करनाल में मनोहर लाल, शेष चार सीटों पर टिकट को लेकर जबरदस्त टक्कर
करनाल जिले की पांचों विधानसभा सीटों पर हैं भाजपा के विधायक, कांग्रेस व जेजेपी में हैं कई दावेदार
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। पिछले विधानसभा चुनाव में तमाम तरह का विरोध झेलने वाले मनोहर लाल के सामने इस बार न तो कोई भाजपा नेता और न ही विपक्षी ताल ठोक रहा है। हालात ये है कि चुनावी आचार संहिता लगने के बावजूद कांग्रेस, इनेलो और जेजेपी से भी एक भी नेता ने करनाल से चुनाव लड़ने का दावा नहीं जताया है, बल्कि नेता दूसरे विधानसभा में जाने को रास्ता तलाश रहे हैं। इसके विपरीत, असंध, इंद्री, घरौंडा और नीलोखेड़ी में भाजपा विधायकों के सामने कई भाजपा नेता ताल ठोक रहे हैं और टिकट के लिए दावा ठोक रहे हैं। भाजपा के अलावा, कांग्रेस व जेजेपी में इन विस क्षेत्रों में टिकट के चाहवान हैं, लेकिन ज्यादा जोर भाजपा नेता टिकट के लिए लगा रहे हैं।
बता दें कि कांग्रेस से सुमिता सिंह दो बार लगातार करनाल से विधायक रही। पिछले विधानसभा चुनाव में मनोहर लाल को भाजपा ने करनाल से भाजपा का उम्मीदवार बनाया। हालांकि, चुनाव में उनको भाजपा के ही नेताओं का जबरदस्त विरोध झेलना पड़ा था और उनके खिलाफ नारेबाजी से लेकर पोस्टर तक लगाए गए थे। लेकिन सीएम बनने के बाद इस बार करनाल विधानसभा के हालात बदले हुए हैं। विरोध करने वाले मनोहर लाल का नेतृत्व स्वीकार चुके हैं, पिछली बार मनोहर लाल मोदी के नाम पर जीते थे, लेकिन अब सीएम खुद मोर्चा संभाले हुए हैं। उनका विरोध करने वाले अब शांत हैं और संगठन के लिए काम कर रहे हैं। वहीं, सीएम के सामने दूसरे दल भी अपना नेता नहीं उतार पाए हैं। ऐसे में फिलहाल करनाल से बड़ी पार्टी से मनोहर लाल ही दावेदार हैं, सुमिता सिंह करनाल से चुनाव लड़ेंगी या नहीं इस बारे में कांग्रेस और उनके द्वारा अब तक ऐसा कोई संकेत नहीं दिया गया है। एक तरफ सीएम मनोहर लाल ताबड़तोड़ प्रचार कर रहे हैं, वहीं दूसरी विपक्षी दलों का प्रचार नहीं दिख रहा है।
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मनोहर लाल के खिलाफ लड़े, अब थाम लिया भाजपा का दामन
पूर्व मंत्री जयप्रकाश गुप्ता ने भाजपा के मनोहर लाल के खिलाफ आजाद उम्मीदवार के तौर पर ताल ठोकी थी, हालांकि वे बड़े अंतर से हार गए थे। अब हालात ये है कि जयप्रकाश गुप्ता कुछ माह पहले ही सीएम के नेतृत्व में भाजपा में शामिल हो चुके हैं और मनोहर लाल को अपना नेता मान चुके हैं। दूसरी ओर, इनेलो से चुनाव लड़ने वाले मनोज वधवा भी अब सीएम के खिलाफ चुनाव लड़ने से इंकार कर चुके हैं। वहीं, पिछली बार करनाल से कांग्रेस के उम्मीदवार रहे सुरेंद्र नरवाल भी शहर में प्रचार करते नहीं दिख रहे हैं, वे करनाल की बजाए असंध विधानसभा के गांवों में प्रचार कर रहे हैं।
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यहां है टिकट के लिए कड़े मुकाबले
भाजपा की टिकट के लिए चारों विधानसभा इंद्री, असंध, नीलोखेड़ी और घरौंड़ा में कड़े मुकाबले हैं। एक सीट पर 5 से 6 दावेदार हैं और कई ने तो खुद को भावी उम्मीदवार बताकर प्रचार तक शुरू कर रखा है। यहां दिलचस्प बात ये है कि भाजपा के वर्तमान विधायकों के पसीने विपक्षियों ने नहीं बल्कि अपनी ही पार्टी के नेताओं ने छुड़वा रखे हैं। कांग्रेस की बात करें तो असंध में कई दावेदार हैं, घरौंडा में भी रोजाना नए राजनीतिक समीकरण बन बदल रहे हैं। इंद्री में कांग्रेस की टिकट लगभग तय है, लेकिन अभी टिकट वितरण शुरू नहीं हुआ है।