माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। सेक्टर-12 में कोर्ट परिसर के पीछ की सड़क से गुजरते एक टैंकर से शुक्रवार की सुबह अमोनिया गैस का रिसाव हो गया। रिसाव की सूचना 112 पर कॉल करके दी गई। सूचना पर अफरा-तफरी मच गई। करीब एक घंटे तक आपातकालीन वाहनों के सायरन गूंजते रहे। इस दौरान दमकल, एंबुलेंस, एनडीआरएफ के बाद पुलिस की टीम पहुंची। राहत कार्य शुरू किया। खामी यह रही कि दमकलकर्मियों के पास एसईबीए मास्क और वॉटर कर्टन नहीं थे, जो इस समय पर सबसे ज्यादा जरूरी थे।
यह हादसा हकीकत में नहीं हुआ था। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग और एनडीआरएफ की ओर से एक मॉकड्रिल थी। ड्रिल के दौरान पुलिस विभाग ने प्रभावित इलाके को सील किया जबकि एनडीआरएफ और फायर ब्रिगेड विभाग हादसे में हताहत लोगों को बाहर निकाला और स्वास्थ्य विभाग ने उनको प्राथमिक उपचार देते हुए अस्पतालों में पहुंचाया। मॉक ड्रिल के बाद एनडीआरएफ के सहायक कमांडेंट अनिल रणवा ने बताया कि खामियों और गलतियों के बारे में बताया। ताकि हादसा होने पर ऐसे जरूरी इंतजामों की कमी न रहे। हालांकि उन्होंने संबंधित विभागों का प्रतिक्रिया समय को लगभग ठीक ही बताया।
एनडीआरएफ के सहायक कमांडेंट अनिल रणवा ने बताया कि मॉकड्रिल में एनडीआरएफ रोहतक की 30 जवानों की टीम शामिल रही जिसने घटनास्थल पर एनडीआरएफ स्टोर, कम्युनिकेशन पोस्ट, कमांड पोस्ट और मेडिकल पोस्ट स्थापित कीं। अधिकारियों ने आम जनता से अपील की कि ऐसे हादसों के समय घबराएं नहीं और प्रशासन द्वारा जारी हिदायतों की पालना करें।
इसलिए जरूरी हैं सुरक्षा इंतजाम
सहायक कमांडेंट अनिल रणवा ने कहा कि कमियां गिनवाते हुए कहा कि दमकल विभाग के पास एसईबीए मास्क और वॉटर कर्टन नहीं थे। ऐसे केमिकल हादसों में ये उपकरण अति महत्वपूर्ण हैं, जिनका बचाव दल के पास होना अति आवश्यक है। क्योंकि केमिकल हादसों में आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ, शारीरिक केमिकल रिएक्शन जैसी दिक्कतें सामने आती हैं। ऐसे हादसों में बचाव दल को बहुत ही सावधानीपूर्वक और पूर्ण उपकरणों के साथ ही आगे बढ़ना चाहिए।
विभाग खरीदेंगे जरूरी उपकरण
डीआरओ मनीष यादव ने एनडीआरएफ की असिस्टेंट कमांडर अनिल रणवा व एनडीआरएफ रोहतक की टीम का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह मॉक ड्रिल एनडीआरएफ के सहयोग से संभव हो पाई है। ऐसे हादसों के दौरान प्रयोग होने वाले उपकरण भी हमारा विभाग खरीदेगा।