संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। शहर में पिंक बस का संचालन तो हो रहा है लेकिन यह सुविधा केवल महिलाओं के लिए नहीं है। पिंक बस में पुरुष भी सफर कर रहे हैं। ऐसे में इन बसों में सफर करने वाली युवतियों और महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। शहर की महिलाओं का कहना है कि पिंक बस में पुरुषों का बैठना वर्जित किया जाए।
पिंक बस चलाई गई थी महिलाओं के लिए लेकिन इसमें पुरुष भी सफर कर रहे हैं। वर्ष 2020 में महिलाओं के लिए इस विशेष सेवा की शुरुआत की गई थी। तय किया गया था कि इन बसों में केवल महिलाओं को ही बैठने दिया जाएगा। ऐसा हो नहीं रहा।
गांवों से कॉलेज में पढ़ने आने वाली युवतियों ने बताया कि पिंक बस महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शुरू की गई थी लेकिन असल में यह सुविधा महिलाओं को मिल ही नहीं पा रही। बस को साधारण बस के समान चलाया जा रहा है। पुरुषों को भी बैठने दिया जाता है। जरूरी है कि हकीकत में शहर व गांवों में महिलाओं के लिए अलग बस की सुविधा दी जाए।
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बस में छेड़खानी तक होती हैफोटो
इंद्री संध्या ने बताया कि वह रोजाना नीलोखेड़ी से शहर में पढ़ने के आती हैं। पिंक बस की सुविधा तो मिलती है लेकिन पुरुष भी बैठे रहते हैं। ऐसे में कई बार असुविधा होती है। छेड़खानी भी होती है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पिंक बस की सुविधा केवल महिलाओं के लिए दी जाए। गांवों के रूटों पर यह सुविधा शुरू की जाएगी तो लड़कियां और महिलाएं अधिक सुरक्षित महसूस करेंगी।
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महिलाओं के लिए विशेष बस जरूरी
मटक माजरी की रहने वाली शिखा ने बताया कि वह रोजाना कॉलेज से आती-जाती हैं। उन्होंने बताया कि कई बार बस में पुरुषों की ओर से भीड़ का फायदा उठाकर छेड़खानी की जाती है लेकिन भीड़ की वजह से कुछ कहा भी नहीं जा सकता। ऐसे में जरूरी है कि महिलाओं के लिए विशेष बस हो जिसमें बिना किसी डर के सफर किया जा सके। सरकार को ऐसा सुनिश्चित करना चाहिए।
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बस में हो महिला चालक व कंडक्टर
तरावड़ी की रहने वालीं सुमन ने बताया कि कई बार उन्हें प्राइवेट बस से बीच रास्ते में ही उतार दिया जाता है। यह सुरक्षा पर बड़ा सवाल है। यदि पिंक बस सेवा शुरू की जाएगी तो जिम्मेदारी के साथ महिलाओं को उनके निश्चित स्थान तक पहुंचाया जाएगा। बस में सीसीटीवी कैमरे और महिला कंडक्टर व चालक होने चाहिए।
पिंक बसें स्कूल व कॉलेज के समय में छात्राओं को छोड़ने व लाने के लिए जाती थीं। महिला सवारियों की संख्या बस की क्षमता से ज्यादा होने के कारण इन्हें हटाया गया था। वर्तमान में बसों की कमी होने के कारण इन बसों को भी सामान्य तरीके से रूट पर चलाया जा रहा है। - कुलदीप सिंह, जीएम रोडवेज