नूर महल चौक के नजदीक 24 मीटर रोड पर स्थित सेक्टर-33 में रह रहे 200 परिवार मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जीने के लिए मजबूर हैं। स्थानीय निवासियों ने बताया कि यहां पर कई वर्षों से 350 झुग्गी-झोपड़ियां बसी हुई हैं। इनमें रहने वाले लोग खाना बनाने के लिए लकड़ी जलाते हैं, जिससे प्रदूषण का स्तर बढ़ता है। खाली मैदानों में बड़ी-बड़ी घास उगी हुई हैं। इनमें अकसर सांप और अन्य जहरीले जीव निकल आते हैं।
कई बार शिकायत देने के बाद भी इस सेक्टर की स्थिति सुधारने के लिए कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। इससे प्रशासन की लापरवाही साफ नजर आती है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जिस हिसाब से करोड़ों रुपये के प्लॉट इस सेक्टर में हैं उस मुताबिक यहां सुविधाएं भी होनी चाहिए थीं। सेक्टर वासी यहां पर जमीन लेकर अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
सड़कों पर रहता है अंधेरा
विनोद गर्ग ने बताया कि इस सड़क पर रात के समय स्ट्रीट लाइटें जलती नहीं हैं। अंधेरा रहता है। ऐसे में यहां से गुजरने वाले लोगों को हर पल किसी अनहोनी का डर सताता रहता है। प्रशासन को जल्द से जल्द नूर महल चौक से लेकर 24 मीटर रोड के टी पॉइंट पर एक मास्ट लाइट लगवानी चाहिए।
सड़कों पर बेसहारा पशु
सेक्टर निवासी विकास का कहना है कि यहां सड़क पर खुलेआम घोड़े, कुत्ते और गोवंश घूमते रहते हैं। अचानक ये पशु सड़क के बीचोंबीच आ जाते हैं जिससे यहां कई बार सड़क हादसे हो चुके हैं। नगर निगम को बेसहारा पशुओं के लिए कोई योजना बनानी चाहिए जिससे लोगों को परेशानी न हो।
टैक्स लेते हैं, काम नहीं
सेक्टर-33 रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव शमशेर ने कहा कि इस सेक्टर में 200 परिवार रहते हैं जो सरकार को करोड़ों रुपये का टैक्स चुकाते हैं। इसके बाद भी यहां के निवासियों को मूलभूत सुविधाओं के लिए भी तरसना पड़ रहा है। शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होती है।
बनने चाहिए स्पीड ब्रेकर
स्थानीय निवासी बलवंत सिंह ने कहा कि इस सेक्टर में सड़क पर स्पीड ब्रेकर भी नहीं है। ऐसे में कोई भी असामाजिक तत्व अपराध करके यहां से तेजी से भाग सकता है। मनिंद्र का कहना है कि इस सेक्टर में रात के समय महिलाओं का बाहर निकलना सुरक्षित नहीं है। यहां स्ट्रीट लाइट न होने के कारण नशेड़ियों का अड्डा बना रहता है।