कुरुक्षेत्र। लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 19 अप्रैल को विश्व लिवर दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य आदतों में सुधार करने और गंभीर बीमारियों से बचाना है। अच्छी आदतें ही अच्छे स्वास्थ्य का निर्माण करती हैं। रोजमर्रा की जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करके लिवर से जुड़ी बीमारियों से बचाव किया जा सकता है। संतुलित आहार, शारीरिक रूप से सक्रिय रहना, शराब सेवन से बचना, नियमित जांच से लिवर से जुड़ी बीमारियां कम होती हैं। मेडिकल रिसर्च के अनुसार लिवर को स्वस्थ रखने के लिए दवाओं से ज्यादा असर डाइट का होता है। यह कहना है कुरुक्षेत्र विश्विद्यालय के हेल्थ सेंटर एसएमओ डॉ. आशीष अनेजा का।
बतौर सीनियर फिजिशियन, डायबिटीज स्पेशलिस्ट एवं आरोग्य भारती सदस्य डॉ अनेजा ने बताया कि विश्व लिवर दिवस के मौके पर बताया कि भारत जैसे विकासशील देशों में गलत खानपान, एक्सरसाइज नहीं करने और डेस्क जॉब के कारण लिवर से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। रिसर्च बताती है कि भारत में हर पांच में से एक व्यक्ति फैटी लिवर से प्रभावित है। साल 2030 तक फैटी लिवर के मामलों में ज्यादा बढ़ोतरी हो सकती है। देश में लिवर सिरोयसिस के मरीजों का आंकड़ा भी बढ़ा रहा है। स्वास्थ्य लिवर मानव यकृत शरीर का मुख्य विषहरण अंग है। स्वस्थ यकृत बनाए रखने में सहायक उपाय अपनाने से बीमारियों से बचा जा सकता है।
डॉ. अनेजा ने कहा कि प्रोटीन और फाइबर से भरपूर स्वस्थ और संतुलित आहार का सेवन करें, तनाव कम करने के लिए नियमित व्यायाम और ध्यान, शराब और धूम्रपान से परहेज करें, स्वयं से दवा लेने से बचें, समय पर टीकाकरण, स्वस्थ वजन बनाए रखें और दूषित सुइयों को साझा करने और असुरक्षित यौन संबंध बनाने से बचें। इसका प्रभाव केवल लिवर तक ही सीमित नहीं है। लगभग 70 प्रतिशत मरीज मोटापे से ग्रस्त हैं, 75 प्रतिशत मरीजों को टाइप-2 मधुमेह है और 20-80% मरीजों में हाइपरलिपिडेमिया है। इससे फैटी लिवर रोग हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम का एक प्रमुख कारण बन जाता है। इसलिए लीवर संबंधी रोगों से बचने के लिए खान-पान और जीवनशैली में बदलाव करना चाहिए।