करनाल। हरियाणा सीईटी परीक्षा में उस वक्त असमंजस की स्थिति बन गई जब एक जैसे चेहरे, नाम, दस्तावेज और माता-पिता का नाम देखकर परीक्षा केंद्र और एचएसएससी अधिकारियों को शक हो गया। मामला जुड़ा था जींद के डीकाना गांव से आईं जुड़वां बहनों मुस्कान और गुंजन से। दोनों बहनें अलग-अलग शिफ्ट में परीक्षा देने करनाल पहुंची थीं।
मुस्कान का सेंटर सुबह की शिफ्ट में आरएस पब्लिक स्कूल में था जबकि गुंजन ने गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में शाम को परीक्षा दी। पेपर खत्म होने के बाद जब वेरिफिकेशन की प्रक्रिया चली तो दोनों के एक जैसे नाम, चेहरे, जन्मतिथि और दस्तावेजों ने अधिकारियों को उलझा दिया।
संदेह गहराया तो दोनों बहनों को अलग-अलग बुलाकर करीब चार घंटे तक पूछताछ की गई। मुस्कान को जहां साढ़े चार घंटे बैठाकर सवाल पूछे गए, वहीं गुंजन से करीब दो घंटे तक जानकारी ली गई। हालांकि बाद में संतुष्टि होने पर दोनों को जाने दिया गया।
मुस्कान ने बताया कि इस बार परीक्षा में ऐसे 13 केस सामने आए, जिनमें से 9 जुड़वा भाई-बहनों के थे। अधिकारियों को शक था कि कहीं कोई परीक्षार्थी दूसरे की जगह पेपर तो नहीं दे रहा। गुंजन ने बताया कि जुड़वां होने के कारण ऐसी स्थिति वह पहले भी स्कूल-कॉलेज में झेल चुकी हैं, लेकिन इस बार परीक्षा की प्रक्रिया काफी लंबी चली। उसका पेपर शाम 5 बजे था, लेकिन वह शाम 7 बजे तक परीक्षा केंद्र से बाहर नहीं आ सकी।
मुस्कान और गुंजन दोनों एमकॉम पासआउट हैं। उनके पिता वीरेंद्र सिंह ने बताया कि जुड़वा बच्चों के कारण इस तरह की दिक्कतें पहले भी प्रतियोगी परीक्षाओं में आई हैं, लेकिन इस बार प्रक्रिया में बहुत देर लगाई गई। हालांकि पूछताछ सामान्य थी, पर बेटियों को घंटों तक बैठाए रखा गया, जिससे मानसिक दबाव बना।
एचएसएससी द्वारा भेजी गई सूची के आधार पर वेरिफिकेशन हुआ, लेकिन जुड़वां परीक्षार्थियों के मामलों ने अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ा दीं।