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Karnal News: एचआईवी की चपेट में आ रहे युवा और किशोर

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विश्व एड्स दिवस
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- छह वर्षों में एचआईवी के 1655 मरीज आए सामने, इनमें 15-29 वर्ष तक के 26.4 प्रतिशत मरीज शामिल
अनुज शर्मा
करनाल। जागरूकता के अभाव में एचआईवी तेजी से युवाओं और किशोरों को अपनी चपेट में ले रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले छह वर्षों में एचआईवी के 1655 मरीज सामने आए हैं। इनमें 0-14 वर्ष तक के 2.4 प्रतिशत, 15-29 वर्ष तक के 26.4 प्रतिशत, 30-49 वर्ष तक के 52.2 प्रतिशत व 50 प्लस के 19 प्रतिशत मरीज शामिल हैं। जो चिंताजनक है।
उप-जिला सिविल सर्जन डॉ. सिम्मी कपूर ने बताया कि एड्स लाइलाज बीमारी है, लेकिन जागरूकता ही इसका बचाव है। असुरक्षित यौन संबंध, अशुद्ध रक्त का चढ़ाया जाना, दूषित सुइयों व सिरिंज का प्रयोग और संक्रमित गर्भवती मां से जन्म लेने वाले बच्चे या स्तनपान कराने से यह बीमारी फैलती है। एचआईवी संक्रमण को रोकने का एकमात्र तरीका लोगों में जागरूकता है। इसे ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। इसके तहत अप्रैल 2018 से अक्तूर 2023 तक तीन लाख 28 हजार 495 लोगों ने एचआईवी की जांच कराई। इसमें 1655 एचआईवी पॉजिटिव मिले हैं, जिसमें 1541 महिला और पुरुष सहित 114 गर्भवती शामिल हैं। उन्होंने बताया कि लोगों को जागरूक करने के लिए पिछले छह साल में 1510 जागरूकता शिविर लगाए जा चुके हैं। संवाद
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जिले में खुला दूसरा एआरटी सेंटर
उप-जिला सिविल सर्जन डॉ. सिम्मी कपूर ने बताया कि करनाल में नागरिक अस्पताल के बाद कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में एआरटी सेंटर खोला जा चुका है। ऐसे में मरीज नागरिक अस्पताल के साथ-साथ मेडिकल कॉलेज से भी निशुल्क दवा का लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने बताया कि नागरिक अस्पताल के एआरटी सेंटर से कुल 1790 एचआईवी मरीज दवा ले रहे हैं। इनमें कुछ मरीज अन्य जिलों व अन्य राज्यों से भी हैं। इनमें से 1058 पुरुष, 685 महिलाएं, 24 बच्चे (लड़के), 19 बच्चे (लड़कियां) व चार ट्रांसजेंडर शामिल हैं। वहीं आयुवर्ग के अनुसार 0-14 वर्ष तक के 43 मरीज, 15-29 वर्ष तक के 472 मरीज, 30-49 वर्ष तक के 934 मरीज व 50 प्लस के 341 मरीज शामिल हैं।
इनसे एड्स होने की संभावना
असुरक्षित यौन संबंध, नशीली दवाइयां या नशीले पदार्थ इस्तेमाल करने के लिए इंजेक्शन का प्रयोग, माता या पिता के एचआईवी संक्रमित होने पर पैदा होने वाली संतान को, बिना जांचा या ब्लड बैंक द्वारा बिना सत्यापित किया रक्त चढ़ाने से एड्स हो सकता है। वहीं, एचआईवी संक्रमित से अंगदान लेने और संक्रमित द्वारा इस्तेमाल किया गया ब्लेड व सिरिंज आदि से भी एड्स हो सकता है।

यह भी जानें

असुरक्षित महिला-पुरुष यौन संबंधों से 94 प्रतिशत लोग, समलैंगिक संबंधों से एक प्रतिशत, रक्त से 0.1 प्रतिशत और सूई से 0.9 प्रतिशत संक्रमण की संभावना रहती है। वहीं अभिभावकों से बच्चों में तीन प्रतिशत व एक प्रतिशत में संक्रमण का नहीं पता चलता।
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यहां मिल रही जांच की सुविधा
जिले में छह जगह नागरिक अस्पताल, कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज, असंध, घरौंडा, इंद्री व नीलोखेड़ी में आईसीटीसी सेंटर चल रहे हैं। वहीं 24 जगह शिव कॉलोनी, रामनगर, इंद्रा कॉलोनी, डीटीसी करनाल, धोबी मोहल्ला, वसंत विहार, बल्ला, सालवन, उपलाना, जुंडला, पोपड़ा, बरसत, कुटेल, चौरा, गगसीना, खुखनी, भादसो, मधुबन, काछवा, तरावड़ी, सग्गा, बडौता, सांभली व निसिंग में एफआईसीटीसी सेंटर चल रहे हैं। जहां निशुल्क जांच सुविधा मरीजों को दी जा रही है।
पिछले छह वर्षों की जांच और पॉजिटिव मरीज
वर्ष जांच पॉजिटिव एएनसी जांच पॉजिटिव

2018 31940 245 33642 30

2019 25736 251 20883 15

2020 27204 208 20688 20

2021 33033 275 22154 24

2022 49644 362 21257 12

2023 30891 200 11423 13
कुल 198448 1541 130047 114
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