संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। ठंड बढ़ते ही बच्चों में निमोनिया और सांस से जुड़ी दिक्कतों के मामले तेजी से बढ़ने लगे हैं। जिला नागरिक अस्पताल की बाल रोग ओपीडी में रोजाना 150 से अधिक बच्चे पहुंच रहे हैं, जिनमें करीब 70 से 75 निमोनिया और श्वसन संक्रमण के मामले हैं। दो महीने से सात साल तक के छोटे बच्चे इस मौसम में सबसे ज्यादा बीमार पड़ रहे हैं।
नागरिक अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मुनीष पृथी ने बताया कि सर्दी के मौसम में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। ऐसे में वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण तेजी से पकड़ बनाते हैं। तापमान में गिरावट और हवा में बढ़ी नमी के कारण फेफड़ों पर सीधा असर पड़ रहा है, जिससे निमोनिया के मामलों में इजाफा हो रहा है। पिछले सप्ताह के मुकाबले ओपीडी में निमोनिया से जूझ रहे बच्चों की संख्या दोगुनी हो गई है।
-सर्दी में अधिक सक्रिय हो जाते हैं वायरस
डॉ. पृथी ने बताया कि सर्दी में वायरस ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं और प्रदूषण के महीन कण फेफड़ों को कमजोर कर देते हैं। ऐसे में खांसी-सर्दी को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है, क्योंकि संक्रमण नीचे उतरकर फेफड़ों तक पहुंचने पर स्थिति गंभीर हो जाती है।
- लक्षण
तेज बुखार, लगातार खांसी, सांस फूलना, छाती का धंसना, नाक का फूलना और बच्चे का खाना कम करना निमोनिया के प्रमुख लक्षण हैं।
- बचाव के उपाय
डॉ. पृथी ने माता-पिता को सलाह देते हुए कहा कि इस मौसम में बच्चों को ठंडी हवा से बचाएं और हाथों की सफाई पर खास ध्यान दें। भीड़भाड़ वाली जगहों पर बच्चों को कम ले जाएं और घर में तापमान संतुलित रखें ताकि अचानक ठंड-गर्मी न लगे। खांसी-बुखार बढ़ने या बच्चा खाना छोड़ने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।