मुसीबत खड़ी कर देता है लेकिन दुकानों के बाहर अतिक्रमण करने वाले दुकानदार टस से मस नहीं होते।
यही कारण है कि शहर में जाम लगना आम बात हो गई है। इसका समाधान पार्किंग व्यवस्था से हो सकता है। इसके लिए प्रभावी कार्ययोजना प्रशासन के पास नहीं है। लोगों की बात पर यकीन किया जाए तो अतिक्रमण को बढ़ावा देने के लिए स्वयं दुकानदार और संबंधित विभाग के अधिकारी ही जिम्मेदार हैं।
दुकानदार अपना सामान सीमा परिधि के बाहर तक लगा देते हैं। मुख्य बाजारों में दुकानदारों ने अपनी दुकानों के बाहर किराएदार तक बैठा रखे हैं। ऐसे किराएदारों से दुकानदारों लाखों रुपये सालाना कमा रहे हैं। लोगों को परेशानी दे रहे हैं। अधिकारी बिना कार्रवाई किए वापस लौट जाते हैं।
ये है बाजारों का हाल
शहर के कर्ण गेट में पिछले कई साल पहले तत्कालीन उपायुक्त आरएस दून ने अतिक्रमण हटवाया था। कर्ण गेट से लेकर सर्राफा बाजार तक दुकानों के बाहर बने अवैध चबूतरे (थडे़) तुड़वा दिए गए थे। कुछ दुकानदारों ने विरोध भी किया था लेकिन दुकानदारों को बाजार खुला होने की राहत मिल रही है।
इसके बावजूद पूरे कर्ण गेट क्षेत्र में हर दुकान के बाहर एक थड़ी वाला बैठा है, जो दुकानदार को रोजाना कई हजार रुपये किराया दे रहा है। दुकानदार के बिना किसी मेहनत के पौबारह हो रहे है। ऐसा ही हाल दुपट्टा मार्केट का है। वहां दुकानों के बाहर कुछ कपडे़ वाले बैठे हैं तो कई दुकानों के बाहर मेहंदी लगाने वाले चौकी लगाकर बैठे हैं। नेहरू पैलेस के बाहर भी ऐसा है। सब्जी मंडी के बाहर फलों की रेहड़ियां सड़क पर लगी रहती है।
लोगों में रोष
शहर के लोगों में शामिल व्यापार मंडल के अध्यक्ष जेआर कालड़ा, सामाजिक संस्था निफा के अध्यक्ष प्रीतपाल पन्नू, अखिल भारतीय प्रतिमा रक्षा सम्मान समिति के अध्यक्ष बलजीत साल्याण ने बताया कि बाजारों में अतिक्रमण करना गलत है। इससे लोगों को असुविधा होती है। ऐसा नहीं करना चाहिए।
दुकानों के बाहर अवैध ढंग से किराया वसूलने वाले दुकानदार भी इसके जिम्मेदार हैं। यह पूरा शहर जानता है कि ऐसा हो रहा है। लोगों को जनहित में भी काम करना चाहिए। इनका कहना है कि ट्रैफिक वन-वे करने से समाधान नहीं होगा, बल्कि पार्किंग की व्यवस्था होना जरूरी है।
पार्किंग के लिए बना रहे योजना
यह बात सही है कि बाजाराें आने वाले हजारों लोगों के लिए पार्किंग की बड़ी समस्या है। इसके लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। प्राथमिकता के आधार पर इस दिशा में काम होगा ताकि बाजारों में सड़क पर लगने वाला जाम और भीड़ कम हो और लोगों को आवाजाही में सुगमता रहे। निगम इस दिशा में काम कर रहा है।
रेनू गप्ता, मेयर