पटवारियों ने बिना सर्वे किए ही अपनी कलम से 12 जिंदा लोगों को रिकार्ड में मृत दिखा दिया। ऐसे में उनकी पेंशन भी कट गई। दोबारा से पेंशन शुरू कराने के लिए बुजुर्ग कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। ऐसे में विभाग बुजुर्गों से उनके जिंदा होने के सबूत मांग रहा है।
अहम बात यह है कि मंगलवार को रिकार्ड में मृत बताया गया बुजुर्ग जिला समाज कल्याण विभाग में अपने जिंदा होने के सबूत लेकर पहुंच गया। मामले का खुलासा होने के बाद विभाग समेत अधिकारियों में हड़कंप का माहौल बना हुआ है। आनन-फानन में चंडीगढ़ मुख्यालय ने भी रिकार्ड देखने के बाद रिकार्ड में मृत दिखाए गए 12 बुजुर्गों को जिंदा मान लिया और उनकी पेंशन जारी करने की अनुमति दी है।
मंगलवार को जिला समाज कल्याण विभाग के कार्यालय में मोहड़ी जागीर गांव का बुजुर्ग देशराज अपने जिंदा होने का सबूत लेकर पहुंचा। देशराज ने बताया कि पटवारियों ने उन्हें झूठा मृत दिखाकर पेंशन बंद करा दी, इसके लिए कोई जांच पड़ताल तक नहीं की गई। ऐसे में अक्टूबर, 2015 से उनको न तो पेंशन मिल रही है और न ही विभाग उन्हें जिंदा मान रहा है। तीन माह से वह अपने जिंदा होने के सबूत जुटा रहा है।
देशराज ने बताया कि ढाई साल से बुढ़ापा पेंशन ले रहा था। दसवीं कक्षा के सर्टिफिकेट में भी इनका जन्म 17 जून 1953 है। बुजुर्ग ने बताया कि सरपंच, नंबरदार से जिंदा होने का एफिडेविट लेकर कार्यालय में जमा कराने आया है। ऐसा अकेले देशराज के साथ नहीं बल्कि जिले के 12 बुजुर्गों के साथ हुआ है।
यूं हुई गड़बड़ी
दरअसल, पिछले पांच माह से सरपंचों के हाथ से बागडोर जाने के बाद पटवारियों को पेंशन बांटने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। बिना जांच पड़ताल के ही पटवारियों ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर दी। पटवारियों द्रारा पेंशन वितरण करने की फाइल जब जिला समाज कल्याण विभाग के कार्यालय में पहुंची तो अधिकारियों ने पटवारियों की रिपोर्ट के मुताबिक मृत (रिकार्ड में) बुजुर्गों की पेंशन रोक दी।
अगले महीने पेंशन नहीं मिलने पर बुजुर्ग विभाग के कार्यालय पहुंचे। अधिकारियों ने उनका रिकॉर्ड चेक किया तो उनको मृत दिखाया हुआ मिला। मामले का खुलासा तब हुआ जब पेंशन कटने वाले बुजुर्ग जांच के लिए समाज कल्याण विभाग पहुंचे। जिले में एक लाख 45 हजार लोग पेंशन ले रहे हैं।
विभाग का बढ़ाया काम
जिला समाज कल्याण विभाग में करीब साढ़े छह करोड़ रुपये का पेंशन घोटाला होने के बाद पहले ही पेंशन ऑनलाइन करने में वर्कलोड बढ़ा हुआ है। ऐसे में पटवारियों ने उनका काम और बढ़ा दिया है। बुजुर्गों की नजर में विभाग की तरफ से लापरवाही बरती गई है, जबकि पटवारियों की कागजी रिपोर्ट ने बुजुर्गों से लेकर विभाग के अधिकारियों की टेंशन बढ़ा दी है। अब बुजुर्ग अपने जिंदा होने के प्रमाण पत्र लेकर जमा कराने में लगे हैं।
दस हजार बुजुर्गों की पेंशन नहीं हो पाई ऑनलाइन
जिले में एक लाख 45 हजार पेंशन धारक हैं और अभी तक एक लाख 35 हजार पेंशनधारियों की पेंशन विभाग की तरफ से ऑनलाइन की जा चुकी हैं। दस हजार पेंशन धारी ऑनलाइन नहीं हो पाए हैं। इन बुजुर्गों के नाम व अन्य कागजी प्रक्रिया पूरी नहीं करने के कारण इन्हें बैंक से पेंशन नहीं मिल रही है। अधिकारियों का कहना है कि इन बुजुर्गों को कागजात शीघ्र बनवाने होंगे, तभी इनको पेंशन मिलेगी।
इन जिंदा बुजुर्गों को दिखाया मृत
1. बलबीर कौर पत्नी हरभजन सिंह
2. जोगिंद्र कौर पत्नी गुरदयाल सिंह
3. धनपती पत्नी रामकिशन
4. देशराज पुत्र पन्नुराम
5. प्रेमवती पत्नी हरपाल
6. राजबीर पुत्र साधुराम
7. कमला पत्नी कृष्ण
8. गुरदीप कौर पत्नी हजुरा सिंह
9. समरजीत कौर पत्नी धीरा सिंह
10. सरजीत कौर पत्नी करनैल सिंह
11. इंदु पत्नी मंशी
12. महेंद्र सिंह पुत्र लक्खा सिंह
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वर्जन
जिले के 12 बुजुर्गों को पेंशन बांटने वाले अधिकारियों ने कार्यालय में मृत होने की रिपोर्ट दी थी। इस पर पेंशन रोक ली गई थी। बुजुर्गों ने सरपंच और नंबरदारों के हस्ताक्षर युक्त जिंदा होने के प्रमाण पत्र की फाइल जमा कराई है। बुजुर्गों की जिंदा होने के सबूत मुख्यालय भेजे गए थे, इनको अप्रूवल मिल गई है। अब इन 12 बुजुर्गों को जितने महीने की पेंशन रुकी हुई है पूरी मिलेगी। विभाग की तरफ से इसमें किसी प्रकार का फाल्ट नहीं है।
-सत्यवान, जिला समाज कल्याण विभाग के अधिकारी।