संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिलेभर में चिकित्सा अधिकारियों ने वीरवार को 9 से 11 बजे तक ओपीडी सेवाएं बंद रखकर सीधी एसएमओ भर्ती नीति का विरोध किया। इस बीच जिला नागरिक अस्पताल में आने वाले मरीजों को सुबह से लंबी कतारों में लगे रहना पड़ा। कई मरीज यूपी से आए तो कई ऑपरेशन के बाद की दवा लेने आए थे जो इंतजार कर लौट गए। इसी के साथ कई बुजुर्ग ऐसे थे जो लंबी लाइन में खड़े ही नहीं हो पाए क्योंकि पंजीकरण काउंटर के सामने करीब 50 से 60 लोग कतार में खड़े थे जबकि उस समय दो लंबी लाइनें लगी थी। इसके चलते कई मरीज इलाज कराए बिना लौट गए तो कुछ पर्ची काउंटर पर इंतजार करते-करते थककर वहीं बैठ गए।
इस बीच आपातकालीन सेवाएं, लेबर रूम, एसएनसीयू और आईसीयू जैसी सेवाओं को चालू रखा गया ताकि किसी गंभीर मरीज को परेशानी न हो। जिला नागरिक अस्पताल से प्रवक्ता डॉ. दीपक गोयल ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की 160 मेडिकल ऑफिसर, एसएमओ और उप सिविल सर्जन की पोस्ट लंबे समय से खाली हैं। हालात यह हैं कि फतेहाबाद, नूंह और जींद जैसे जिलों में स्त्री रोग विशेषज्ञ तक उपलब्ध नहीं हैं। इन जिलों की 5 से 10 लाख की आबादी भी करनाल के सरकारी अस्पतालों पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि पॉलिटिकल विल तो है, लेकिन ब्यूरोक्रेसी लॉबी इस प्रक्रिया में रुकावट डाल रही है। जो अधिकारी खुद को सबसे ऊपर समझते हैं, वही हमारी जायज मांगों पर नोटिफिकेशन जारी नहीं होने दे रहे। जिलेभर में जिला नागरिक अस्पताल समेत जिले के सभी सरकारी अस्पतालों, सभी पीएचसी, सीएचसी, अर्बन सेंटर पर 9 बजे से 11 बजे तक ओपीडी सेवाएं बंद की गई।
- डॉक्टर बोले- बिना मांगें मनवाए नहीं लौटेंगे
चिकित्सा अधिकारियों ने कहा कि हड़ताल इसलिए भी जोर पकड़ रही है क्योंकि 13-14 साल पहले रोकी गई सीधी एसएमओ भर्ती को दोबारा शुरू करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि 15-20 साल से काम कर चुके मेडिकल ऑफिसर्स को प्रमोशन के बजाय सीधे बाहर से एसएमओ भर्ती करना अन्याय है। यह कदम न केवल वरिष्ठ डॉक्टरों के अधिकारों पर चोट है बल्कि विभागीय गुणवत्ता पर भी असर डालेगा। अधिकारियों का कहना है कि 2021 में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज भी सीधी एसएमओ भर्ती के खिलाफ लिखित पत्र दे चुके हैं। जब कैडर में ही अनुभवी मेडिकल ऑफिसर्स मौजूद हैं, बाहर से भर्ती करना समझ से परे है। हरियाणा मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के प्रधान डॉ. संजय वर्मा ने बताया कि प्रमोशन की व्यवस्था बेहद कमजोर है। अधिकतर डॉक्टर एक या दो प्रमोशन लेकर ही रिटायर हो जाते हैं और एसएमओ पद तक ही पहुंच पाते हैं, जो क्लिनिकल के साथ प्रशासनिक जिम्मेदारी भी संभालता है। वेतनमान को लेकर डॉक्टरों ने कहा कि सरकार ने चार एसीपी देने का वादा किया था, जबकि अभी केवल तीन मिल रहे हैं।
ग्रेड पे 9500 लागू करने की भी मांग
एसीपी संरचना में 6600, 7600 और 8700 ग्रेड पे शामिल है। 18 साल की सेवा के बाद भी कोई अतिरिक्त फाइनेंशियल अपग्रेडेशन नहीं मिलता। डॉक्टरों की मांग है कि 20 साल बाद एक और ग्रेड पे 9500 लागू किया जाए, जैसा कि मेडिकल कॉलेजों में पहले से लागू है।
सरकार जल्द फैसला ले, ताकि हम पूरी क्षमता से मरीजों की सेवा कर सकें।
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काफी महीनों से चल रहा था इलाज
नेवल से आई मीना ने बताया कि मनोरोग विशेषज्ञ को दिखाना था। काफी महीनों से इलाज चल रहा है जिसका फोलोअप आज जरूरी था। लेकिन आज ऐसा लग रहा है कि फोलोअप के बिना ही जाना पड़ेगा। चक्कर आना और सिर दर्द जैसी समस्याओं से जूझ रही हूं। आज दवाई लेनी भी जरूरी थी।
दो घंटे से लाइन में खड़ा हूं
फूसगढ़ से आए अमित ने बताया कि फ्लू ओपीडी में जाने के लिए पर्ची कटवाने के लिए पंजीकरण केंद्र पर लाइन में दो घंटे से लाइन में खड़ा हूं। पहले ही हालत इतनी खराब है कि खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा है और दूसरा तेज बुखार चढ़ा हुआ है दूसरा इतनी देर से पर्ची कटवाने के लिए खड़े होकर लाइन में खड़ा हूं।
यूपी से सुबह पांच बजे चले थे
यूपी से आई रूबीना ने बताया कि सुबह पांच बजे पहले यूपी से चले उसके बाद फिर यहां पहुंचे तो दो घंटे और खड़ा रहना पड़ा। इतना लंबी सफर बस इसी उम्मीद में किया था कि सुबह जल्दी पहुंच गई तो दवाई मिल जाएगी जल्दी क्योंकि कानों का ऑपरेशन हुआ है। ऑपरेशन के बाद दवाइयां चली हुई हैं। वें नियमित लेनी जरूरी होती है।
- अब बिना इलाज लौटना पड़ेगा
शहर से आए अमरजीत ने बताया कि हड्डी वाले डॉक्टर को दिखाना था। दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। पूरे हाथ की हालत बिगड़ी हुई है कि उठाया भी नहीं जा रहा है। जिसके कारण काम भी प्रभावित हो रहा है। आज सोचा था कि हाथ दिखवा लूंगा लेकिन हालात देखते हुए लग रहा है कि वापिस ही जाना पड़ेगा।
वर्जन-
सरकार से मांग है कि सीधी एसएमओ भर्ती पर रोक, खाली पदों पर प्रमोशन आधारित नियुक्तियां और वेतनमान सुधार को लेकर तुरंत नोटिफिकेशन जारी करे। हम चाहते हैं कि हमारी रुटीन ड्यूटी प्रभावित न हो, लेकिन मजबूर होकर विरोध करना पड़ रहा है। मांगे मान ली जाएं तो हम और ज्यादा क्षमता से सेवा दे सकेंगे। नहीं तो अनिश्चितकालीन विरोध जारी कर दिया जाएगा जिसमें आपातकालीन सेवाएं भी बंद कर दी जाएंगी।
डॉ. दीपक गोयल, प्रवक्ता, जिला नागरिक अस्पताल