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अलग गुरुद्वारा कमेटी का विरोध

Wed, 09 Jul 2014 11:37 PM IST
अमर उजाला/ब्यूरो, करनाल
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हरियाणा में अलग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी बनाए जाने के मामले में एसजीपीसी के साथ जुडे़ सैकड़ों सिखों ने विरोध जताया।
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शहर में विरोध कर डीसी के मार्फत गृह मंत्री राजनाथ सिंह को ज्ञापन भेजा। सिखों ने कहा हरियाणा में अलग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी बनाने की साजिश कांग्रेस केवल वोट बटोरने के लिए कर रही है।

सिखों ने ज्ञापन के माध्यम से गृहमंत्री को विस्तार से अवगत कराने के साथ मामले को यहीं पर विराम दिलाने का आग्रह किया।

प्रदर्शनकारियों ने डेरा कार सेवा से लेकर जिला सचिवालय तक विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन शिरोमणि गुरुद्वारा प्र्रबंधक कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रघुजीतसिंह विर्क  के नेतृत्व में किया गया।
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इन लोगों ने डीसी बलराज सिंह को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने कहा ज्ञापन के माध्यम से एसजीपीसी बनाने के समय से एक्ट 1925 तक का पूरा विस्तार से जिक्र कर समझाया गया है। यह भी बताया गया कि राजनीति के नाम पर सिखों की दो फाड़ नहीं किए जाने चाहिए।  
वोट की खातिर हुड्डा ने हरियाणा के सिखों को दो फाड़ किया: मक्कड़

करनाल में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ ने कहा हरियाणा के सीएम और कांग्रेस वोट की खातिर सिखों को दो फाड़ कर रही है।

हरियाणा में अलग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी बनाने का कोई औचित्य नहीं है। कांग्रेस वोट की राजनीति के लिए किसी हद तक जा सकती है।

हरियाणा के सिखों को मामूली लालच देकर गुमराह किया जा रहा है। बुधवार को मक्कड़ करनाल के डेरा कार सेवा में पत्रकाराें से बात कर रहे थे।

उन्होंने कहा हरियाणा में वर्ष 1996 से सिख अलग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की मांग कर रहे हैं। इस मांग को कांग्रेस ने हमेशा लटकाए रखा।

एक बार इस मुद्दे को चुनावी घोषणा पत्र में डालकर राजनीतिक कार्ड भी खेला। अब मामला और गंभीर किया जा रहा है। देश से कांग्रेस के हाथ से सत्ता छिन रही है।

हरियाणा में जल्द चुनाव होने वाले हैं। अब हरियाणा के सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सिखों को पूरी तरह गुमराह कर दिया है। यह सिखों का धार्मिक मसला है।

इसमें कांग्रेस को राजनीति नहीं करनी चाहिए। हरियाणा के सिख जो भेदभाव का आरोप लगा रहे हैं। वह पूरी तरह गलत और निराधार हैं। वह कई प्रोजेक्ट लेकर आए हैं।

कई योजना उनके दिमाग में घूम रही हैं। हरियाणा के सीएम हुड्डा ने एनओसी और सीएलयू नहीं दिए। हुड्डा सिखों का हितैषी होते तो वह एनओसी और सीएलयू को नहीं रोकते।

वह नहीं चाहते कि सिख एकजुट रहें। सिख संगत में फूट डालकर वह राज करना चाहते हैं। अंग्रेजी हुकूमत के समय महात्मा गांधी ने सिखों की सैद्धांतिक लड़ाई लड़ने को आजादी की आधी जंग फतेह होने की संज्ञा दी थी।

इसके बाद वर्ष 1925 में एसजीपीसी का एक्ट बना था। कांग्रेस की यह साजिश बर्दाश्त करने के काबिल नहीं है। धार्मिक मामलों को कभी राजनीतिक ढाल नहीं बनाना चाहिए।
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मौके पर उनके साथ एसजीपीसी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रघुजीत सिंह विर्क, एसजीपीसी कुरुक्षेत्र के सदस्य सरदार हरभजन सिंह मसाना, कै थल के सदस्य सरनजीत सिंह सौथा, सिरसा के सदस्य बलदेव सिंह, कवलजीतसिंह अजराना व अन्य सिख नेता मौजूद थे।  
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