फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Karnal News: पर्यटन के नाम पर सिर्फ कर्ण लेक, अन्य स्थलों की हो रही अनदेखी

विज्ञापन
विज्ञापन
देव शर्मा
विज्ञापन

करनाल। देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने में पर्यटन का विशेष योगदान है। वहीं महाभारत काल में मित्रता और दानवीरता की अमिट छाप छोड़ने वाले अंगराज कर्ण के नाम से पहचाना जाने वाले करनाल में पर्यटन स्थलों की भारी कमी है। हरियाणा पर्यटन विभाग की ओर से यहां कर्ण झील (कर्ण लेक) और ओएसिस जैसे स्थल ही हैं।
करनाल में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यमुना क्षेत्र के टापू पर कभी कुंज पक्षियों की अधिकता से नाम पाने वाला कुंजपुरा हो या फिर पश्चिमी यमुना नगर रीवर फ्रंट। करनाल की सीमा यमुना जैसी पवित्र नदी निर्धारित करती है, लेकिन यहां स्नान करने के लिए न तो एक भी घाट है और ही कोई चिड़िया घर। इनकी कमी जिले के प्रत्येक व्यक्ति को खलती है। भले ही कर्ण झील को राजा कर्ण के नाम से पहचाना जाता है, यहां दूर दूर से पर्यटक आते भी है।
विज्ञापन

जब करनाल सीएम सिटी था, तो करनाल स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत करोड़ो रुपये की लागत से रेस्टोरेंट, बार, ऊपरी हाल, झील की रैलिंग, साइकिल ट्रैक, स्टैच्यू आदि लगाकर झील को स्मार्ट लुक देने का प्रयास किया है। जिसकी इसकी सुंदरता बढ़ी है। कर्ण लेक के एडीएम बिजेंद्र शर्मा ने बताया कि पर्यटन विभाग ने भी पिछले पांच वर्षों में कई कार्य कराए हैं, अब यहां ठहरने के लिए कक्षों की संख्या करीब 18 हो गई है। एक बड़ा हाल, उसके ऊपर करीब 150 लोगों के एक साथ बैठने की क्षमता का एक बड़ा हाल बनाया गया है। साथ यहां पर 12 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सुविधाओं से संपन्न बैंक्वेट हाल भी बना दिया गया है, जो शादियों आदि बड़े कार्यक्रमों के लिए किराए पर दिया जाता है।
करीब दो हजार लोगों की क्षमता वाला एक कॉन्फ्रेंस हाल भी बनाया गया है। यहां पर पर्यटक नौका विहार भी करते हैं, फिलहाल तो इस व्यवस्था को ठेके पर दिया गया है। ओएसिस पर भी खानपान व ठहराव की कई बेहतर सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं।
कर्ण लेक के एडीएम बिजेंद्र शर्मा ने बताया कि कर्ण लेक को और सुदृढ़ किया जा रहा है। यहां पर नौका विहार की व्यवस्था को और बेहतर करने के साथ साथ वाटर गेम्स और एडवेंचर गेम्स को भी बढ़ाने की तैयारी चल रही है। इसके अलावा लोगों को लेक से जोड़ने के लिए होली, दिवाली जैसे त्योहारों व खास अवसरों पर यहां मेले लगाने की भी योजना पर काम चल रहा है। कर्ण लेक की सुविधाएं सरकारी और प्राइवेट सभी लोगों के लिए हैं। अब चंडीगढ़-दिल्ली मार्ग की वाल्वो व एसी बसें रुकती है। कर्ण लेक की आय में करीब 20 फीसदी की वृद्धि हुई है।
विज्ञापन

कुंज पक्षियों के क्षेत्र में चिड़ियाघर तक नहीं ः कुंजपुरा के पूर्व सरपंच सुरेंद्र सिंह बताते हैं कि एक समय था, जब सैनिक स्कूल से लेकर यूपी की सीमा तक यमुना का जल क्षेत्र था, बीच में एक टापू था, जिस पर कुंज पक्षियों का डेरा था। इसके कारण उसे कुंजपुरा कहा जाने लगा था। इसके बाद यमुना ने दिशा बदली तो कुंज पक्षी भी धीरे-धीरे दिखने बंद हो गए। पहले बड़ी संख्या में यहां प्रवासी पक्षी आते थे, जो कड़ाके की सर्दियां यहां बिताते थे, इसके बाद लौट जाते थे लेकिन अब कुछ प्रवासी पक्षी ही आते हैं। जहां पहले चिड़िया चहचहाती थी, अब बच्चों को दिखाने के लिए भी कोई चिड़ियाघर नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें