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बगावत : दो पूर्व विधायकों ने छोड़ी कांग्रेस, आजाद लड़ेंगे चुनाव

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टिकट वितरण के बाद जिला कांग्रेस में बगावत के सुर तेज हो गए हैं। गलत टिकट बांटने का आरोप लगाकर दो पूर्व विधायकों ने कांग्रेस को अलविदा कहकर आजाद प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। इनमें असंध से पूर्व सीपीएस जिले राम शर्मा और इंद्री से पूर्व विधायक राकेश कांबोज शामिल हैं। वहीं, कांग्रेस के एससी सेल के प्रदेशाध्यक्ष और नीलोखेड़ी से टिकट चाहने वाले ज्ञान सहोता ने बंता राम वाल्मीकि को टिकट देने पर रोष जाहिर किया है। साथ ही फेसबुक पर लिखा है कि अब कांग्रेस से मन भर गया है। साथ ही समर्थकों के साथ बैठक करके फैसला लिया है कि वे कांग्रेसी प्रत्याशी का विरोध करेंगे और आजाद प्रत्याशी के तौर पर चुनाव नहीं लड़ेंगे। ऐसे में कांग्रेस की टिकट बंटने के बाद से राजनीतिक माहौल पूरी तरह से गरमा गया है। शुक्रवार को नामांकन दाखिल करने का अंतिम दिन है, देखना यह है कौन किसको मना पाता है और कौन किसके खिलाफ नामांकन दाखिल करता है।
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बता दें कि वीरवार देर रात को कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की है। इनमें असंध से कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष शमशेर सिंह गोगी को टिकट मिली है, जबकि पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खास वीरेंद्र मराठा को टिकट नहीं मिली है। हालांकि, अभी तक उन्होंने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। कुछ दिन पहले ही कांग्रेस में पूर्व विधायक जिले राम शर्मा ने जरूर तल्ख तेवर अपनाएं हैं। उन्होंने आजाद प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। इसी प्रकार, इंद्री से सुनील पंवार की पत्नी डॉ. नवजोत कश्यप पंवार को टिकट मिली है, यहां पर टिकट के प्रबल दावेदारों में पूर्व मंत्री भीम सेन मेहता और पूर्व विधायक राकेश कांबोज के नाम चल रहे थे, लेकिन भीम सेन मेहता ने पहले ही चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया था, लेकिन टिकट नहीं मिलने पर राकेश कांबोज ने नाराजगी जताई है। समर्थकों के साथ बैठक करके कांबोज ने आजाद प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। इसी प्रकार, घरौंडा में अनिल राणा को प्रत्याशी बनाया है।
आजाद प्रत्याशी के तौर पर नहीं लड़ूंगा, लेकिन कांग्रेसी प्रत्याशी का करेंगे विरोध (फोटो-175)
नीलोखेड़ी। कांग्रेस हाईकमान की ओर से नीलोखेड़ी विस सीट से बंता राम वाल्मीकि को टिकट देने के विरोध में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का रोष उफान पर हैै। ज्ञान सहोता के समर्थकों ने पार्टी हाईकमान की कार्यशैली पर संगीन आरोप लगाकर कहा कि जो व्यक्ति एक दशक से भी ज्यादा समय से पार्टी को मजबूत करने के लिए संघर्ष कर रहा है, पार्र्टी हाईकमान ने उसे कुचलने का काम किया है। इस दौैरान कई बार ज्ञान सहोता सहित कार्यकर्ता र्कई बार भावुक हुए। ज्ञान सहोता ने कहा कि टिकट न मिलने से कांग्रेस के निष्ठावान कार्र्यकर्ताओं में भारी निराशा के साथ-साथ हाईकमान के फैसले को लेकर भी रोष हैै। इसलिए कार्यकर्ताओं ने निर्र्णय लिया है कि कांग्रेस प्रत्याशी का जमकर विरोध किया जाएगा। सभी निष्ठावान और मेहनती कार्र्यकर्ता पार्टी प्रचार छोड़कर अपने-अपने घरों में रहेंगे। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि ज्ञान सहोता आजाद प्रत्याशी के रूप में चुनाव नहीं लड़ेंगे। इस मौके पर रेखा रानी, अविनाश कौर, जगदीश रायपुर, सुखविन्द्र डाबरथला, ओमप्रकाश, दिनेश मुंजाल, मुनीष भार्गव, दीपक शर्मा व शेर सिंह आदि नेताओं ने भी अपना रोष जताया।
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इस बार भी सुमिता सिंह पीछे हटी, त्रिलोचन सिंह मैदान में आए
कांग्रेस की तरफ से पिछली बार भी मनोहर लाल के सामने पूर्व विधायक सुमिता सिंह ने चुनाव नहीं लड़ा था। उन्होंने करनाल बजाए असंध से चुनाव लड़ा था। इस बार भी सुमिता सिंह चुनावी मैदान में नहीं होंगी। इस बार कांग्रेस की तरफ से अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व चेयरमैन सरदार त्रिलोचन सिंह सीएम के सामने ताल ठोकेंगे। सिंह ने कहा कि वे करनाल की टूटी सड़कों और बेरोजगारी को मुद्दा बनाएंगे।
असंध में बन रहे नये समीकरण
असंध में भाजपा ने विधायक बख्शीश सिंह को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस ने शमशेर सिंह गोगी को प्रत्याशी बनाया है। इसी प्रकार पूर्व विधायक जिलेराम शर्मा ने कांग्रेस छोड़कर आजाद प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। वहीं, गुरुवार को जेजेपी ने वरिष्ठ नेता बृज शर्मा को असंध से अपना प्रत्याशी बनाया है। ऐसे में असंध में काफी रोमांचक मुकाबला होने के आसार हैं, क्योंकि बख्शीश सिंह व गोगी दोनों ही सिख समुदाय से आते हैं और जिले राम और बृज दोनों ही ब्राह्मण समाज से हैं। इसी प्रकार, भाजपा को छोड़कर संजय मैहला आजाद प्रत्याशी के रूप में मैदान में जुटेंगे।
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