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Karnal News: ताजेवाला में हर दूसरे घर में बुखार ग्रस्त लोग

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संदिग्ध बुखार से महिला समेत तीन लोगों की मौत के बाद ताजेवाला गांव के लोगों में दहशत का माहौल है। शायद ही कोई ऐसा परिवार होगा जिसमें लोग बुखार से ग्रस्त न हो। लोग अपना उपचार निजी अस्पतालों व बिना डिग्री धारक डॉक्टरों से कराने को मजबूर हैं। लोगों का कहना है कि गांव की आबादी करीब चार हजार है, यदि स्वास्थ्य विभाग ने समय रहते कोई ठोस कदम उठाया होता तो गांव में इतने लोग बुखार से पीड़ित न होते। यहां तक की तीन लोगों की जान भी बच सकती थी। वहीं ग्रामीणों ने गांव की सफाई व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। गांव का पंचायत सदस्य राशिद भी शनिवार को डेंगू पॉजिटिव हो गया। बुखार होने पर उन्होंने टेस्ट कराया था। लैब से उनके पास फोन आया कि उनकी रिपोर्ट में डेंगू आया है।
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ताजेवाला निवासी 50 साल का रामकुमार 10 दिन से बुखार से ग्रस्त है। इसी तरह 25 साल की पूजा, 27 साल का रवि, चार साल का युवराज, 54 साल का राजिंद्र कुमार, 35 साल का ईस्लाम, तालिब, फरीद, कादिर खान, पांच साल का साहद, 11 साल की बेबी, अमित कुमार समेत दर्जनों लोग बीमार हैं। कई दिनों से दवाई ले रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें आराम नहीं लगा।

ताजेवाला निवासी महीपाल ने बताया कि गांव में दो सफाई कर्मचारी हैं। परंतु कर्मचारी नियमित रूप से सफाई करने के लिए नहीं आते। गांव की नालियां गंदगी से अटी पड़ी हैं। सरपंच का सफाई की तरफ ध्यान नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरपंच के परिवार में शादी थी। एक सफाई कर्मचारी कई दिन से उनके वहां ही सफाई कर रहा है।
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ताजेवाला के राव ईनाम ने बताया कि हर घर से लोग बीमार हैं। पहले भी लोगाें में ऐसा बुखार हुआ था, लेकिन आज तक इतने लोग एक साथ बीमार नहीं हुए। बुखार ऐसा है कि दवाई भी बेअसर हो रही है। गांव में गंदे पानी की निकासी का कोई प्रबंध नहीं है।

गांव के राव ईस्पाक ने बताया कि 15 दिन से पूरा गांव बुखार से पीड़ित हैं। चार हजार की आबादी वाले गांव में हर घर से कोई न कोई बीमार है। लोग निजी डॉक्टरों से महंगा उपचार कराने को मजबूर हैं। डॉक्टरों की टीम गांव में आकर खानापूर्ति करके चली गई। लोगों को पीसीएम व दर्द की गोली देकर चली गई।

गांव की सरपंच अलीशा के प्रतिनिधि जाकिर हुसैन ने बताया कि ताजेवाला में सात बस्तियां है। तीन मौत रांगड़ान बांस बस्ती में हुई हैं। गांव का पंच राशिद भी डेंगू पॉजिटिव हो गया है। अब तक दो बार गांव में फॉगिंग करवा चुके हैं। कर्मचारी के साथ खुद मौजूद रहता हूं ताकि कोई घर बिना फॉगिंग के रह न जाए। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से उपचार में वह सहयोग नहीं मिला जिसकी लोगों को उम्मीद रहती है। डॉक्टरों की टीम तो गांव में आई, लेकिन लोग उनके काम से खुश नहीं हैं। वहीं उनका कहना है कि उन्होंने पंचायत के स्वीपर को अपने निजी काम में नहीं लगाया है। अपने खर्च पर घर में अलग से स्वीपर लगाया हुआ है। पंचायत के दो स्वीपर हैं जो गांव में ही सफाई कर रहे हैं।

जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. सुशीला सैनी ने बताया कि जैसे ही ताजेवाला में बुखार फैलने की सूचना मिली तुरंत जांच के लिए टीम को गांव में भेज दिया था। गांव से 28 लोगों के सैंपल लिए गए हैं। इनकी जांच की जा रह है। लोगों को जरूरी दवाइयां देने के साथ-साथ जागरूक भी किया गया। लोगों को बताया गया कि वह अपने आसपास या घर में खाली बर्तनों में पानी जमा न होने दें।
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