निरंतर बढ़ रहे प्याज के भाव ने गृहणियों के आंसू निकाल दिए हैं। प्याज के अभाव में जहां सब्जियों का जायका बिगड़ रहा है, वहीं, लगातार बढ़ रहे भाव के कारण महिलाओं का यूपीए सरकार के प्रति पारा हाई हो रहा है।
महिलाओं की जुबानी का जिक्र करें तो केंद्र की यूपीए सरकार ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। दाल, रोटी महंगी होने के बाद अब चटनी खाने के काबिल भी लोगों को सरकार नहीं छोड़ रही है। पिछले कई माह से प्याज का भाव साठ रुपये पर अटका पड़ा था। मंगलवार को फिर दोबारा प्याज का भाव उछाल खाने के साथ अस्सी रुपये तक पहुंच गया।
अब बारिश का सीजन भी नहीं है, जो माल आने में दिक्कत हो। चार महीने पहले ही प्याज का भाव साठ रुपये तक पहुंच गया था। यूं तो अस्सी तक भी पहुंचा था लेकिन साठ पर आकर फिर अटक गया। मंडी में खरीदारी करने वाले लोगों की आंख में प्याज के भाव ने आंसू रुला दिए हैं, जो लोग दस से 15 रुपये किलो के भाव में पांच से दस किलो एक साथ प्याज खरीदते थे, वे अब आधा किलो प्याज भी विचार कर खरीदते हैं।
पुराने भाव में 15 रुपये किलो भी प्याज लगाई जाए तो दो किलो प्याज आना चाहिए लेकिन मंगलवार के भाव ने तो 15 रुपये के ग्राहक को प्याज दुकान पर जाने से ही मना कर दिया है। रसोई का पूरा बजट इस कारण बिगड़ गया है। पंद्रह रुपये का 250 ग्राम भी प्याज नहीं आता।
शहर की गृहणियों बसंत विहार निवासी संतोष कुमारी, मॉडल टाउन निवासी कृष्णा देवी, वजीरचंद कॉलोनी निवासी सरोज वर्मा, सेक्टर 13 निवासी सिम्मी, चार चमन निवासी मोनू कांगड़ा, चौड़ा बाजार निवासी गौतम जैन समेत अन्य ने बताया कि यूपीए सरकार ने महंगाई के नाम पर मध्यम वर्ग के लोगों को पहले ही मार दी है।
अब प्याज के भाव के नाम पर सरकार लोगों को लूटने के अलावा कुछ नहीं कर रही। सरकार चाहे तो एक दिन में ही देश भर की मंडियों में प्याज का भाव दो रुपये किलो भी हो सकता है। सरकार को जमाखोरों और बिचौलियों पर शिकंजा कसना होगा। ऐसा सरकार करेगी नहीं। सरकार का स्वयं का स्वार्थ है।
स्वार्थ नहीं होता तो सरकार प्याज को महंगा नहीं होने देती। अब मंडी में प्याज कहीं सत्तर तो कहीं अस्सी रुपये किलो बिक रहा है। गृहणियों की रसोई से प्याज हट गया है। केवल मजबूरी में लोग खरीदारी कर रहे हैं। राजनीतिक पार्टियों को विरोध करना चाहिए। कई साल पहले दिल्ली में प्याज के भाव आसमान छूने पर भाजपा की सुषमा स्वराज की सरकार चली गई थी।
केंद्र में भी ऐसा हो सकता है। सब्जी मंडी के दुकानदार राजू, अमर सिंह, पप्पी ने कहा कि प्याज के भाव ने उपभोक्ताओं के साथ दुकानदारों को भी रुला रखा है। सस्ता होने पर उपभोक्ता खरीदारी अधिक करता है और महंगा होने पर कम करता है। ऐसे में उन लोगों को भी दिक्कत झेलनी पड़ रही है। प्याज समेत तमाम चीजों के भाव सस्ते होने चाहिए।