1962 में हुए भारत-चीन युद्ध के परिणाम कुछ भी रहे हों, लेकिन उस दौरान भारतीय सेना ने चीनी सैनिकों के दांत खट्टे कर दिए थे। भारत-चीन के बीच युद्ध की यादें ताजा करते हुए करनाल जिले के बल्ला गांव निवासी 88 वर्षीय पूर्व सैनिक बलबीर सिंह कहते हैं कि 1962 में भी हमारा एक सैनिक चीन के 12 जवानों पर भारी पड़ा था। गोलियां खत्म होने के बाद एक पहलवान सैनिक ने अकेले 12 चीनी सैनिकों को पत्थरों पर पटक-पटककर मौत के घाट उतार दिया था।
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बलबीर सिंह का कहना है कि आज भारतीय सेना कहीं अधिक सशक्त है। अगर सरकार मौका दे तो भारतीय सेना दुश्मनों को धूल चटाने में सक्षम है। वे 1954 में भारतीय सेना में भर्ती हुए था। 1962 के चीन युद्ध के दौरान वह 20 दिन की छुट्टी पर आए हुए थे, लेकिन युद्ध के कारण उन्हें वापस ड्यूटी पर लौटने के लिए टेलीग्राम आ गया था। वह अपनी पलटन में शामिल होने के लिए लखनऊ पहुंच गए, लेकिन तब तक पलटन युद्ध के लिए कूच कर गयी थी।
बलबीर सिंह बताते हैं कि वह भी ट्रेन पकड़कर गुवाहाटी में अपनी पलटन में जा मिले। वहां से उनकी ड्यूटी चीन बॉर्डर पर ‘नाथुला’ के पास लगी थी, जो सिक्किम से ऊपर है। यहां भारत और चीन की सेना के बीच भिड़ंत हो गई थी। दो दिन वह पोस्ट पर डटे रहे। हमारे सैनिकों के कारतूस खत्म हो गए थे। इसके बाद चीन के सैनिकों से हाथापाई शुरू हो गई। इस हाथापाई मेंएक पहलवान सिपाही ने 12 चीनी सैनिकों को अकेले पटक-पटककर मार दिया था।
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बलबीर ने बताया कि उस क्षेत्र में फौज मोर्चे पर थी, लेकिन दो दिन बाद लड़ाई खत्म हो गई। इसके बाद भी साल 1965 तक बलबीर सिंह चीन बॉर्डर पर ही तैनात रहे। हिंदी चीनी भाई-भाई कहकर पहले भी उन्होंने हमें धोखा दिया और अब एक बार फिर हमारी पीठ में छुरा घोंपा है। उन्होंने भारत सरकार से ईंट का जवाब पत्थर से देने की बात कही है। बलबीर सिंह साल 1972 में सेना से सेवानिवृत्त होकर गांव वापस आ गए थे।