करनाल। जीवन को सफल बनाने के लिए आचरण, संयम, शांति, स्पष्टता, धैर्य, साहस, संकल्प जैसे गुणों को अपनाना जरूरी है। आचरण में स्वार्थ नहीं होना चाहिए। न व्यक्ति को खुशी के पलों में अधिक खुश और न दुख की स्थिति में अधिक निराश होना चाहिए। गीता भी यह संदेश देती है।
शनिवार को जिला स्तरीय गीता जयंती समारोह में आयोजित गीता पर आधारित सेमिनार में संतों एवं विद्वानों ने यह सीख दी। डॉ. मंगलसेन सभागार में पहले दिन कार्यक्रम की शुरुआत गीता में स्वधर्म, कर्तव्यनिष्ठ-शांति सद्भाव और स्वदेशी की प्रेरणा विषय पर सेमिनार के साथ की गई। सेमिनार में डाॅ. भीमराव आंबेडकर अध्ययन केंद्र कुरुक्षेत्र के निदेशक डॉ. प्रीतम सिंह ने गीता जयंती के अंतरराष्ट्रीय स्वरूप और गीता में स्वधर्म पर विचार रखे। सेमिनार में लोकेश मुनि, बाबा भूपेंद्र, संपूर्णानंद महाराज ने भी विचार रखे।
उन्होंने कहा कि गीता के इस संदेश को याद रखना चाहिए कि जो हुआ, अच्छा हुआ, जो होगा, अच्छा होगा। हजारों वर्ष पूर्व युद्ध के मैदान में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का संदेश दिया। हम धर्म की रक्षा करेंगे तो धर्म हमारी करेगा। पति-पत्नी, पिता-पुत्र, अध्यापक-शिष्य के संबंधों में सबका अपना-अपना धर्म है। देश की रक्षा करने वाले सैनिक और शासक का अपना धर्म है।
संतों ने कहा कि गीता सभी के लिए उपयोगी है। गीता जीवन जीने का मार्ग दिखाती है। इस अवसर पर मेयर रेणु बाला गुप्ता ने मुख्य अतिथि सहित अन्य संतों का अभिवादन व स्वागत किया। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के अलावा स्वामी ज्ञानानंद महाराज, लोकेश मुनि, भूपेंद्र, स्वामी संपूर्णानंद, दिव्यानंद महाराज, डॉ. प्रीतम सिंह को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
पूर्व राष्ट्रपति नियमित पढ़ते थे गीता : ज्ञानानंद
महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि श्रीमद्भगवत गीता सबके लिए है। यह भारत का गौरव है। इसमें पूरी मानवता के लिए संदेश है। गीता अर्जुन के लिए समाधान बनी, आज यह विश्व के लिए समाधान है। पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम नियमित रूप से गीता पढ़ते थे। उन्होंने कहा कि बच्चों में कैसे नशे की आदत दूर हों, उनमें अच्छे संस्कार कैसे आएं, सकारात्मक ऊर्जा का संचार कैसे हो, इसी के निमित्त गीता महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। आज समाज में सद्भावना और सामाजिक समरसता की जरूरत है। उन्होंने बच्चों से आह्वान किया कि वे रात को सोने से पहले मोबाइल की आदत को छोड़कर गीता के श्लोक का उच्चारण करें।
जिला स्तरीय गीता जयंती महोत्सव के दौरान डा. मंगलसेन ऑडीटोरियम में राधा कृष्ण बने कलाकार। संवाद
जिला स्तरीय गीता जयंती महोत्सव के दौरान डा. मंगलसेन ऑडीटोरियम में राधा कृष्ण बने कलाकार। संवाद