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कर्मों का फल भुगतना ही पड़ता है : एकता

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कर्मों का फल भुगतना ही पड़ता है : एकता - फोटो : कर्मों का फल भुगतना ही पड़ता है : एकता
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करनाल। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से शिव चित्रगुप्त मंदिर सदर बाजार में आयोजित सत्संग में प्रवचन करते हुए साध्वी एकता भारती ने कहा कि मनुष्य के जीवन में एक पूर्ण सतगुरु का होना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि सतगुरु ही एक ऐसा माध्यम है जो मनुष्य को भवसागर से पार करवाता हैं।
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साध्वी ने बताया कि इस पृथ्वी लोक में जन्म लेने वाले प्रत्येक मानव को अपने किए गए कर्मों का फल अवश्य भोगना पड़ता है इसीलिए मानव जीवन को अत्यंत दुर्लभ और अनमोल माना गया है इस संदर्भ में श्री रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास जी के वचनों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि बड़े भाग मानुष तन पावा, सुर दुर्लभ सब ग्रन्थहि गावा। साधन धाम मोच्छ कर द्वारा, पाइ ने जेहि परलोक संवारा। इस दोहे के माध्यम से बताया कि मनुष्य का शरीर बड़े भाग्य से प्राप्त होता है और देवताओं को भी दुर्लभ है, क्योंकि यही ऐसा साधन है जिसके द्वारा मोक्ष की प्राप्ति संभव है। यदि मनुष्य इस अमूल्य जीवन को पाकर भी ईश्वर-भक्ति, सद्कर्म और आत्मज्ञान के मार्ग पर नहीं चलता, तो वह इस दुर्लभ अवसर को व्यर्थ कर देता है। जीवन का वास्तविक उद्देश्य तभी पूर्ण होता है जब व्यक्ति को पूर्ण सद्गुरु का मार्गदर्शन प्राप्त हो। संवाद

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