इतना ही नहीं आरोपियों ने केवल करनाल ही नहीं बल्कि पूरे हरियाणा में अपना जाल फैला रखा था। सिविल लाइन थाना पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर आरोपियों को रिमांड पर लिया है। रिमांड के दौरान कई और खुलासे होने की संभावना है। आरोपियों ने प्राथमिक पूछताछ में कबूला है कि उन्होंने एजेंट के माध्यम से लोगों के रुपये इकट्ठा किए हैं। आरोपियों ने एक दर्जन फर्जी कंपनियां बनाई और लोगों को मोटा लालच देकर ठगते गए। लोगों की किस्त पूरा होने पर उन्होंने रुपये मांगने शुरू किये तो आरोपियों के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। इन आरोपियों ने भी लोगों से किस्त के रूप में लिए रुपयों को अपने दोस्त व रिश्तेदारों को दिए हुए हैं। छह दिन के रिमांड के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से लाखों रुपये की राशि व खरीदी गई जमीन व कंपनी से संबंधित रिकॉर्ड की जांच पड़ताल करनी है।
सिविल लाइन थाना पुलिस ने 30 लोगों की शिकायत पर आरोपी विजय कुमार वासी वार्ड नंबर 14 तरावड़ी, रमेश चंद्र बंसल वासी ज्ञान नगर सोनीपत, शिवधन वासी हरीसिंह पुरा घरौंडा, अरविंद कुमार वासी मोहदीनपुर करनाल, राजपाल वासी दुर्गा कालोनी करनाल, अमरिंद्र सिंह वासी रामनगर करनाल के खिलाफ केस दर्ज कर रिमांड पर लिया हुआ है। गुरुवार को आरोपियों का रिमांड लिया है और पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर कार्रवाई शुरू कर दी है। शुकवार को आरोपियों की निशानदेही पर यूपी समेत अन्य स्थानों पर छापेमारी की गई। पुलिस आरोपियों के कब्जे से ठगी गई राशि को बरामद करने की कोशिश कर रही है।
बनाई एक दर्जन कंपनी
वर्ष 2009 में आरोपी विजय कुमार ने अपने साथियों के साथ मिलकर पंचायत भवन करनाल में एक सेमिनार का आयोजन किया। इसमें गरीब लोगों को आमंत्रित किया। इसमें सिलिकॉन प्रोजेक्ट इंडिया लिमिटेड कंपनी दर्शाकर इसका कार्यालय कोलकाता में बताया। पूरे उत्तर भारत में व्यापार फैलाने की प्लानिंग की। आरोपियों ने एक दर्जन फर्जी कंपनियां दिखाई और प्रत्येक कंपनी की संपत्ति पांच-पांच करोड़ रुपये दिखाई। ऐसे में लोग इनके झांसे में आते गए और डबल पैसे के चक्कर में अपने पैसे गंवाते रहे।
रिमांड में उगले कई राज
अदालत में दिए गए रिमांड पेपर में पुलिस ने दावा किया है कि आरोपी विजय कुमार ने बताया कि कटिहार, बिहार से एजेंट राजीव रंजन को कंपनी के लेनदेन के कागजात व 60 लाख रुपये दिए हुए हैं। दस लाख रुपये इसके दोस्त नरेंद्र कुमार मुजफ्फरपुर, बिहार से बरामद करने हैं। आरोपी रमेश चंद्र ने बताया कि गांव चौसाना यूपी में जमीन के कागजात हैं और 15 लाख रुपये बीकानेर से बरामद करने हैं। आरोपी ने बताया कि कंपनी की तरफ से दी गई कार भांजे सुमित वासी दिल्ली को दे रखी है। आरोपी शिवधन ने बताया कि उसके दोस्त अमित गुप्ता बिहारी वासी कटिहार बिहार से 50 लाख रुपये दिए हुए हैं। आरोपी अरविंद कुमार ने बताया कि पांच लाख रुपये अपने दोस्त योगेश अलीगढ़ यूपी को दिए हैं। आरोपी राजपाल ने भी कंपनी की कार दोस्त मुरादाबाद यूपी को दी है। दोस्त प्रतीक को दो लाख रुपये दिए हुए हैं। आरोपी अमरिंद्र सिंह ने बताया कि एक लाख व कागजात अपने दोस्त अनिल कुमार शाह वासी जौनपुर यूपी को दे रखे हैं। पुलिस अब इन आरोपियों से रिमांड के दौरान यह बरामद करेगी और इनकी व्यक्तिगत रिकॉर्ड भी चेक करेंगी।
इन लोगों ने खोली पोल
शिकायकर्ता सुबे सिंह लाठर वासी गांव खेड़ा छपरा, देवराज, सुशील कुमार वासी फूसगढ़, रणबीर सिंह वासी फुसगढ़, राजपाल वासी डबरकी कलां, सुरेशदास वासी उत्तमनगर फुसगढ़, श्रवण कुमार वासी डबरकी कलां, राजकुमार वासी रांवर, सीमा रानी पत्नी सुनील वासी डबरी, सुदेश कुमारी पत्नी अनिल कुमार वासी डबरी, समुर चंद वासी उपलाना, मनिंद्र वासी डबरी, डॉ. ईश्वरपाल वासी नरूखेड़ी, सतपाल वासी शेखुपुरा सुहाना, संजीव कुमार वासी डबरी कला, कृष्ण कुमार वासी फूसगढ़, मंगतदिन वासी शेखुपुरा सुहाना, राजेंद्र लाठर वासी फुसगढ़, पुरुषोत्तम वासी फुसगढ़, सन्नी कुमार वासी फुसगढ़, अनिल कुमार वासी फुसगढ़, अनिल कुमार पुत्र जयपाल वासी फुसगढ़, संजय कुमार वासी हसनपुर, रमेश चंद्र वासी लाडवा कुरुक्षेत्र, सुरेश कुमार वासी लाडवा, सुरजीत सिंह वासी फुसगढ़, मुकेश वासी मॉडल टाउन, राजवंती वासी भुसली, रविंद्र कुमार वासी जुंडला, ओमप्रकाश वासी नलीपार, संदीप वासी फुसगढ़ ने पुलिस को शिकायत की है।
लोगों को एजेंट बनने का दिया लालच
लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए आरोपियों ने एजेंट बनने का लालच दिया। आश्वासन दिया कि एजेंट का काम करने वाले लोगों को 24 हजार रुपये आजीवन पेंशन, निशुल्क मकान, एक गाड़ी दी जाएगी। इसके अलावा भारी भरकम कमिशन भी दिया जाएगा। वादे के बाद झूठे बुकलेट छपवा दिए। आरोपी विजय ने आश्वासन दिया कि हमने ऑफिस करनाल मुगल कैनाल और सेक्टर-4 ट्रक यूनियन में कार्यालय खोला है। बाकि आरोपियों ने पानीपत, सोनीपत, जींद के पिल्लूखेड़ा, शाहाबाद कुरुक्षेत्र में अपने दफ्तर खोले और लोगों को अपने जाल में फंसाते गए। लोग इनके बहकावे में आ गए और एजेंट के रूप में काम करना शुरू कर दिया। लोगों को जोड़ने के लिए प्रेरित करते रहे। आरोपियों ने प्लान के मुताबिक शेयर मार्केट में पैसा लगाने के झूठे आश्वासन पर अपने पास ही पैसा इकट्ठा करते रहे और उन्हें रसीद भी देते रहे। लोगों के करोड़ों रुपये इकट्ठे कर लिए।
ये बनाई कंपनियां
समय पूरा होने पर जब लोगों ने पैसे मांगने शुरू किए तो आरोपियों ने कहा कि हम सिलीकॉन कंपनी से संबंध खत्म कर लिए हैं। अब हमने अपनी कंपनी बना ली हैं। एमएस सिलिकॉन नेटवर्क, एलटीडी, हेड ऑफिस करनाल में सहित कई कंपनियां तैयार कर ली। फर्जी कंपनियां दोषी नंबर 1 ने अन्य के साथ मिलकर फर्जी पहचान पत्र भी जारी कर दिए। यह पहचान पत्र ऐसी कंपनी के नाम से जारी कर दिए जोकि वास्तव में थी ही नहीं। कंपनियों की संपत्ति भी पांच करोड़ रुपये दिखाई। जबकि कंपनी के पास कोई संपत्ति नहीं और किराये के रुपये में ले रहे थे।
होटल तक बनाने के झांसे दिए
रियल एस्टेट और फ्यूचर प्रोजेक्ट में मुरथल में एक होटल बनाने का प्रारूप दिखाया है। कई में डेयरी फार्मिंग दिखाया गया। इस प्रकार का कोई प्रोजेक्ट नहीं था। दोषी नंबर 1 ने दो नंबर के नाम से व अपने रिश्तेदारों से चल व अचल संपत्ति खरीदी हुई है, जो उनके पर्सनल खाते में जा रही है। काम करते रहे ब्याज सहित रुपये मिलते रहेंगे। राजनीतिक नेताओं, पुलिस अधिकारियों, आईएस अफसरों के साथ संबंध हैं। टीडीएस भी काटते थे और विभाग में जमा नहीं कराया।
वर्जन
मामले की जांच के लिए एसआईटी बनाई गई है। आरोपियों को रिमांड पर लिया गया है, किसी भी सूरत में दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। जल्द ही मामले से जुड़े अन्य खुलासे भी किए जाएंगे। पुलिस अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए प्रयास कर रही है।
-पंकज नैन, एसपी, करनाल