एक साल बाद भी आवर्धन नहर की क्षमता बढ़ाने और उस पर बाईपास बनाने की योजना केवल कागजों में दौड़ रही है। हालात ये है कि न तो ये दोनों प्रोजेक्ट शुरू हो पाए, बल्कि विभाग आवर्धन नहर की मरम्मत तक समय पर नहीं कर पाया और ये घटना हो गई। नहर का टूटना काफी गंभीर मामला है और इसके लिए जिम्मेदार कर्मचारियों समेत अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। अब तलाश उनकी होनी चाहिए, जिसके कारण आसपास के चार गांवों को परेशानी झेलनी पड़ी। सवाल ये भी है कि जिन किसानों की फसल और सामान खराब हुआ है, उसका मुआवजा कौन देगा? हालांकि, घरौंडा के विधायक हरविंद्र कल्याण का कहना है कि दोनों ही प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। संभावना है कि लॉकडाउन के बाद इनको गति मिलेगी।
4500 से 6000 क्यूसेक की जानी है नहर की क्षमता
एक साल पहले प्रदेश सरकार ने योजना तैयार की थी कि अगमनटेशन चैनल (आवर्धन नहर) की 1500 क्यूसेक क्षमता बढ़ाई जानी है। फिलहाल नहर की क्षमता 4500 क्यूसेक है और इसकी क्षमता 6 हजार करने की तैयारी है। हमीदा हैड से करनाल के मुनक हैड तक करीब करीब 67 किलोमीटर इस नहर पर 604 करोड़ रुपये खर्च आने का प्रस्ताव किया गया था। योजना ये थी कि नहर के दोनों किनारों को तोड़कर चौड़ा किया जाना है। इसमें से करीब 20 किलोमीटर का एरिया यमुनानगर के अधिकारी करेंगे, शेष करनाल प्रशासन करेगा। प्रोजेक्ट के अनुसार, जब आवर्धन नहर की क्षमता बढ़ाने का काम चलेगा तब तक दो साल पश्चिम यमुना नहर डब्ल्यूडेजी से पानी को मुनक हेड तक पहुंचाया जाएगा। गौरतलब है कि आवर्धन नहर से दक्षिण हरियाणा को पानी की सप्लाई दी जाती है।
मधुबन से नेवल तक बनाया जाना है बाईपास
मधबन से लेकर नेवल तक आवर्धन नहर की पटरी के साथ बाईपास बनाया जाना है। बाईपास बनने से शहर में ट्रैफिक का दबाव कम हो जाएगा। बाईपास पर लगभग 104 करोड़ रुपए खर्च होंगे। यह प्रोजेक्ट एक साल पहले तैयार किया गया था, लेकिन आज भी ये जमीन पर नहीं उतर पाया है। इस प्रोजेक्ट पर करीब 104 करोड़ रुपये खर्च किया जाना था। नहर की पटरी के साथ 15 किलोमीटर का बाईपास निकाला जाएगा। बाइपास का शहर के लोगों को भी फायदा होगा। शहर में ट्रैफिक का बोझ कम होगा। मेरठ और कुंजपुरा जाने वाला ट्रैफिक बाइपास से निकल जाएगा। इसके अलावा गन्ना लगाने वाले किसानों को शहर में नहीं आना पड़ेगा। किसान गन्ना लेकर सीधे शुगर मिल पहुंचेगा। घरौंडा और कुंजपुरा दोनों क्षेत्रों में गन्ना सबसे ज्यादा लगाया जाता है।