तहसीलदार साहब हमने अपने अधिकारों के लिए तीन साल प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ कोर्ट में जंग लड़ी है। कोर्ट ने हमारे पक्ष में फैसला सुनाया है तो अब आप मामले की जांच करवाने की बात कह रहे हैं। हम पूछते हैं कि आखिर हमारे देश में सिवाय जांच के हो क्या रहा है? तीन साल हमने कोर्ट में केस लड़ा है। हमारे बच्चों के तीन साल तो इन्हीं चक्करों में बीत गए हैं। अब मामले की फिर जांच होगी। यह सिलसिला हमेशा चलते रहेगा। लेकिन हालात में कोई सुधार होने वाला नहीं है। लेकिन अब हमें जांच नहीं फैसला चाहिए? न्याय चाहिए। ये बातें अभिभावक एकता संघ के सदस्यों नेे जिला उपायुक्त कार्यालय में धरना प्रदर्शन के दौरान तहसीलदार व अन्य अधिकारियों को कही।
प्राइवेट स्कूलों द्वारा हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबों को लागू करने व नियमों के विरुद्ध फीस की वसूली करने के विरोध में अभिभावक एकता संघ के सदस्यों ने गुरुवार को जिला उपायुक्त व डीईईओ को ज्ञापन सौंपा। अभिभावकों ने सबसे पहले जिला उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा। लेकिन वहां पर कोई संतोषजनक आश्वासन नहीं मिलने पर अभिभावक भड़क गए। उन्होंने जिला उपायुक्त कार्यालय के बाहर ही धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। सूचना पाकर अभिभावकों से मिलने पहुंचे तहसीलदार अश्वनी गंभीर को भी अभिभावकाें ने खरी खरी सुनाई तथा हाईकोर्ट के निर्देशों का हवाला देकर मामले पर तुरंत एक्शन लेेकर स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।
अभिभावकों ने कहा कि निजी स्कूल हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद एनसीईआरटी की किताबें लागू करने की बजाए प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें लागू कर रहे हैं। इसके अलावा, स्कूलों द्वारा फार्म-6 में जो फीस दर्शाई गई है, उसमें और स्कूल की फीस बुक में अंकित फीस के बीच दोगुना अंतर है। वे इस मामले मेें पहले भी कई बार शिक्षा विभाग के अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं, अभी तक समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ है। तहसीलदार ने अभिभावकों को नियमों की अवहेलना करने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।
इस बार ठगी सहन नहीं, कार्यालयों के बाहर देंगे धरना
अभिभावक एकता संघ के जिला प्रधान दिनेश नरुला, नवीन अग्रवाल, हरीश गोयल, सचिन अग्रवाल, पंकज, रमनदीप, लीला, जंगशेर राणा, एडवोकेट नितिन गुप्ता, किरन, प्रेरणा, रेनू व पूजा ने कहा कि उन्होंने अपने अधिकारों के लिए तीन साल कोर्ट में जंग लड़ी हैं। अब कोर्ट ने जब उनके पक्ष में फैसला सुनाया है तो अब प्रशासनिक अधिकारी नियमों को स्कूलों में लागू करवाने में ढुलमुल रवैया अपनाए हुए हैं। कोर्ट के आदेशों के बाद भी निजी स्कू लों ने हजारों रुपये कीमत की प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें लागू कर दी हैं। लेकिन प्रशासन द्वारा अभी तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है।
नियमों की अवहेलना करने वाले स्कूलों को बख्शा नहीं जाएगा
जिला उपायुक्त को ज्ञापन सौंपने के बाद अभिभावक संघ के सदस्य जिला मौलिक शिक्षाधिकारी सरोज बाला गुर से मिले। अभिभावकों ने कई स्कूलों में बच्चों का परीक्षा परिणाम रोकने की शिकायत दी तथा स्कूलों द्वारा लागू की गई प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबों की सूची भी दिखाई। इस पर डीईईओ सरोज बाला गुर ने सभी स्कूलों को फीस की एवज में रिजल्ट न रोकने के निर्देश दिए तथा शिक्षा निदेशालय से एनसीईआरटी की ऑथर लिस्ट व नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित पुस्तकों को ही स्कूलों में लागू करवाने की बात कही।
उन्होंने यह भी कहा कि जिन स्कूलों की बैलेंसशीट में रुपये बकाया है, वे नए सत्र में फीस में बढ़ोतरी नहीं करेंगे। इसके लिए सभी स्कूलों को पहले से निर्देश दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि स्कूलों को स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर एजुकेशन व अन्य गतिविधियों के नाम पर कोई भी चार्ज न लेने की बात कही है। उन्होंने कहा कि यदि कोई स्कूल नियमों की अवहेलना करता पाया गया तो उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।