संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। अभिभावकों का बच्चों के साथ तुतला या हकला कर बोलना उनकी बोलने की क्षमता को प्रभावित कर रहा है। जिला नागरिक अस्पताल के ऑडियोलॉजी विभाग में इलाज के लिए पहुंच रहे बच्चों की काउंसलिंग के दौरान यह चौंकाने वाली बात सामने आई है। नागरिक अस्पताल के जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र (डीईआईसी) में हर महीने करीब 30 बच्चे स्पीच थेरेपी के लिए केंद्र में पहुंच रहे हैं।
वहीं, जिले में अब तक करीब 600 के करीब बोलने से संबंधित समस्या के दर्ज हो चुके हैं। पिछले साल संख्या केवल 150 के करीब थी। वहीं, इस साल हर महीने 30 मरीज आना यानी अप्रैल से अक्तूबर तक करीब 300 बच्चे आ चुके हैं यानी यह बढ़ती संख्या चिंता का विषय बनती जा रही है। वहीं, केंद्र से ऑडियोलॉजिस्ट अपूर्वा शर्मा ने बताया कि हर सप्ताह 6 से 7 बच्चे नियमित रूप से स्पीच थेरेपी के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि आजकल कई अभिभावक अपने बच्चों से लाड-प्यार में तुतला कर बात करते हैं, जिससे बच्चे उसी गलत उच्चारण को दोहराने लगते हैं। यह आदत आगे चलकर हकलाने या तुतलाने की समस्या में बदल सकती है। ऑडियोलॉजिस्ट अपूर्वा शर्मा ने बताया कि हकलाना या तुतलाना जन्मजात समस्या नहीं होती। यह धारणा गलत है कि यह बच्चों में जन्म से होती है। असल में अभिभावकों की ओर से बच्चों से बातचीत कम करना और उनकी जगह मोबाइल थमा देना भी इस समस्या का बड़ा कारण है।
उन्होंने कहा कि अभिभावकों को अपने बच्चों के साथ समय बिताना चाहिए और उनसे सही तरीके से बात करनी चाहिए, ताकि वे स्पष्ट भाषा बोलना सीख सकें। ऑडियोलॉजिस्ट अपूर्वा शर्मा ने बताया कि डीईआईसी केंद्र में हर सप्ताह करीब 6 से 7 बच्चे स्पीच थेरेपी के लिए आते हैं जिन्हें शब्द बोलना सिखाया जाता है। हर बच्चे की अलग अलग शब्द को बोलने में दिक्कते होती हैं और उसी हिसाब से उन्हें थेरेपी दी जाती है। बच्चों को कौन से शब्द बोलने में दिक्कत हो रही है उस पर निर्भर करता है कि उसकी थेरेपी कितने दिन चलेगी।