कोई पानी की टंकी भर रहा था, तो कोई घरों से राशन लेकर ट्रालियों में लाद रहा था। वहीं, स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्र अपने अपने बस्तों में किताबें भर रहे थे।
सभी किसानों, महिलाओं और और बच्चों के मन में यही विचार चल रहा होगा कि अब न जाने कब उन्हें अपने गांव की मिट्टी और आबोहवा का दीदार होगा। चकबंदी विवाद में गांव छोड़ रहे छह गांवों के सैकड़ों किसानों के चेहरे पर आंसू और मायूसी साफ झलक रही थी।
जैसे ही किसानों ने अपने घरों को ताले लगाने शुरू किए तो माहौल गमगीन हो गया। महिलाएं की आंखों से आंसू रुके नहीं रुके। उनके चेहरे पर प्रशासन और सरकार के खिलाफ निराशा साफ झलक रही थी। अपने छोटे-छोटे बच्चों को साथ ले जा रही महिलाओं ने कहा कि मरते दम तक वे इंसाफ की लड़ाई लड़ती रहेंगी। इसके बाद करीब बारह बजकर बीस मिनट पर किसानों ने दिल्ली की ओर कूच कर दिया और गलियों में पूरी तरह से सन्नाटा पसर गया।
जेल में रही आठ माह की रीयल ने किया काफिले का नेतृत्व
मंगलवार को कालरम, अराईपुरा, अमृतपुर कलां, लालुपूरा, भरतपुर व मंगलोरा की सैकड़ों महिलाएं, पुरुष और बच्चे गांव कालरम में एकत्रित हुए। लगभग 12 बजकर 20 मिनट पर 22 ट्रैक्टर ट्रालियों के काफिले का नेतृत्व लगभग 12 दिन तक जेल में रही आठ माह की बच्ची रीयल ने किया।
रीयल ने काफिला रवाना किया तो माहौल गमगीन हो गया। इस विवाह में रियल अपनी मां के साथ 12 दिन तक जेल में रही थी। काफिले में 85 वर्षीय महिला नौवरती ने कई घरों को तालाबंदी की। नोवरती, सुधा, बाला, राजदुलारी, मितलेश ने कहा कि एसीओ ने कुछ भूमाफिया लोगों से मिलीभगत करके गलत चकबंदी कई गई है, जिससे हजारों परिवार बेरोजगार होने के कारण भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लेकर पिछले काफी दिनों से धक्के खा रहे हैं, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। जिस कारण परेशान होकर राष्ट्रीय कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से समस्या का हल निकालने के लिए गुहार करेंगे।
रीयल का जीवन संघर्ष भरा
रीयल की ताई बाला ने बताया कि रीयल का जीवन संघर्ष भरा है। उन्होंने बताया कि सात महीने में रीयल ने अपने माता पिता के साथ जेल में जाना पड़ा। गांव में लोगों ने रीयल को आंदोलन में ग्रामीणों का हिस्सा मनाते हुए गांव के खेतों में छोड़े गए नंदी को रीयल से ही छुड़वाया था और दिल्ली जाने वाले का काफिले का नेतृत्व भी रीयल कर रही है। उन्होंने बताया कि जब तक हमें इंसाफ नहीं मिलता, तब तक रीयल ग्रामीणों के संघर्ष में साथ रहेगी।
रिश्तेदार देंगे घरों और खेतों का पहरा
नरेंद्र कुमार, अकल सिंह राणा, महिपाल राणा, रामनिवास सैनी, ईश्वर, जोगी, वेदपाल और कर्म सिंह ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासन व सरकार ने हमारी मांगों पर कोई गौर नहीं किया। इसलिए दिल्ली में जंतर-मंतर पर धरना देंगे। अगर समस्या का हल नहीं हुआ तो वहीं पर डेरा जमाए रखेंगे। उन्होंने बताया कि दिल्ली जाने के बाद हमारे घरों व खेतों का पहरा रिश्तेदार देंगे। पशुओं को गांवों में छोड़ दिया है। अगर इस दौरान घरों व खेतों में कोई नुकसान हुआ तो उसका जिम्मेदार प्रशासन होगा।
चुनावों का ग्रामीण करेंगे बहिष्कार
ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में सरकार और विपक्ष के नेताओं से इंसाफ की गुहार लगाई, लेकिन किसी ने ग्रामीणों की सुध नहीं ली। उन्होंने बताया कि आगामी लोकसभा व विधानसभा चुनावों का बहिष्कार करेंगे और किसी भी राजनेता को गांव में घुसने नहीं देंगे। उन्होेंने कहा कि राजनेता वोट लेने के लिए घड़ियाली आंसू बहाते हैं ,लेकिन बाद में सुध तक नहीं लेने आते हैं।
यह है मामला
यमुना से सटे गांवों एक दर्जन गांवों की चकबंदी हुई थी। चकबंदी में छह गांवों के ग्रामीणों ने गलत चकबंदी होने का आरोप लगाया था। ग्रामीणों ने दोबारा चकबंदी कराने के लिए प्रशासन से गुहार लगाई थी। ग्रामीणों ने चकबंदी की सीबीआई से जांच कराने के लिए कई बार करनाल और घरौंडा में धरने और प्रर्दशन भी किए।
इसके बाद भी प्रशासन ने ग्रामीणों की समस्या का हल नहीं किया, जिससे परेशान होकर ग्रामीणों ने रेल रोककर प्रदर्शन किया। 22 जनवरी को ग्रामीणों ने एसीओ दलबीर सिंह, पटवारियों के तबादले, ग्रामीणों पर दर्ज झूठे मुकदमों और गलत चकबंदी की दोबारा सीबीआई से जांच कराने का ज्ञापन तहसीलदार निर्मल दहिया को सौंपा था। साथ ही चेताया था कि अगर सरकार व प्रशासन ने इसके बावजूद हमारी मांगें नहीं मानी तो दिल्ली में जंतर मंतर पर प्रदर्शन करेंगे।