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धान घोटाला : रिकॉर्ड की जांच में हो सकता है कोई खुलासा

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संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। धान घोटाले में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के मुख्यालय के आदेश के बाद प्रदेश स्तर के अफसरों की छह टीमें जिलेभर की मिलों में स्टॉक का मिलान कर रही हैं। अधिकतर मिलों में धान के स्टॉक का भौतिक सत्यापन हो चुका है। धान पूरा मिला है। धान के भौतिक सत्यापन के अलावा रिकॉर्ड के मिलान, गेटपास सहित आढ़तियों के रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि रिकॉर्ड की जांच में घोटाले से संबंधित तथ्य सामने आ सकते हैं।
छह टीमों में 30 अधिकारियों को शामिल किया गया है, जोकि अलग-अलग जिलों के हैं। एचसीएस अधिकारी को नोडल अफसर नियुक्त किया गया है। हर विशेष टीम में नोडल अधिकारी समेत छह अफसरों की टीम जिले के 231 राइस मिलों के स्टॉक का भौतिक सत्यापन के साथ-साथ रिकॉर्ड को जांच रही है। जांच रिपोर्ट तीन दिन के भीतर मुख्यालय सौंपनी होगी। इन टीमों की तैनाती यमुनानगर व करनाल में हुए धान घोटाले के तुरंत बाद हुई है। इससे सभी राइस मिलर सतर्क हो गए हैं। दावा है कि सभी ने धान के स्टॉक को पूरा कर लिया है। टीमों की जांच में अभी तक कोई बड़ी गड़बड़ी सामने नहीं आई है। जांच शुरू होने के बाद ही विभाग के प्रधान सचिव डी सुरेश ने भी दो दिन पहले करनाल में अधिकारियों की बैठक ली थी।
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खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक अनिल कुमार ने बताया कि विभाग के प्रधान सचिव ने अधिकारियों के साथ बैठक की थी। बैठक में जिले में हुए फर्जी गेट पास और धान घोटाले को लेकर पूछताछ की थी। अब छह टीमों की जांच रिपोर्ट तीन दिन में मुख्यालय को सौंप दी जाएगी। हालांकि अभी रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है। इसकी रिपोर्ट भी बनाई जाएगी। उसी के आधार पर आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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20 करोड़ के फर्जीवाड़े में महज 5.25 लाख बरामद
करनाल में हुए 20 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े में अब तक 17 अधिकारियों पर प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है। इनमें से 11 निलंबित हो चुके हैं। अब तक आठ राइस मिल मालिकों पर प्राथमिकी दर्ज है। इनमें से दो गिरफ्तार हो चुके हैं। दो को जमानत मिल चुकी है। चार मिलर पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं। इसके अलावा दो कंप्यूटर ऑपरेटर और मंडी सुपरवाइजर की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस ने अभी तक इस घोटाले में 5.25 लाख रुपये की रिकवरी की है।
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