कुरुक्षेत्र। कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा गांव लुखी के किसानों के लिए फसल अवशेष प्रबंधन विषय पर पांच दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वरिष्ठ समन्वयक डाॅ. बलजीत सिंह सहारण की अगुवाई में लुखी गांव के 25 किसानों को फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर उनका उचित प्रबंधन करने के लिए प्रशिक्षित किया गया ताकि उनके माध्यम से जिले के ज़्यादा से ज़्यादा किसानों को जागरूक किया जा सके।
उन्होंने किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किसानों के लिए चलाए जा रहे क्रियाकलापों के बारे में बताया। उन्होंने किसानों को डिकंपोजर के प्रयोग से जैविक तरीकों से पराली गलाकर खेत में ही मिलाने के बारे में जानकारी दी। वैज्ञानिक डाॅ. सरिता रानी ने इस प्रशिक्षण की पाठ्यक्रम समन्वयक के रूप में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने किसानों को फसल अवशेष जलाने से होने वाले नुकसान तथा अवशेष का उचित प्रबंधन करने से होने वाले लाभ के बारे में विस्तार से बताया।
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केंद्र के वैज्ञानिक डाॅ. मनोज कुमार ने फसल अवशेष प्रबंधन में प्रयोग होने वाली मशीनें किसानों को दिखाते हुए उनके बारे में जानकारी दी। डाॅ. फतेह सिंह ने फसल अवशेष को खुंब उत्पादन के लिए इस्तेमाल करने के बारे में बताया। डाॅ. कविता ने फसल अवशेष को खेत में मिलाने से मिट्टी के स्वास्थ्य पर होने वाले अच्छे परिणामों की जानकारी दी। डाॅ. ममता (मौसम विज्ञान) ने मौसम के प्रभाव एवं मौसम पूर्वानुमान के महत्व से संबंधित तथ्यों पर जानकारी साझा की।
कृषि विभाग से डाॅ. प्रदीप शर्मा ने सरकार द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन पर चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। रिटायर्ड वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ. प्रद्युमन भटनागर ने फसलों में होने वाले विभिन्न प्रकार के कीड़ों के बारे में संपूर्ण जानकारी किसानों से साझा की। कृषि विभाग के अधिकारी भारत वाही ने फसल अवशेष प्रबंधन के अंतर्गत कृषि यंत्रों पर मिलने वाली सब्सिडी व पंजीकरण के बारे में किसानों को विस्तार से बताया ।