आजादी के बाद यह पहला मौका है, जब जिले में जंगे आजादी के चश्मदीदों की कमीं खल रही है। करीब सवा दो सौ आजादी के रणबांकुरों में से पिछले साल तक खुशीराम के रूप में हमारे बीच केवल एक जंगे आजादी का दीवाना मौजूद था लेकिन इस साल वह भी नहीं हैं। प्रशासन ने भी इस बार स्वतंत्रता संग्राम में सहभागिता करने वालों के परिजनों को भी मुख्य कार्यक्रम में नहीं बुलाया है, लेकिन मुख्य कार्यक्रम में कोराना वॉरियर्स को सम्मानित करने की तैयारी है।
प्रशासनिक कार्यालयों में जाकर जानकारी हासिल करने पर भी जिले में कितने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे, उनकी मौजूदा समय में कोई प्रमाणिक सूची उपलब्ध नहीं हो सकी। कार्यालयी पटल के जिम्मेदार कर्मचारी भी सूची के नाम पर बगलें झांकते दिखे। लेकिन पिछले दिनों जिला स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्ताधिकारी संगठन के प्रधान नरेंद्र सुखन ने एक सूची तैयार कराई थी, जिसमें डा. बाल कृष्ण कौशिक ने करीब 206 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नामों का संकलन किया था। जिसमें खुशीराम ही बचे थे, एक मार्च 2020 को उन्होंने भी अलविदा कह दिया।
बाजार में खास तिरंगा मास्क
-बाजार में आज काफी चहल पहल दिखी, खासकर बुक स्टाल व अन्य राष्ट्रीय ध्वज विक्रय केंद्रों पर जमकर खरीदारी की गई। छोटे बड़े तिरंगे खरीदकर ले जाने को लेकर काफी उत्साह दिखा। इस बार स्वतंत्रता दिवस के खास मौके पर बाजार में तिरंगा ध्वज के रंग वाले मास्क बाजार में उतारे गए हैं। जिनकी जबरदस्त बिक्री हो रही है।
जिले में कोई भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हमारे बीच नहीं है। लेकिन क्या सरकार उनके पुरुषार्थ को भुला देगी। झारखंड सरकार ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के पत्नी के बाद उनके परिजनों को भी सम्मान देने के लिए कुटुंब पेंशन शुरू करके मिसाल कायम की है। हरियाणा सरकार इस मामले में उदासीन है। सरकार को कुटुंब पेंशन दी जानी चाहिए, साथ ही राष्ट्रीय पर्वों पर उनके परिजनों को भी सम्मान दिया जाना चाहिए।
-जगमिंदर सिंह, पुत्र स्वतंत्रता संग्राम सेनानी खुशीराम
-जिले में करीब 250 स्वतंत्रता सेनानी रहे, अब एक भी नहीं है। यह पहला मौका है जब जिला प्रशासन ने 14 अगस्त की शाम तक भी किसी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के परिजनों को स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित तक नहीं किया है। जब कोरोना वॉरियर्स को समारोह में बुलाकर आमंत्रित किया जा सकता है तो स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों से लोहा लेने वालों के परिजनों को क्यों नहीं। परिजनों को झारखंड सरकार की तरह कुटुंब पेंशन दी जानी चाहिए।
-नरेंद्र सुखन, प्रधान-जिला स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संगठन