2014 में भाजपा की टिकट पर जीते बख्शीश सिंह इस बार टिकट कटने पर कांग्रेस में शामिल हो गए। 2019 चुनाव में शमशेर गोगी और बख्शीश आमने-सामने थे। गोगी जीते थे, जबकि बख्शीश तीसरे नंबर पर रहे। अब दोनों एक ही पार्टी में हैं। बख्शीश जिससे पिछले चुनाव में हारे थे, उसे जिताने और अपनी पार्टी रही भाजपा को हराने के लिए मेहनत कर रहे हैं।
2014 में राकेश कांबोज को हरा विधायक बने भाजपा के कर्णदेव इस बार राकेश के सहयोगी हैं। टिकट कटने पर उन्होंने कांग्रेस का हाथ थामा। ऐसे में 2014 चुनाव के दोनों विरोधी अब एक साथ हैं। राकेश 2005 में कांग्रेस की टिकट पर जीत चुके हैं, यह उनका छठा चुनाव है। 1977 में इनके पिता देसराज भी विधायक बनने के बाद मंत्री रहे।
2014 और 19 में मनोहर लाल और उपचुनाव में नायब सैनी विधायक बने। दोनों ने पदाधिकारियों और पार्षदों को अपने साथ लगाए रखा। अब सीएम नायब सैनी लाडवा से चुनाव लड़ने गए तो यहां पर पार्षद और पदाधिकारी दल बदल रहे हैं। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष जगमोहन और कांग्रेस ने 10 साल विधायक रही सुमिता सिंह को मैदान में उतारा है। जो कांग्रेस से भाजपा में आए थे, वे वापस जा रहे हैं। वहीं भाजपा पुराने कांग्रेसियों को अपने पाले में कर रही हैं।
भाजपा और कांग्रेस ने पुराने चेहरों पर ही दांव खेला है। 2014 से विधायक रहे हरविंद्र कल्याण को भाजपा और तब कांग्रेस के प्रत्याशी रहे वीरेंद्र राठौर को दोबारा मैदान में उतार आमने सामने किया हैं। उस समय इनेलो के नरेंद्र सांगवान दूसरे नंबर पर रहे थे। 2019 से सांगवान कांग्रेस में हैं। 2009 में विजेता रहे सांगवान के खिलाफ भी राठौर ने चुनाव लड़ा था।
2019 की तरह ही मुकाबला देखने को मिलेगा। तब भाजपा के कबीरपंथी और बागी निर्दलीय धर्मपाल गोंदर में टक्कर थी। अब भाजपा ने पूर्व विधायक कबीरपंथी और कांग्रेस ने धर्मपाल गोंदर पर दांव खेला है। हालांकि साढ़े चार साल तक धर्मपाल ने सरकार को ही समर्थन दिया था और भाजपा के मंच पर दिखाई देते थे। लेकिन अब छह माह पूर्व उन्होंने कांग्रेस का हाथ थामा, पिछली बार की तरह फिर आमने-सामने हैं।