दिल्ली-अंबाला रेलवे रूट पर करनाल से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित तरावड़ी में बुधवार की रात एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। स्टेशन पर सुबह से ही खड़ी मालगाड़ी पर एलपीजी गैस का टैंकर लदा था। आशंका जताई जा रही है कि चोरों ने पेट्रोल समझकर टैंकर खोल लिया, लेकिन जब उससे एलपीजी गैस का रिसाव होने लगा तो वे भाग निकले। हालांकि, इस तथ्य को आरपीएफ मानने को तैयार नहीं है, लेकिन यदि स्टेशन के आसपास रहने वाले लोगों की मानें तो यहां स्टेशन पर खड़ी होने वाली मालगाड़ियों और ऑयल टैंकर से कोयला, पेट्रोल, चावल, गेहूं चोरी होना आम बात है। हालांकि, पूरे मामले में सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी।
विदित हो कि तरावड़ी स्टेशन पर सुबह से ही खड़ी एलपीजी गैस ले जा रही एक मालगाड़ी के दो टैंक में बुधवार की रात करीब 11 बजे गैस का रिसाव शुरू हो गया। घटना का पता चलते ही रेलवे अधिकारियों और आसपास की कॉलोनियों में दहशत फैल गई। बड़ा हादसा होने की आशंका को देखते हुए रेलवे व पुलिस प्रशासन ने करीब आधा किलोमीटर एरिया को सील कर दिया और कॉलोनियों में घर-घर जाकर लोगों को हिदायत दी गई कि जब तक गैस रिसाव को बंद नहीं कर दिया जाता, तब तक जागते रहें और घर की लाइटों व मोबाइल को बंद कर लें, साथ ही किसी भी प्रकार के ज्वलनशील पदार्थ का उपयोग न करें। रेलवे ने इसके अलावा दिल्ली-अंबाला रूट को भी पूरी तरह बंद कर बिजली सप्लाई को भी पूरी तरह बंद करा दिया। हादसे की गंभीरता को देखते हुए तरावड़ी के अलावा करनाल व घरौंडा से भी फायर ब्रिगेड की आधा दर्जन गाड़ियां बुलाई गईं। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि एलपीजी गैस लेकर यह ट्रेन भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्लांट से अंबाला के आगे पंजाब में स्थित लालडू जा रही थी। घटना के बाद स्थानीय रेलवे अधिकारी फायर ब्रिगेड कर्मचारियों के साथ मिलकर लीकेज पर कंट्रोल पाने की कोशिश की, लेकिन जब लीकेज बंद नहीं हुआ तो पानीपत रिफाइनरी और लालडू से इंजीनियरों की टीम पहुंची। टीम ने करीब 2.30 बजे लीकेज पर कंट्रोल पाया। मालगाड़ी को स्टेशन से वीरवार की सुबह 7.50 मिनट पर लालडू के लिए रवाना किया गया।
इमरजेंसी में प्लेटफार्म एक पर खड़ी थी ट्रेन
तरावड़ी स्टेशन पर एलपीजी ले जा रही इस ट्रेन को इमरजेंसी में प्लेटफार्म एक पर खड़ी की गई थी। लेकिन, इस बारे में जब तरावड़ी स्टेशन मास्टर प्रकाश चौधरी से बात की गई तो उन्होंने यह नहीं बताया कि इमरजेंसी किस बात की थी। उन्होंने कहा कि दोपहर 1 बजकर 43 मिनट पर इस मालगाड़ी को चलाने वाला लोको पायलट अपना समय पूरा होने पर विश्राम करने चला गया। इसके बाद से यह मालगाड़ी तरावड़ी के प्लेटफार्म नंबर-1 पर ही खड़ी थी। दिल्ली से अंबाला जाने वाली पैसेंजर ट्रेनों को बीच की लाइन से गुजारा जा रहा था। इस लाइन पर कोई प्लेटफार्म न होने के कारण पैसेंजर ट्रेन में चढ़ने व उतरने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
खुलेआम होता है मालगाड़ियों से चोरी
तरावड़ी रेलवे स्टेशन पर रुकने वाली मालगाड़ियों व पेट्रोल टैंकरों से चोरी करने के लिए बड़ा गिरोह सक्रिय है। इसका सबसे बड़ा कारण है स्टेशन पर सुरक्षा का अभाव। छोटा स्टेशन होने के कारण यहां पर न तो जीआरपी की चौकी है और न ही आरपीएफ की। इससे इस गिरोह का मनोबल बढ़ा हुआ है। स्टेशन के नजदीक रहने वाले लोगों का कहना है कि यहां पर प्रतिदिन सामान लोड कर आने वाली एक-दो मालगाड़ी क्रासिंग के लिए जरूर रुकती है। मालगाड़ी के रुकते ही गिरोह के सदस्य सक्रिय हो जाते हैं। यदि मालगाड़ी में कोयला, चावला गेहूं जैसा समान रहता है तो तत्काल उसकी लूट मच जाती है। सुरक्षाकर्मी न होने के कारण रेलवे कर्मचारी भी इन्हें रोकने में असहाय नजर आते हैं। लोगों का कहना है यहां तक तो ठीक था, लेकिन कुछ माह से अब यहां पर रुकने वाले पेट्रोल टैंकरों से भी तेल चारी करते लोग नजर आते हैं। बुधवार की घटना भी शायद इसी कारण हुई। एलपीजी गैस का टैंकर यहां पर सुबह से ही खड़ा था, इसलिए इस गिरोह की नजर में आ गया। गिरोह के सदस्यों ने इसे पेट्रोल टैंकर समझकर रात होते ही धावा बोल दिया। स्टेशन से काफी दूर अंधेरे में खड़े ट्रेन के इंजन के पास वाले दो टैंकर को निशाना बनाया गया। लेकिन जब चोरों ने टैंकर के ऊपर का वॉल तोड़ तो उसमें से एलपीजी गैस निकलने लगी, इसलिए वे इसे छोड़कर भाग गए।
आरपीएफ ने किया इनकार, सुरक्षा पर साधी चुप्पी
इस मामले में जब करनाल स्थित आरपीएफ के चौकी इंचार्ज राजकुमार से बात की गई तो उन्होंने टैंकर के साथ छेड़छाड़ की घटना को नकार दिया। उनका तर्क था कि क्योंकि सैंपल वॉल के ऊपर लगे ढक्कन के ठीक ऊपर से हाई टेंशन वायर गुजरती है। इसलिए टैंकर के ऊपर चढ़कर ढक्कन या सैंपल वॉल से छेड़छाड़ करना नामुमकिन है। हालांकि, स्टेशन पर सुरक्षा के मामले पर उन्होंने चुप्पी साध ली।