घाटे में चलने वाली प्रदेश की सभी सहकारी शुगर मिलों को अपना घाटा पूरा करने लिए दो साल का समय मिला है। इस दौरान जो मिल घाटा पूरा नहीं करेंगी उनका निजीकरण कर दिया जाएगा। घाटे को पूरा करने के लिए करनाल और सोनीपत शुगर मिल में चीनी के साथ शक्कर और गुड़ भी बनाया जाएगा। इसकी मार्केटिंग पतंजलि करेगा। यह जानकारी शुगर फेड के चेयरमैन चंद्र प्रकाश कथूरिया ने विकास सदन में पत्रकारवार्ता में दी।
उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा प्रदेश की तीन शुगर मिलों के नवीनीकरण के लिए 700 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है। इनमें करनाल मिल के नवीनीकरण पर करीब 200 करोड़ रुपये की लागत आएगी। मिल में रिफाइंड शुगर प्लांट, को-जनरेशन सहित गुड़-शक्कर बनाने का प्लांट भी लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि नवीनीकरण के बाद मिल की गन्ना पिराई क्षमता 3500 क्विंटल प्रतिदिन रहेगी। कथूरिया ने बताया कि जनवरी में मिल के नवीनीकरण का शिलान्यास मुख्यमंत्री करेंगे। उसके बाद तेजी से मिल का नवीनीकरण होगा। एक सवाल के जवाब में कथूरिया ने कहा कि कि घाटे में चल रही शुगर मिलों को उबारने के लिए प्रदेश स्तर पर एक कमेटी का गठन किया जाएगा। जो मिलों में घाटे के कारणों की पहचान करेगी। रिर्पोट पर पूरा अमल करने के बाद भी जो मिल दो वर्ष में घाटे से नहीं उभर सकी उसका निजीकरण किया जाएगा।
आवश्यकतानुसार रखे जाएंगे कर्मचारी
मिल में कर्मचारियों की कमी के बारे में उन्होंने कहा कि मिल के निजीकरण के बाद जितने कर्मचारियों की मिल में आवश्यकता होगी, उतने कर्मचारी रखे जाएंगे। इसके अलावा उन्होंने बताया कि गन्ना क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए केन मैनेजर व अन्य मिल कर्मचारियों की कमेटी नियमित रूप से किसानों को गन्ने की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए जानकारी देगी। उन्होंने बताया कि कम पानी में गन्ने की बढ़िया पैदावार के लिए ब्राजील के एक डॉक्टर शाम बाई से बात चल रही है। जोकि मूलरूप से गुजरात के रहने वाले हैं। इससे किसानों को कम लागत में अधिक फायदा मिलेगा। इस मौके पर करनाल सहकारी चीनी मिल की एमडी वर्षा खंगनवाल ने शुगर फेडरेशन के नवनियुक्त चेयरमैन चंद्र प्रकाश कथूरिया का स्वागत किया तथा मिल की गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
पतंजलि बेचेगा सहकारी शुगर मिलों का गुड़ व शक्कर
करनाल व सोनीपत की सहकारी चीनी मिल प्रदेश की पहली शुगर मिले होगी, जहां पर गुड़ व शक्कर भी तैयार होगी। बिना मार्केटिंग के सहकारी चीनी मिल काफी घाटे में चल रहे हैं। इसको देखते हुए सरकार ने गुड़ व शक्कर की मार्केटिंग के लिए पतंजलि का सहयोग लिया है। पतंजलि मिलों में बनने वाले गुड़ व शक्कर को बाजार में बेचेगा। इसके लिए कई और संस्थाओं का भी सहयोग लिया जा सकता है।
बिजली उत्पादन से प्रतिवर्ष मिल को होगा 12 करोड़ का मुनाफा
करनाल मिल के नवीनीकरण के बाद मिल में 15 मेगावॉट का को-जनरेशन प्लांट लगाया जाएगा। मिल को 24 घंटे चलाने के लिए 8 मेगावॉट बिजली की खपत होती है। 15 मेगावाट प्लांट से मिल को बिजली सप्लाई करने के बाद बची हुई बिजली को बिजली निगम को बेचा जाएगा। इससे प्रतिवर्ष मिल को लगभग 12 करोड़ का फायदा होगा। ऐसे में मिल को घाटे से उबारा जा सकता है। इसी के साथ रिफाइंड चीनी का प्लांट लगाकर चीनी की क्वालिटी में सुधार होगा। इससे चीनी मार्केट में 2 से तीन रुपये मंहगे रेट में बिक सकेगी।
लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों की होगी जांच
कथूरिया ने कहा कि करनाल सहकारी चीनी मिल के जिन कर्मचारी व अधिकारियों की वजह से मिल बंद होने के कगार पर पहुंच गया है। उन्हें चार्जशीट व निलंबित किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की जांच की जाएगी। जो भी अधिकारी इसमें दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी जो अधिकारी व कर्मचारी ड्यूटी में लापरवाही बरतेंगे उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।