माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। नेशनल हाईवे-44 की सर्विस लेन पर आप चल रहे हैं तो जरा सावधान रहिए। एलिवेटेड हाईवे और सर्विस लेन के बीच से निकलता नाला हादसे का कारण बन सकता है। जरा सा भी ध्यान हटा तो गाड़ी नाले में गिर सकती है। क्योंकि इस पर स्लैब ही नहीं हैं। हर 100 से 200 मीटर की दूरी में ऐसे पॉइंट हैं, जहां नाला खुला है या स्लैब टूटकर गिरी हुई है। कोहरे के मौसम में ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है।
पिछले एक साल का रिकाॅर्ड देखें तो कई बार इस नाले के कारण हादसे हो चुके हैं। गोवंश भी इनमें गिरता है। जिसे गोसेवा दल के लोग निकालने जाते हैं। इस हालात के बाद भी एनएचएआई की ओर से सबक नहीं लिया गया और नाले खुले हैं। हर माह होने वाली सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में उपायुक्त उत्तम सिंह भी इन नालों को ढकने का निर्देश देते हैं। इसके बावजूद जिम्मेदारों की ओर से काम नहीं किया गया। केवल उसी जगह की स्लैब को ढककर रिपोर्ट दे दी जाती है, जहां की स्थिति को एजेंडे में शामिल करते हुए उपायुक्त चर्चा करते हैं।
अमर उजाला की टीम ने शुक्रवार को हालात का जायजा लिया तो करनाल में बलड़ी बाईपास से लेकर बसताड़ा टोल प्लाजा तक कई जगह नाला खुला हुआ मिला। कहीं स्लैब थी ही नहीं तो कहीं टूटी हुई थी। इसके अलावा कई जगह सफाई के लिए नाला खोला गया था, जिसे दोबारा ढका ही नहीं गया।
उखड़ी स्लैब से निकले सरिये...
स्थिति यह है कि कई जगह स्लैब के टूटे होने के कारण सरिये भी बाहर निकले हुए हैं, जो वाहनों के पहिये भी पंक्चर करते हैं, इसके अलावा दोपहिया वाहनों के पहियों में उलझते हैं। यह उखड़े सरिये और टूटे स्लैब अब तक हो चुके हादसों के निशान है। लापरवाही इस कदर है कि एनएचएआई की पेट्रोलिंग टीम और अधिकारी भी हाईवे पर गश्त करते हैं, इसके बाद भी किसी ने इन्हें दुरुस्त कराना जरूरी नहीं समझा।
कोहरे में हादसे की आशंका अधिक
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ एडवोकेट संदीप राणा और तेजपाल का कहना है कि कोहरे में दृश्यता कम हो जाती है। वाहन चालक सफेद पट्टी के सहारे आगे बढ़ते हैं। इसी पट्टी के साथ ही नाला खुला हुआ है। कई जगह तो पट्टी भी नहीं है। ऐसे में जब चालक को आगे की स्थिति का पता नहीं चला और थोड़ा भी स्टेयरिंग घुमा दिया तो पहिया नाले में उतरते ही हादसा हो जाएगा। इन्हें दुरुस्त किया जाना चाहिए।
नालों को कवर किया जा रहा है। हमारी टीम काफी समय से इस काम पर लगी हुई। ज्यादातर नाले बंद कर दिए हैं। जो अभी भी खुले या स्लैब टूटी है, इन्हें भी शीघ्र दुरुस्त करा दिया जाएगा। - भानू प्रताप, सेक्शन इंजीनियर, एनएचएआई