कड़ाके की सर्दी में जब लोगों का जमीन पर खाली पैर रखना मुश्किल हो रहा है, ऐसे में जिले के राजकीय स्कूलों के बच्चे फर्श पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है वे किस तरह से पढ़ाई करके देश का भविष्य सुधार सकेंगे। शिक्षा विभाग की अनदेखी और स्कूलों के मुखिया की लापरवाही से नन्हें छात्र-छात्राओं को काफी परेशानी हो रही है।
अहम बात यह है कि बच्चों के पास बैठने के लिए टाट तक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं, जबकि अध्यापक चाय की चुस्कियों के साथ सोफे पर आराम करते मिले। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वर्किंग आवर्स में न तो बच्चों की शिक्षा का ध्यान रखा जा रहा है और न ही उनके स्वास्थ्य का। यह सवाल जिला शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों के रवैये पर भी खड़े होते हैं कि आखिर क्यों नहीं वे इन नन्हें बच्चों का दर्द समझते?
जिले के प्राइमरी स्कूलों से लेकर सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में छात्रों के बैठने के लिए पर्याप्त बेंच और कमरों की व्यवस्था नहीं है। वहीं, जिन स्कूलों में ये सुविधाएं हैं भी तो वहां के अध्यापकों की लापरवाही से छात्रों को उन सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। मंगलवार को अमर उजाला की टीम ने जब शहर के कई स्कूलों का दौरा किया तो उसमें कई स्कूलों में छात्र बिना दरी के खुले आसमान के नीचे फर्श पर सर्दी से कंप कंपाते नजर आए। वहीं, अध्यापक बंद कमरों में सर्दी से बचने के लिए चाय की चुस्कियों का आनंद लेते रहे।
पॉश इलाके सेक्टर-13 स्थित राजकीय कन्या उच्च विद्यालय में जब टीम ने इस बारे में अध्यापकों से पूछा तो उन्होंने कहा कि वे कई बार विभाग के उच्चाधिकारियों से बेंचों की डिमांड कर चुके हैं, लेकिन विभाग द्वारा स्कूलों में बेंच नहीं भेजे गए हैं। जब टाट के बारे में बात की तो भी अध्यापक एक दूसरे पर बात टालते रहे, किसी ने कहा कि दूसरे अध्यापक के पास टाट की चाबी है तो किसी ने जानकारी से ही इंकार कर दिया।
इस बारे में स्कूल हैडमास्टर सुमन देवी का कहना है कि स्कूल में टाट हैं, लेकिन चाबी किसी दूसरे अध्यापक के पास है। वहीं, शहर स्थित राजकीय प्राइमरी स्कूल के हालात भी ऐसे ही मिले। यहां बच्चे बाहर बैठे थे, लेकिन उनको टाट उपलब्ध कराए गए थे, लेकिन पांचवीं तक की कक्षा में एक भी अध्यापक मौजूद नहीं था। सभी अध्यापक सर्दी से बचने के लिए चाय का आनंद ले रहे थे। अमर उजाला की टीम को देखने के बाद अध्यापकों में हड़कंप मच गया और आनन फानन में अपनी कक्षाओं में दौड़े। यह हालात अकेले इन दो स्कूलों के नहीं है, बल्कि जिले के ज्यादातर स्कूलों में बच्चों को इसी प्रकार जमीन पर बैठाया जा रहा है।
अधिकारियों ने पल्ला झाड़ा
विभाग के अधिकारियों और अध्यापकों ने तो लापरवाही का ठीकरा एक दूसरे सिर पर फोड़कर अपना पल्ला झाड़ लिया है, लेकिन हाड़ कंपा देने वाली इस सर्दी में अगर बच्चों को बिना टाट पट्टी के जमीन पर बैठाया जा रहा है तो इससे अध्यापकों की लापरवाही का भी अंदाजा लगाया सकता है। दूसरा, ऐसे स्कूलों के प्रबंधन पर भी सवाल उठते हैं कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? क्यों बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खेला जा रहा है? वहीं, दूसरी ओर जब टीम ने अधिकारियों से बातचीत की तो उनका जवाब था कि किसी भी स्कूल में बेंच की कमी नहीं है। अध्यापक अपनी मनमर्जी से बच्चों को बाहर बैठा देते हैं। ऐसे अध्यापकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
प्राइमरी और मिडिल स्कूल में सबसे अधिक परेशानी
जिले में प्राइमरी से सीनियर सेकेंडरी के 552 स्कूलों में करीब 1.40 लाख छात्र हैं। इनमें से आधे से ज्यादा स्टूडेंट्स जमीन पर बैठने को मजबूर हैं। जिले के प्राइमरी व मिडिल स्कूलों में छात्रों की तुलना में बेंचों की संख्या कम है। कई स्कूलों में तो टाट की सुविधा भी नहीं है। ऐसे में शहर के 13.2 डिग्री तापमान पर कड़ाके ठंड में छात्रों को फर्श पर बैठना पड़ रहा है। कई स्कूलों में तो लाइट की भी सुविधा नहीं है।
ये जिले में स्कूलों की स्थिति
1 प्राइमरी स्कूल: 484
2. मिडिल स्कूल : 123
3. हाई स्कूल : 79
4. सीनियर सेकेंडरी स्कूल: 88
5. किसान स्कूल : 1
छात्रों की संख्या : 134441
वर्जन
जिले के सभी स्कूलों में बेंच व टाट उपलब्ध करवाए गए हैं। इसके अलावा, एक हजार नए बेंच का आर्डर भी किया गया है। कई स्कूलों में सारी सुविधा होने के बाद भी अध्यापकों की लापरवाही के चलते इस प्रकार की शिकायतें आ रही हैं। इसके लिए हर रोज एक दो स्कूलों दौरा कर व्यवस्था का जायजा लिया जा रहा है। जिन स्कूलों में अध्यापकों की लापरवाही सामने आ रही है, उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा जाएगी। मैंने खुद भी एक बार एक स्कूल का दौरा किया था, जिसमें बच्चों को जमीन पर बैठाया गया था। यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
- सरोज बाला गोर, डीईईओ करनाल।
वर्जन
प्रदेश सरकार शिक्षा और व्यवस्था को लेकर गंभीर है। बच्चों को इस प्रकार से जमीन पर बाहर नहीं बैठाना चाहिए, वे इस मामले की जांच कराएंगे। बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं, उनको अच्छी शिक्षा और अच्छा स्वास्थ्य देना हमारी जिम्मेदारी है। सरकार की तरफ से बच्चों को हर प्रकार की सुविधा दी जाएगी, ताकि वे बड़े होकर प्रदेश और देश का नेतृत्व कर सकें। अगर कहीं पर लापरवाही बरती जा रही है तो उनके खिलाफ एक्शन लेंगे।
रामबिलास शर्मा, शिक्षा मंत्री