करनाल। खेती में कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग और उससे होने वाले नुकसान के बीच अब किसानों के लिए राहत भरी तकनीक सामने आई है। कमरे से मच्छर भगाने वाली मशीनों की तरह काम करने वाली नैनो इंसेक्ट रिपेलेंट मशीन तैयार की गई है, जो खेतों में कीटों को खत्म करने में मदद करेगी। इस तकनीक को नेशनल हॉर्टिकल्चर रिसर्च, डेवलपमेंट एंड फाउंडेशन (एनएचआरडीएफ) से जुड़े वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी सरदार सिंह ने विकसित किया है।
मशीन की कार्यप्रणाली सरल है। इसमें विशेष प्रकार की लाइट और आकर्षण तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे कीट इसकी ओर खिंचे चले आते हैं। जैसे ही कीट मशीन के संपर्क में आते हैं, वे उसमें फंस जाते हैं और नष्ट हो जाते हैं। इससे खेतों में कीटों की संख्या नियंत्रित रहती है और फसलों को नुकसान से बचाया जा सकता है। विशेषज्ञ सरदार सिंह का कहना है कि यह तकनीक किसानों के लिए कई मायनों में फायदेमंद साबित हो सकती है। एक ओर जहां कीटनाशकों पर खर्च कम होगा, वहीं दूसरी ओर फसलों की गुणवत्ता भी बेहतर रहेगी। कीटनाशक मुक्त खेती को बढ़ावा मिलने से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव भी कम होंगे।
पूरी तरह से सौर ऊर्जा पर आधारित
महज एक फुट आकार की प्लास्टिक की यह मशीन पूरी तरह सौर ऊर्जा पर आधारित है। दिन में सूरज की रोशनी से चार्ज होने के बाद यह रात में स्वत: सक्रिय हो जाती है और सुगंध से कीटों को अपनी ओर आकर्षित करती है। तकनीक विशेषज्ञ के अनुसार मशीन को फसल के बीच में तने से करीब एक फुट ऊंचाई पर स्थापित करना होगा, ताकि यह अधिक प्रभावी तरीके से काम कर सके। दिन ढलते ही इसकी लाइट जल जाएगी और सुबह होते ही स्वत: बंद हो जाएगी।
कई महीनों तक चले ट्रायल में मिली सफलता
तरावड़ी क्षेत्र के खेतों में कई माह तक इसका सफल ट्रायल किया जा चुका है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि इस तकनीक को बड़े स्तर पर अपनाया गया तो यह पारंपरिक कीटनाशक आधारित खेती का मजबूत विकल्प बन सकती है। खासकर सब्जी और बागवानी फसलों में इसका उपयोग अधिक प्रभावी माना जा रहा है, जहां कीटों का प्रकोप अधिक होता है। डॉ. सरदार सिंह वर्तमान में फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (एफपीओ) भी संचालित कर रहे हैं, जिसमें प्रदेश के आठ जिलों के करीब 800 किसान जुड़े हैं। हाल ही में महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय में आयोजित उद्यान मेले में भी उन्होंने इस तकनीक का प्रदर्शन किया।