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पीर पर कब्जा लेने पहुंचा वक्फ बोर्ड, ग्रामीणों ने जताया विरोध

Thu, 16 Feb 2017 12:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल
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पीर पर कब्जा लेने पहुंचा वक्फ बोर्ड, ग्रामीणों ने जताया विरोध - फोटो : Amar Ujala
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जीटी रोड मधुबन स्थित प्रसिद्ध पक्के पूल धाम पर कब्जा लेने की भनक लगते ही ऊंचा समाना के सैकड़ों ग्रामीण मौके पर एकत्रित हो गए और उन्होंने वक्फ बोर्ड के अधिकारियों के खिलाफ ग्रामीणों ने जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों का कहना है कि उनके पूर्वजों ने पक्के पूल धाम में जमीन दी थी, लेकिन पिछली पंचायतों की लापरवाही के कारण आज वक्फ बोर्ड इस धाम की जमीन पर अपना हक जता रहा है। ग्रामीणों ने चेताया कि वे किसी भी हाल में पक्के पूल धाम पर कब्जा नहीं होने देंगे, लेकिन जिला प्रशासन द्वारा नियुक्त ड्यूटी मजिस्ट्रेट के मौके पर न पहुंचने के कारण कब्जे की कार्रवाई नहीं हो सकी।
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 बुधवार को हरियाणा वक्फ बोर्ड के अधिकारी सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद मधुबन स्थित पक्के पूल धाम पर कब्जा लेने के लिए पहुंचे। कब्जे के दौरान किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल मधुबन थाने में तैनात कर दिया गया। पक्के पूल धाम पर वक्फ बोर्ड द्वारा कब्जा लिए जाने की सूचना गांव ऊंचा समाना सहित अन्य क्षेत्र में आग की तरह फैल गई और पक्के पूल धाम पर सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण व श्रद्धालु एकत्रित हो गए और गुस्साए ग्रामीणों ने वक्फ बोर्ड के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

समाजसेवी राजिंद्र राणा, सुरेश कुमार आदि का कहना है कि वर्ष 1928 में पानीपत के एक मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति ने कोर्ट में केस डाला था कि यह जगह मुस्लिम समुदाय की है। यह मामला निचली अदालत से लेकर लाहौर हाई कोर्ट तक चला था। इसमें सन 1936 में माननीय लाहौर हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायत ऊंचा सामना के पक्ष में फैसला सुनाया था और यह बात स्पष्ट की थी कि इस गांव में मुस्लिम समुदाय की कोई भी जमीन नही है। उन्होंने कहा कि लाहौर हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार जब इस क्षेत्र में मुस्लिम समुदाय की जमीन ही नही है तो करीब 80 साल बाद वक्फ बोर्ड कैसे इस जगह पर अपना हक जता रहा है?
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केस पंचायत हारी है, ग्रामीण नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि पक्के पूल धाम की जमीन उनके पूर्वजों ने दान में दी थी, जिसमें पंचायत की कोई भूमिका नही है। पक्के पूल धाम में अपनी जमीन को लेकर उन्होंने निचली अदालत में केस डाला हुआ है, लेकिन अभी तक उस पर कोई फैसला नही आया है, यदि कोर्ट का फैसला आने से पहले वक्फ बोर्ड ने कब्जा किया, तो वे आस पास के ग्रामीणों के समर्थन से उग्र आंदोलन करने से भी पीछे नही हटेंगे।

वर्ष 2000 में वक्फ बोर्ड ने डाला था केस
ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2000 में वक्फ बोर्ड ने न्यायालय में याचिका दायर की थी कि ऊंचा समाना स्थित पक्के पूल की जगह वक्फ बोर्ड के अधीन आती है। जिसको लेकर केस चलता रहा, लेकिन इसी बीच चंडीगढ़ में बैठे उच्च पुलिस अधिकारी की दखलअंदाजी के चलते सुप्रीम कोर्ट का फैसला वक्फ बोर्ड के पक्ष में चला गया। वक्फ बोर्ड केवल पक्के पूल धाम के करोड़ों रुपये के दान पर अपनी निगाहें रखे हुए है, उन्हें हिंदुओं की आस्था से कोई सरोकार नहीं है।

एससी का फैसला वक्फ बोर्ड के पक्ष में
वहीं, हरियाणा वक्फ बोर्ड के अधिकारी रामजी लाल ने बताया कि मधुबन स्थित पक्के पूल दरगाह की जगह वक्फ बोर्ड की है, जिसका फैसला माननीय सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ बोर्ड के पक्ष में किया है और माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही वे कब्जा लेने के लिए पहुंचें है। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पुलिस बल तैनात किया हुआ है, लेकिन ड्यूटी मजिस्ट्रेट के न पहुंच पाने के कारण कब्जे की कार्रवाई न हो सकी।
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