प्रदूषण को लेकर एनजीटी, केंद्र व राज्य सरकारें चाहे जितने भी दिशा-निर्देश जारी करें लेकिन अभी भी न तो किसान न शहरवासी इसकी गंभीरता को समझने को तैयार हैं। रविवार को अधिकारी-कर्मचारी छुट्टी में व्यस्त थे और खेत खलिहान, राइस मिल्स हो या कल्पना चावला मेडिकल कालेज का गेट, पराली से लेकर कूड़े में तक आग धधक रही थी। यहां तक कि विद्युत ट्रांसफार्मर के नीचे आग जल रही थी भूमिगत केबिल सुलग रहे थे जिससे लाखों का नुकसान तो होगा ही, बिजली भी ठप हो सकती है, लेकिन दो घंटे तक मुख्य मार्ग के किनारे झाड़ियों में लपटें उठने के बावजूद किसी ने भी इसकी सूचना अग्निशमन दल या प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नहीं दी।
जब स्मार्ट सिटी में जागरूकता का आलम यह है तो ग्रामीण क्षेत्रों में पराली जलाने पर रोक लगने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। नगर निगम हो या एचएसआईआईवीपी या शहरी विकास प्राधिकरण सभी को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से नोटिस जारी किया जा चुका है। नगर निगम के कार्यकारी अभियंता ने अपने अधीनस्थों को दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं लेकिन यह दिशा निर्देश सिर्फ अभिलेखों पर ही है। जब प्रदूषण के प्रति वही विभाग जागरूक नहीं है तो जिन पर लोगों को जागरूक करके बढ़ते प्रदूषण को रोकने की जिम्मेदारी है तो ऐसे में भविष्य ही बताएगा कि दिल्ली, एनसीआर से लेकर हरियाणा तक के आसमान पर छाने वाली धुंध कितनी और कैसे कम हो पाएगी।
अनाज मंडी से पीछे इंडस्ट्रियल एरिया में कई राइस मिल्स हैं, इन मिलों के आसपास रविवार को दिन दहाड़े कई किसान धान की पराली जलाते दिखे। जिसका धुआं अनाज मंडी के ऊपर से भी हवाओं के साथ गुजर रहा था। हर कोई धुएं का गुबार देखकर यही कह रहा था कि जब धुआं उठ रहा है तो कहीं न कहीं पराली जल ही रही है लेकिन इसे देखने वाला कोई नहीं है। एक मिल की दीवार से सटे खेतों में तेजी के साथ पराली में आग लगाई जा रही थी।
रविवार को अपराह्न करीब तीन बजे कल्पना चावला मेडिकल कालेज के गेट पर रखे विद्युत ट्रांसफार्मर के नीचे कई दिनों से पड़े कूड़े के ढेर में किसी ने आग लगा दी। जो यहां खड़ी झाड़ियों में पड़े कूड़े में लग गई। आग धधक उठी। जिसकी लपटें ट्रांसफार्मर तक भी पहुंच रही थी, इतना ही मुख्य मार्ग से ट्रांसफार्मर की ओर जाने वाली मोटी केबिलों के ऊपर आग जली तो केबिलों को भी नुकसान पहुंचा लेकिन लोग आराम से गुजरते रहे। किसी एक ने भी कालेज प्रशासन, बिजली विभाग, नगर निगम या फिर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सूचना देने की जरूरत महसूस नहीं की।