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एनसीईआरटी दरकिनार, प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबों को तवज्जो

Thu, 31 Mar 2016 12:30 AM IST
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
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निजी स्कूल - फोटो : अमर उजाला
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जिले के ज्यादातर प्राइवेट स्कूलों में बुधवार को ही नॉन बोर्ड की कक्षाओं के परीक्षा परिणाम घोषित कर दिए हैं। इसी के साथ ही स्कूलों में मिशन एडमिशन भी शुरू हो गया है। निजी स्कूलों ने इस बार शिक्षा निदेशालय व हाईकोर्ट के निर्देशों को दरकिनार कर  एनसीईआरटी की किताबों को अपनी विषय सूची में शामिल नहीं किया है। कमीशन के चक्कर में इस बार भी स्कूलों प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबों को तरजीह दी है। स्कूलों ने परीक्षाओं के परिणाम घोषित करने के बाद रिपोर्ट कार्ड लेने पहुंच रहे अभिभावकों के हाथों में हर बार की तहर नए सिलेबस की सूची थमा दी है।
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इसके साथ ही किताबों व वर्दियों की खरीद के लिए संबंधित दुकानों के विजिटिंग कार्ड भी दिए जा रहे हैं। यही नहीं उन दुकानों के अलावा किसी अन्य दुकान पर किताबें व वर्दियां मिलना भी संभव नहीं है। स्कूलों की मनमानी के चलते हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना होती नज़र आ रही है। इस मामले में शिक्षा विभाग द्वारा अभी तक सिवाय कागजी फरमानों के जारी करने अलावा कुछ नहीं किया गया है। ऐसे में एक बार फिर से अभिभावकों की जेब पर डाका पड़ना तय है। सेक्टर-6 स्थित टैगोर बाल निकेतन पब्लिक स्कूल में अभिभावकों को बुक डिपो व ड्रेस वालों के विजिटिंग कार्ड बांटे गए। हालांकि, कई अभिभावकों ने इसका विरोध भी किया, लेकिन प्रबंधन ने उनकी कोई सुनवाई नहीं की।

निजी स्कूलों ने एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम पर खड़े किए सवाल
प्राइवेट स्कूलों ने कमीशन के चक्कर में एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि एनसीईआरटी पाठ्यक्रम कम गुणवत्ता का होता है। इसी वजह से राजकीय स्कूलों का परीक्षा परिणाम फिसड्डी होता है। शहर के प्रतिष्ठित स्कूल टैगोर बाल निकेतन के चेयरमैन आरएम रहेजा का कहना है कि शिक्षा निदेशालय प्राइवेट स्कूलों को जबरदस्ती एनसीईआरटी की किताबें थोपने का प्रयास कर रहा है। यदि प्राइवेट स्कूल भी एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाएंगे तो फिर उन स्कूलों व राजकीय स्कूलों में क्या फ र्क रह जाएगा? हम शिक्षा गुणवत्ता को बढ़ावा देने के प्रयास में सीबीएसई बोर्ड की किताबों को लागू करेंगे। स्कूल प्रबंधन पहले ही इन किताबों का चयन कर प्रिंट ऑर्डर दे चुके हैं। जिनमें अब किसी प्रकार का बदलाव संभव नहीं है।
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प्राइवेट स्कूलों में हर साल बदल जाता है सिलेबस
एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम पर सवाल खड़ा करने वाले स्कूलों का सिलेबस हर साल बदल जाता है। लेकिन एनसीईआरटी द्वारा बड़ी रिसर्चों के साथ बनाया गया पाठ्यक्रम बरसों से एक जैसा ही है। लेकिन अब सवाल यह उठता है कि निजी स्कूलों में लागू पाठ्यक्रम का स्टैंडर्ड एक ही साल इतना गिर जाता है कि स्कूलों को उसे बदलना पड़ता है। लेकिन ऐसा नहीं है, पाठ्यक्रम का स्टैंडर्ड तो ठीक होता है, लेकिन स्कूलों को अपनी कमीशन में कटौती का डर होता है। यदि पुराना सिलेबस लागू किया जाए तो छात्रों को वे सभी किताबें शहर की सभी दुकानों पर मिल जाएंगी। कुछ छात्र पुरानी किताबों के साथ भी काम चलाने का प्रयास करेंगे। ऐसे में निजी स्कूलों की अवैध कमाई को धक्का लग सकता है। निजी स्कूल इसके पक्ष में नहीं है। अभिभावक एकता मंच का कहना है कि स्कूलों द्वारा जो पाठ्यक्रम में बदलाव होता है, वह केवल नाममात्र सिक्वेंस का बदलाव होता है। जिसमें किताबों में लिखे अध्याय की क्रम संख्या को बदल दिया जाता है, ताकि छात्र पिछले वर्ष की किताबों का इस्तेमाल न कर सकें।

निजी स्कूलों की मनमानी, लोगों की जुबानी 
हाईकोर्ट के आदेशों के बाद भी निजी स्कूलों ने इस बार एनसीईआरटी की किताबें लागू नहीं की हैं। मेरी दो बेटियां स्कूल में पढ़ती में हैं। स्कूल द्वारा इस बार सातवीं कक्षा में केवल 30 प्रतिशत किताबें एनसीईआरटी की लगवाई हैं, जबकि पांचवीं कक्षा में 90 प्रतिशत किताबें प्राइवेट पब्लिशर्स की हैं। ऐसे में उन्हें पांचवीं का बैग तैयार करने में तीन हजार रुपये का भुगतान करना पड़ा है।
डीपी मदान, अभिभावक।
बुधवार को बेटी का परीक्षा परिणाम घोषित हुआ था। रिपोर्ट कार्ड लेने स्कूल पहुंचा तो स्कूल प्रबंधन ने अगली कक्षा के एडमिशन फीस व सिलेबस की सूची दी है। इस बार पिछले वर्ष की तुलना में फीस भी बढ़ाई गई है तथा सिलेबस में सम्मलित सभी पुस्तकें  प्राइवेट पब्लिशर्स की हैं। जो पूरे शहर में केवल ही दुकान पर मिलती हैं।
गुलशन मेहता, अभिभावक।

शिकायत मिलने पर करेंगे कार्रवाई
शिक्षा निदेशालय द्वारा सभी सरकारी और निजी स्कूलों को पाठ्यक्रम में एनसीईआरटी की किताबों को लागू करने के निर्देश हैं। इसकी सूचना सभी स्कू लों को दे दी गई है। यदि इसके बाद भी किसी स्कूल द्वारा मनमानी करने की शिकायत मिली तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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- सरोज बाला गुर, जिला मौलिक शिक्षाधिकारी करनाल।
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